- बारिश होने पर रेत से बना तटबंध हो जाता है क्षतिग्रस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। सरकार के आदेश पर खादर क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए 73 करोड़ की परियोजना से तटबंध बनाने का काम शुरू किया गया। सिंचाई विभाग द्वारा रेत से तैयार किया जा रहा तटबंध बारिश के पानी के आगे खुद ही नहीं टिक पा रहा है। ऐसे में बाढ़ से खादर क्षेत्र को सुरक्षित कैसे बचाएगा। तेज बारिश में जगह-जगह से क्षतिग्रस्त तटबंध से खादर क्षेत्र के लोगों को बाढ़ का खतरा सता रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की बाढ़ से बचाने के लिए बनाया जा रहा तटबंध रेतीली मिट्टी से बनाया गया है जो बारिश होने पर बार-बार कटाव होने से क्षतिग्रस्त हो रहा है। इससे गंगा का जलस्तर बढ़ने पर तटबंध टूटने की आशंका बनी हुई है। मेरठ-मुजफ्फरनगर की सीमा के खेड़ा मजादपुर गांव से मेरठ की सीमा शुरू हो जाती है। मनोहरपुर गंगा पुल तक करीब 11 किलोमीटर तक तटबंध बनाना प्रस्तावित था। इसके लिए सिंचाई विभाग को सरकार द्वारा 73 करोड़ का बजट आवंटित किया गया। इस कार्य को पूरा करने के लिए जून 2025 तक का समय निर्धारित किया गया, परंतु अभी तक तटबंध बनाने का कार्य पूर्ण किया जा सका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा तैयार किया गया तटबंध मानक के अनुसार नहीं बनाया गया है। इस तटबंध में रेतीली मिट्टी का प्रयोग किया गया है। इस कारण यह बारिश होने पर बार-बार कट रहा है। ग्रामीणों को इस तटबंध से बाढ़ का खतरा सता रहा है, क्योंकि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर सिंचाई विभाग ने पिछले महीने बारिश होने पर तटबंध की मरम्मत भी कराई थी। यदि समय रहते तटबंध की मरम्मत नहीं कराई जाती है तो यह गंगा की धारा को रोकने से पहले ही बारिश में बह जाएगा।
बारिश में ही बह रहा तटबंध
खादर क्षेत्र के सुंदर सिंह, महेंद्र सिंह, धीरज, नरेंद्र आदि ने बताया कि बाढ़ को रोकने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा जो तटबंध बनाया गया है, जब वह बारिश में खुद बह रहा है तो वह गंगा की तेज धारा को कैसे रोकेगा। खादर क्षेत्र के लोग अभी बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि तटबंध भी पूर्ण रूप से मजबूत नहीं हुआ है। एक-दो साल बाद यह खुद ही बारिश में बह जाएगा। यह बाढ़ को रोकने का पुख्ता प्रबंध नहीं है।
बरसात के बाद कराई जाएगी मरम्मत
तटबंध की एक बार मरम्मत कराई जा चुकी है। बरसात के बाद दोबारा मरम्मत कराई जाएगी। यह तटबंध बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ है। बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित है। -प्रमोद कुमार,
एक्सईएन, सिंचाई विभाग
बारिश में क्षतिग्रस्त तटबंध स्रोत संवाद
बारिश में क्षतिग्रस्त तटबंध स्रोत संवाद