अप्रैल माह में एक के बाद एक आत्महत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं। अब तक सात घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें छात्र, सेल्समैन, कारोबारी की पत्नी आदि शामिल हैं। ऐसे में मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी की वजह से दिमाग के अंदर रासायनिक बदलाव होता है, जिससे सहनशीलता कम हो जाती है। साइकोसिस और बाइपोलर डिसऑर्डर के कारण सुसाइड केस बढ़ जाते हैं।
आत्महत्या ज्यादातर वे लोग करते हैं जो मानसिक बीमारी जैसे डिप्रेशन, सीजोफ्रेनिया, पर्सनेलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं। कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि आत्महत्या करने वाला व्यक्ति न तो नशा करता है और न ही बीमारी से पीड़ित होता है। ऐसे लोग इंपल्सिव व्यवहार के कारण यह कदम उठा लेते हैं। यकायक तनाव में आने के कारण, आर्थिक स्थिति खराब होने, कानूनी कार्रवाई हो जाने, प्रेम संबंध या रिश्तों में धोखा मिलना, पारिवारिक झगड़ा होने पर उन्हें आत्महत्या ही आसान रास्ता नजर आता है। गर्मी में तनाव सहन करने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए कई बार आत्महत्या की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
बता दें कि 18 अप्रैल को टीपीनगर की गंगा कालोनी में ग्राफिक्स डिजाइनर की पत्नी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले 17, 16 14, 9 और दो अप्रैल को भी आत्महत्या की घटनाएं हुई थीं।