फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धरती का सीना चीरकर हो रहा खनन  

Tue, 26 Jun 2018 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
जनपद में अवैध खनन रोके नहीं रुक रहा है। सरधना तहसील में तो आलम ये है कि कुशावली के जंगल में खनन माफियाओं ने कई सौ बीघा जमीन में खनन कर गहरे तालाब बना डाले हैं। हाल ये है कि यह खनन दिन-रात चल रहा है। लेकिन तहसील प्रशासन इसकी जानकारी तक से इंकार कर रहा है। जबकि ग्रामीणों की मानें तो यह खनन पिछले काफी समय से लगातार चल रहा है।   
विज्ञापन

केवल 10 ट्रॉली खनन
अवैध खनन पर रोक मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में है। अवैध खनन को रोकने के लिए सरकार ने काफी मनन कर खनन के मानक भी बदले हैं। 10 ट्रॉली तक किसान अपने खेत से मिट्टी खनन कर सकता है। लेकिन उस मिट्टी का खनन वह खेत को समतल करने और अपने निजी प्रयोग के लिए करेगा। इस खनन की अनुमति संबंधित तहसील के एसडीएम से सीधे ली जा सकती है। 
लेनी होगी अनुमति
व्यावसायिक खनन की अनुमति का नियम अब पूरी तरह बदल गया है। इसके लिए अब किसी प्रकार की रायल्टी नहीं देनी होती है। लेकिन पर्यावरण विभाग से एनओसी लेने के बाद अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) कार्यालय से खनन विभाग के माध्यम से खनन की अनुमति ली जाती है। 
विज्ञापन

पर्यावरण प्रमाण पत्र है मुश्किल
मिट्टी खनन के लिए पर्यावरण विभाग से एनओसी लेना आसान नहीं है। शासन स्तर से होने वाली इस अनुमति में दो से तीन माह तक लग जाते हैं और औपचारिकताएं बहुत ज्यादा पूरी करनी होती हैं। जिस कारण खनन माफिया इस प्रमाण पत्र को लेने से बचते हैं। 
नए नियम से राजस्व को क्षति
नए नियम में मिट्टी खनन की रायल्टी समाप्त कर दी गयी है। ऐसे में सिर्फ पर्यावरण विभाग से एनओसी लेकर जिला प्रशासन से मिलने वाली अनुमति के आधार पर ही अनुमति में स्वीकृत क्षेत्रफल में खनन किया जा सकता है। लेकिन इस नए नियम से सरकारी खजाने को काफी नुकसान पहुंचा है। क्योंकि एक तरफ जहां रायल्टी का धन आना बंद हो गया है। वहीं, पुराने नियम पर अवैध खनन पकड़े जाने पर निर्धारित रायल्टी से कई गुना तक आर्थिक दंड वसूले जाने का प्रावधान था। जो इस नियम से समाप्त हो गया है। 
नहीं ले रहे अनुमति 
वर्तमान में स्थिति ये है कि पिछले दिनों खनन करने वाले लोग भागदौड़ कर पर्यावरण विभाग से एनओसी लेकर आए थे, जिसके आधार पर उन्हें अनुमति मिली थी। लेकिन उनकी अनुमति समाप्त हो चुकी है। नई अनुमति फिलहाल किसी के पास नहीं है। लेकिन सरधना तहसील के कुशावली व अटेरना के जंगल में दिन-रात धड़ल्ले से खनन माफिया जेसीबी मशीन से खनन करने में लगे हैं। 
ये है खेतों की स्थिति 
कुशावली व अटेरना के जंगल में कई सौ बीघा जमीन गहरे तालाबों में तब्दील कर दी गयी है। खनन माफिया रात दिन यहां खनन में लगे हैँ और निर्माणाधीन निजी कॉलोनियों के भराव में इस मिट्टी को महंगे दामों पर बेच रहे हैं। लेकिन लगातार हो रहे इस खनन से प्रशासन अनजान बना हुआ है। 
डीएम के आदेश भी ताक पर 
जिलाधिकारी ने पिछले दिनों बैठक में चेतावनी दी थी कि जिस भी तहसील क्षेत्र में खनन पाया गया, वहां के एसडीएम और तहसीलदार इसके जिम्मेदार होंगे। इसके बाद सरधना तहसीलदार द्वारा पिछले सप्ताह खनन के एक मामले में थाने में एफआईआर भी दर्ज करायी गयी। लेकिन सेटिंग के इस खेल को नहीं रोका जा सका है। 

सूचना मिलेगी तो कराएंगे एफआईआर
अगर सूचना मिलेगी तो एफआईआर दर्ज करायी जाएगी। पिछले दिनों भी एक व्यक्ति के खिलाफ तहसीलदार द्वारा एफआईआर दर्ज करायी गयी थी। खनन के इस मामले को भी दिखवाया जाएगा। -राकेश कुमार, एसडीएम सरधना
जांच कराकर कराएंगे कार्रवाई
खनन यदि छोटा है और किसान 10 ट्रॉली उठा रहे हैं, तो एसडीएम स्तर से स्वीकृति पर खनन हो सकता है। लेकिन यदि खनन बड़ा है तो अवैध है क्योंकि हमारे यहां से कुशावली की कोई स्वीकृति नहीं है। इसकी जांच कराकर एफआईआर दर्ज करायी जाएगी। -संदीप चटर्जी, जिला खनन अधिकारी 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें