शहर की खराब ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने को उच्चस्तर से तैयारी की जा रही है। शहर के चौराहों पर अतिक्रमण, यातायात का पालन न कराना, अवैध टेंपो, ई-रिक्शा जैसे तमाम कई वजहों से जाम लगता है। इसको देखते हुए चौराहे हाईटेक बनाने और चालान का सिस्टम ऑनलाइन करने की तैयारी हो चुकी है। ट्रैफिक ने यलो सिस्टम लागू करने के लिए क्रेन, सीसीटीवी कैमरे और अन्य उपकरण भी खरीद लिए हैं। लखनऊ, नोएडा के बाद अब मेरठ शहर में भी ऑनलाइन चालान और सीधा उनके घर पर पहुंचने की प्रक्रिया जल्द ही लागू हो जाएगी। जाम से निजात कैसे मिले, इसके बारे में मेरठ पुलिस से कई बार पूछा गया। पुलिस का तर्क था कि ट्रैफिक पुलिस में फोर्स की कमी है। लेकिन अफसरों का कहना है कि पुलिस फोर्स की कमी से ज्यादा यातायात को नियमानुसार से चलाने की जरूरत हैं। पुलिस ने शुरुआत में कमिश्नर आवास चौराहा और बेगमपुल चौराहे पर यह व्यवस्था चालू करने की तैयारी की है।
एमडीए के पैसे से खरीदे संसाधन
यलो लाइन सिस्टम लागू करने के लिए पुलिस ने एमडीए द्वारा मिले 78 लाख रुपये से संसाधन खरीदने शुरू कर दिए हैं। टीआई सुनील कुमार ने बताया कि एमडीए के पैसे से 10 ट्रैमो (ट्रैफिक मोबाइल), एक क्रेन और 20 डिजिटल सीसीटीवी कैमरे खरीदे हैं। उक्त कैमरों में वॉयस रिकार्डिंग भी की जाएगी। यह कैमरे शहर के सभी चौराहों पर लगाए जाएंगे।
पुलिस लाइन में बनेगा कंट्रोल रूम
ट्रैफिक कंट्रोल और चौराहों पर जाम की स्थिति देखने के लिए पुलिस लाइन में अलग से एक ट्रैफिक कंट्रोल रूम बनेगा। कंट्रोल रूम में लगी स्क्रीन पर शहर में लगे कैमरों के जरिए व्यवस्था देखी जाएगी। इसके अलावा वाहनों का रूट चार्ट बनाया गया है। किस रूट पर कितनी सिटी बस, ई-रिक्शा और यात्रियों को देखते हुए वाहन चलाए जाए, इसको लेकर भी मंथन चल रहा हैं। रूटों पर चलने वाले वाहनों के रंग भी अलग अलग होंगे।
ऐसे होगा ऑनलाइन चालान
येलो लाइन पर वाहनों का पहिया चढ़ते ही वह सीसीटीवी कैमरे में कैद हो जाएगा। फोटो स्कैन होगा और सीधा चालान हो जाएगा। यह सिस्टम ऑनलाइन चलेगा, इसमें किसी के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं। मेरठ शहर में तो ई-चालान की प्रक्रिया पहले से चल रही हैं। अब उसको सिर्फ ऑनलाइन करना बाकी है। इस प्रक्रिया से किसी की सिफारिश नहीं चलेगी और न ही पुलिस की जरूरत पडे़गी।