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धूल फांक रहे लाखों की लागत से बने कक्ष और शौचालय

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धूल फांक रहे लाखों की लागत से बने कक्ष और शौचालय
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सहारनपुर। विभागों की मनमानी कार्यप्रणाली का नया नमूना सामने आया है। जो भवन पांच साल पहले बनकर तैयार हो गए, वह हस्तांतरित नहीं किए गए। अब भवन जर्जर होने लगा है, खिड़कियां और दरवाजे टूटने लगे हैं। बावजूद इनकी सुध लेने को अफसर तैयार नहीं है।
यह मामला है राजकीय कन्या इंटर कॉलेज पुल जोगियान परिसर में वर्ष 2015 में बनाए गए चार बड़े कक्षों और शौचालय का। विभागीय सूत्रों ने बताया कि कक्ष पैकफेड द्वारा बनवाए गए थे। लाखों रुपये की लागत से तैयार कक्ष बनने के बाद अभी तक शिक्षा विभाग को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं। इस वजह से कक्षों की मरम्मत और देखरेख नहीं हो पा रही है। बारिश में दरवाजे खराब हो चुके हैं। एक दरवाजा टूटकर अलग भी हो चुका है। खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं। कक्षों के सामने बनाई गई सीढ़ियां और दीवारें नीचे से जर्जर हो चुकी हैं, जिससे भवन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। विद्यालय परिसर ही में एक बड़ा शौचालय बना है। सूत्रों की मानें तो शौचालय पर दस लाख रुपये से अधिक खर्च हुए थे। इसका निर्माण यूपीपीसीएल द्वारा कराया गया था। यह भी अभी तक विभाग को हस्तांतरित नहीं हुआ है। गेट पर ताला जड़ा है, जिसे जंग लग चुका है। दीवारों से बाहरी ओर से प्लास्टर खराब होना शुरू हो गया है। रैंप और सीढ़ियां भी जर्जर हो चुकी हैं। शौचालय तक जाने के लिए कंटीली झाड़ियों से होकर जाना पड़ता है। यानी रास्ता नहीं बनाया गया है। वेंटीलेशन के लिए लगाए गए एल्युमीनियम की खिड़कियां दीवारों को छोड़कर बाहर निकल रही हैं। इससे इसकी गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। सूत्र दोनों ही भवनों पर 40 लाख रुपये से अधिक खर्च होने की बात कह रहे हैं।
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कक्षों और शौचालयों को लेकर विद्यालय स्तर से कुछ भी कहना ठीक नहीं है। कक्ष और शौचालय अलग-अलग विभागों ने बनाए हैं। वह दोनों भवनों को कब शिक्षा विभाग को हस्तांतरित करेंगे, यह अधिकारियों के स्तर का मामला है।
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- शोभा चौधरी, प्रधानाचार्य, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज।
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कक्षों और शौचालयों के हस्तांतरण को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई थी, मगर कोरोना और लॉकडाउन की वजह से प्रक्रिया लटक गई। जल्द ही दोनों भवनों को विभाग को हस्तांतरित कराकर इस्तेमाल में लाया जाएगा।
- अजय श्रीवास्तव, सहायक लेखाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा)।
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