गन्ना अधिकारियों व कर्मचारियों की लोकसभा चुनाव ड्यूटी में लगने से गन्ना सेंटरों की नियमित चेकिंग बंद हो गई है। इसके चलते सेंटरों पर जमकर घटतौली हो रही है। एक अनुमान के तौर पर मंडल के 1200 से ज्यादा गन्ना सेंटरों पर किसानों को रोजना 50 लाख रुपये की चोट पहुंचाई जा रही है। किसानों का कहना है कि सेंटर पर गन्ना तौल से 5 से 6 फीसदी घटतौली हो रही है। वहीं धर्मकांटा की तौल वाली बुग्गी व ट्राली पर भी 2 से 3 फीसदी घटतौली की पर्ची बनाकर किसानों की जेब काटी जा रही है।
प्रदेश की शुगर इंडस्ट्री किसानों से मिल गेट और गांवों में सेंटर बनाकर गन्ना खरीद करती है। मिल गेट पर जहां गन्ने की तौल सही होने की बात कही जाती है, वहीं गांव में बने सेंटरों पर जमकर घटतौली की शिकायत मिलती है। यहां तैनात तौल लिपिक घटतौली करके किसानों का शोषण करते हैं। तौल प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए गन्ना विभाग ने इलेक्ट्रानिक तौल प्रणाली को लागू किया गया। सेंटरों पर छापामारी भी की जाती है। इसके बावजूद घटतौली का खेल नहीं रुका। मंडल की 16 शुगर मिलों के 1200 से ज्यादा सेंटरों पर पेराई सत्र के पांच महीने में करीब 1800 निरीक्षण ही हो पाए हैं।
करीब 50 लाख रुपये रोजाना की चपत
मंडल की 16 शुगर मिलों की गन्ना पेराई क्षमता 9 लाख 73 हजार प्रतिदिन है। क्षमता के सापेक्ष औसतन 90 फीसदी गन्ने की खरीद होती है, जो 8 लाख 75 हजार 700 क्विंटल बैठती है। सेंटरों के माध्यम से 70 फीसदी गन्ना खरीद के चलते रोजाना करीब 6 लाख 12 हजार क्विंटल गन्ने की खरीद बैठती है। इसमें औसतन ढाई फीसदी घटतौली के हिसाब से 15 हजार क्विंटल गन्ना चोरी कर लिया जाता है। इसकी कीमत करीब 48 लाख बैठती है।
घटतौली की बनाई जा रही तौल पर्ची
मवाना क्षेत्र के बहसुमा, समसपुर और रोहटा आदि गांवों के किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गांवों में बने सेंटरों के किसान धर्मकांटे पर अपनी बुग्गी और ट्राली तुलवाकर ले जाते हैं। धर्मकांटे पर बुग्गी तौल की 10 रुपये और ट्राली की 20 रुपये फीस ली जाती है। सेंटर के तौल लिपिक अपने कांटे पर बुग्गी तौलने की बजाय गन्ना सीधे यार्ड में डलवा देते हैं और धर्मकांटे की पर्ची के सापेक्ष 2 से 3 फीसदी कम की पर्ची बनाकर किसान को दे देते हैं। इसका किसान विरोध नहीं करते हैं। उनका कहना है कि सीधी तौल करने पर तौल लिपिक पांच से छह फीसदी घटतौली कर देता है।
बोलते आंकड़े
मंडल में कुल मिल 16
मिलों की पेराई क्षमता 9 लाख 73 हजार क्विंटल प्रतिदिन
पेराई क्षमता के सापेक्ष गन्ना खरीद करीब 90 फीसदी
मिल गेट पर गन्ना खरीद 30 फीसदी
सेंटरों पर गन्ना खरीद 70 फीसदी
सेंटरों पर होने वाली घटतौली औसतन 2.5 फीसदी प्रति क्विंटल
सेंटरों पर अनुमानित घटतौली करीब 15 हजार क्विंटल प्रतिदिन
जांच कराई जाएगी
चुनाव के दौरान भी सेंटरों पर नजर रखी जा रही है। जहां से भी शिकायत मिलती है, तुरंत छापामारी करते हैं। धर्मकांटे की तौल अमान्य है। केवल सेंटर पर ही तौले गए गन्ने की पर्ची बनाई जा सकती है। अगर कहीं ऐसा हो रहा है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। -हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र