दुनिया भर में दीन की शिक्षा का प्रसार प्रसार करने वाली तबलीगी जमात के बीच चले आ रहे विवाद को देखते हुए दारुल उलूम ने बड़ा फैसला लिया है और संस्था के भीतर होने वाली तबलीगी जमात की सभी गतिविधियों पर पूर्णतया पाबंदी लगा दी गई है। दारुल मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने इसे छात्रों को हित में उठाया गया कदम बताया और कहा है कि जब तक दोनों गुट एक नहीं जाते, तब तक संस्था इस विवाद से अलग रहेगी। उन्होंने साफ किया कि इस विवाद में दारुल उलूम किसी भी गुट की तरफ नहीं है।
तबलीगी जमात के अमीर रहे मौलाना जुबैर का करीब तीन वर्ष पूर्व इंतकाल हो गया था। इसके बाद जमात का अमीर बनने के लिए मौलाना जुबैर के बेटे मौलाना जुहैर और जमात के वरिष्ठ जिम्मेदार मौलाना साद के बीच विवाद शुरू हो गया था। तबलीगी जमात के दो गुटों में बंट गई थी। एक गुट का समर्थन करने के लिए दुनिया भर से लोग दारुल उलूम से तरह तरह के सवाल पूछ रहे हैं। इन्हीं सवालों से परेशान होकर बुधवार को दारुल उलूम के जिम्मेदारों के बीच वार्ता हुई और इसके बाद छात्रों को इस विवाद से बचाने के लिए तबलीगी जमात की संस्था के भीतर हर प्रकार की गतिविधियों पर पूर्णतया पाबंदी लगाने का फैसला लिया गया।
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने बयान जारी कर कहा है कि दीनी मसलों पर तबलीगी जमात में कोई झगड़ा नहीं है, इंतजाम को लेकर उनके बीच झगड़ा चल रहा है। इसका दारुल उलूम का कोई लेना देना नहीं है। जमात का झगड़ा पूरी दुनिया के सामने आ चुका है। दारुल उलूम के पास सवाल आ रहे हैं कि दारुल उलूम एक गुट की तरफ है। वह पहले भी कई बार इस बात को साफ कर चुके हैं। बनारसी ने बयान में फिर से कहा कि दारुल उलूम किसी भी गुट की तरफ नहीं है। दारुल उलूम अपने स्तर से जमात का काम कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।