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यूपी: तिहरे हत्याकांड में मुकर गए चश्मदीद गवाह, अब कैसे मिलेगा पीड़ित परिवार को इंसाफ

Thu, 18 Apr 2019 11:54 AM IST
कपिल kapil गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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युवकों की मौत की सूचना पर मौके पर जमा भीड़ और युवकों की मौत के बाद रोते परिजन - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में सरेआम तीन लोगों को बेरहमी से मारा गया। इंसाफ की खातिर आमने-सामने गवाह बनाए गए। कानूनी लड़ाई की नींव रखी गई। इसके बावजूद इंसाफ अभी अधूरा है। गवाह कोर्ट में पहुंचते ही मुकर गए हैं। पुलिस की गवाही पर तिहरा हत्याकांड टिका हुआ है। हत्या में शामिल लोगों को सजा दिलाने के लिए पुलिस ने दो बार क्राइम सीन भी किया। स्थानीय लोगों को समझाया भी कि मजबूत पैरवी करें। लेकिन वारदात को लेकर दोनों पक्षों के लोग बार-बार मीटिंग कर समझौते की पटकथा तैयार करते रहे। पुलिस दावा करती है कि दोनों पक्षों में एक कुख्यात ने समझौता करा दिया है, जिस कारण अभी इंसाफ अटक गया है।

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खूनी संघर्ष में चली थीं गोलियां 
तारीख सात अक्तूबर 2014 थी। बाइक की टक्कर लगने पर तेली व गद्दी समाज के लोगों के बीच दिनदहाडे़ गोलियां चलीं, जिसमें तेली समाज के शाहिद, उमर और गद्दी पक्ष से मुर्तजा की हत्या हो गई। तीन लोगों की हत्या में 40 लोगों को नामजद कराया गया। तत्कालीन एसओ लिसाड़ी गेट रवेंद्र यादव ने इसकी जांच की। 10-12 लोगों के नाम मुकदमे में और शामिल हुए। पुलिस ने चार्जशीट लगाकर कोर्ट में दाखिल की। 

गवाह बनाए थे चश्मदीद 
सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला का कहना है कि तेली व गद्दी पक्ष के लोगों में पुराना विवाद था। बाइक टकराने को लेकर दोनों पक्षों में पहले मारपीट हुई। लाठी-डंडे और फिर गोलियां चलीं। शेरदीन, अल्लामेहर, इमरान, हकीम सहित दर्जनों लोग घायल हुए। पुलिस ने वारदात के चश्मदीद लोगों को ही गवाह बनाया था। तत्कालीन एसओ लिसाड़ी गेट रवेंद्र यादव ने विवेचना की थी। आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत कोर्ट में विवेचना के साथ लगाए हैं।

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सुनवाई से पहले मुकर गए गवाह 
मामला एडीजे-5 की कोर्ट में विचाराधीन है। शाहिद पक्ष के अधिवक्ता परवेज आलम का कहना कि तिहरे हत्याकांड में सुनवाई से पूर्व गवाह मुकर गए। पुलिस ने मुकदमे में शेरदीन, अल्ला मेहर, अफसर उर्फ सगीर समेत 86 गवाह बनाए थे। दोनों पक्षों के बीच समझौते की पटकथा तैयार हुई तो गवाह भी पलट गए। उन्होंने कोर्ट में हत्यारोपियों के खिलाफ गवाही देने से इंकार कर दिया। कोर्ट में पहुंचे तो घटना की जानकारी से इंकार कर दिया।

पुलिस की गवाही अहम
हत्या जैसी संगीन वारदात में पुलिस की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गवाह भले ही मुकर गए। लेकिन पुलिस की गवाही भी महत्वपूर्ण होती है। पैरोकार के साथ मीटिंग की गई, जिसमें निर्देश दिए हैं कि हत्यारोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्यों के साथ गवाही दें। - नितिन तिवारी, एसएसपी

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