दाल, मसाले, सब्जी सभी महंगाई की आग में पक रहे हैं। महंगाई रोकने में सरकार विफल साबित हो रही है। अब मसालों के दामों में भी उछाल आ गया है। थोक बाजार से गली-मोहल्लों की दुकान पर पहुंचते-पहुंचते दाल और मसालों के दाम में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो रही है। इसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ रहा है।
रसोई का बजट इन दिनों पूरी तरह डगमगा रहा है। महंगाई में चना दाल ने अन्य सभी दालों को पीछे छोड़ दिया है। दो माह में उड़द की दाल के थोक बाजार में दाम 35 रुपये प्रतिकिलो तक बढ़े हैं। फुटकर में यही महंगाई 60 से 70 रुपये किलो तक पहुंच रही है। दाल और मसालों पर कमर तोड़ महंगाई ने जनता का बजट ही खराब कर दिया है। हालांकि धनिया के दामों में जबरदस्त कमी आई है। तीन माह पहले थोक बाजार में 200 रुपये प्रतिकिलो बिकने वाला धनिया अब मात्र 100 रुपये किलो में बिक रहा है। चने के दाम 94 से 100 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। डेढ़ माह पहले चने के दाम 60 रुपये प्रति किलो थे।
थोक बाजार में दालों के रेट (प्रति किलो में)
दाल एक माह पहले अब
दाल चना 80 रु. 104 रु.
बेसन 80 रु. 110 रु.
चना 70 रु. 94 रु.
काली मसूर 70 रु. 80 रु.
उडद धोया दाल 100 रु. 135 रु.
थोक बाजार में मसालों के रेट (प्रति किलो में)
मसाले एक माह पहले अब
जीरा 150 रु. 200 रु.
मिर्च साबुत 120 रु. 150 रु.
हल्दी 100 रु. 100 रु.
सौंफ 100 रु. 100रु.
धनिया 200 रु. 100 रु.
व्यापारी विनोद गुप्ता कहना है कि थोक और फुटकर में 15 से 20 प्रतिशत का अंतर होता है। क्योंकि फुटकर विक्रेता थोक में खरीद के बाद भाड़ा और अन्य खर्च भी जोड़कर सामान बेचता है। इसी कारण फुटकर में महंगा होता है। अगर कोई फुटकर विक्रेता इससे अधिक मुनाफा ले रहा है तो यह गलत है। फुटकर विक्रेताओं को जनता का भी ध्यान रखना चाहिए।