अमरोहा को रिकार्ड बरकरार रखने और गाजियाबाद में मतदान प्रतिशत बढ़ाने की जद्दोजेहद
सैयद यासिर रज़ा
मेरठ। दूसरे चरण के मतदान के लिए बुधवार को प्रचार थम गया। इस चरण में आठ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदान होगा। इसमें अमरोहा, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा की सीटों पर 26 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। बात 2019 की करें तो इस चुनाव में सबसे अधिक मतदान अमरोहा और सबसे कम मतदान गाजियाबाद में हुआ था। इन दोनों जिलों के निर्वाचन से जुड़े अफसरों के लिए चुनौती रहेगी। अमरोहा जो अपना अधिकतम मत प्रतिशत के रिकार्ड को बरकरार रखना चाहेगा वहीं गाजियाबाद अपना रिकार्ड बेहतर करने की जद्दोजहद करेगा। पिछले चरण में मतदान के प्रतिशत में आई गिरावट को लेकर निर्वाचन आयोग की चिंता बढ़ना वाजिब है। ऐसे में मतदान का प्रतिशत किस तरह बढ़ाया जाए इसके लिए आयोग संभ्रांत लोगों से अपील करा रहा है।
पहले चरण के चुनाव के मुकाबले दूसरे चरण में भाजपा का प्रदर्शन पिछले दो चुनाव में काफी अच्छा रहा था। भाजपा ने 2014 में दूसरे चरण की सभी सीटों पर और 2019 में दूसरे चरण की अमरोहा सीट छोड़ बाकी सात सीटों पर जीत का परचम लहराया था। इस बार भाजपा सात सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बागपत में भाजपा की सहयोगी रालोद के प्रत्याशी राजकुमार सांगवान मैदान में हैं।
मेरठ में पिछले चुनाव में हुई थी 64 प्रतिशत पोलिंग
मेरठ लोकसभा क्षेत्र में पिछले चुनाव में 64.26 प्रतिशत पोलिंग हुई थी जबकि 2014 में 63.11 प्रतिशत मतदान हुआ था। यहां से भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल लगातार तीन बार सांसद चुने जा चुके हैं। इस बार भाजपा से अरुण गोविल प्रत्याशी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि अरुण गोविल लगातार तीन बार की तर्ज पर इस सीट को एक बार फिर भाजपा की झोली में डालने में कामयाब होते हैं कि नहीं। मेरठ में 2019 में 2014 से भी अधिक मतदान हुआ था। इसकी मुख्य वजह सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई को बताई गई थी।
जयंत चौधरी के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव
यह चुनाव जयंत चौधरी के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव माना जा रहा है। इस चरण में रालोद बागपत में लड़ रही है। पिछले दो चुनावों को छोड़ दें तो यह सीट परंपरागत तरीके से जयंत चौधरी के परिवार की रही है। चौधरी अजित सिंह इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे। 2014 में भाजपा के सत्यपाल सिंह ने यहां से जीत हासिल की। इस चुनाव में सबसे अधिक 66.72 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2019 में सत्यपाल सिंह ने मौजूदा रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को 22 हजार वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए थे। इस बार भाजपा और रालोद के बीच समझौता हो गया और सीट रालोद के पास आ गई। सत्यपाल सिंह मैदान से बाहर हो गए। अब वह जयंत चौधरी की कितनी मदद करते हैं यह बाद में पता चलेगा।
सपा-कांग्रेस चार-चार सीटों पर एनडीए से करेंगी दो-दो हाथ
इस चरण में चार सीटों पर समाजवादी पार्टी और चार सीटों पर कांग्रेस पार्टी चुनाव लड़ रही है। इसमें अमरोहा, गाजियाबाद, बुलंदशहर और मथुरा कांग्रेस के हिस्से में आई है जबकि मेरठ, बागपत, गौतमबुद्धनगर और अलीगढ़ समाजवादी पार्टी चुनाव लड़ रही है। पिछले तीन चुनाव में इन सभी आठ सीटों पर कांग्रेस एक बार भी नहीं जीती है जबकि समाजवादी पार्टी ने 2009 में बुलंदशहर की सीट पर जीत हासिल की थी। 2009 में मतों का प्रतिशत काफी कम था। देश में कांग्रेस की सरकार बनी थी। हालांकि जिन सीटों पर 26 अप्रैल को मतदान होना है, उसमें से एक भी सीट कांग्रेस नहीं जीत सकी थी। इन आठ सीटों पर तीन सीटों पर रालोद, दो-दो पर भाजपा व बसपा और एक सीट सपा के हिस्से में आई थी।
कब-कब कहां कितना हुआ मतदान
सीट- 2019- 2014- 2009
अमरोहा- 71.01-70.97-60.20
मेरठ- 64.26-63.11-48.23
बागपत-64.64- 66.72- 47.90
गाजियाबाद-55.86-68.01- 45.29
गौतमबुद्धनगर-60.49-60.38- 58.45
बुलंदशहर- 62.49-58.15- 45.07
अलीगढ़-61.64-64.02- 51.40
मथुरा-61- 59.36-54.13