दिल्ली रोड स्थित नवीन फल मंडी में सोमवार सुबह सनसनीखेज वारदात हो गई। बाइक से आए दो बदमाशों ने आढ़त पर सिपाही के साथ बैठे फल मंडी के प्रधान की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के विरोध में व्यापारियों ने नवीन सब्जी, दाल और फल मंडी बंद कराते हुए दिल्ली रोड जाम कर दी। पीड़ित पक्ष ने पुरानी रंजिश बताकर छह लोगों को नामजद किया है।
पुलिस के अनुसार सुबह करीब 10 बजे फल मंडी के प्रधान रहीसुद्दीन कुरैशी (42) पुत्र हाजी नवाब निवासी पिलोखड़ी, लिसाड़ी गेट अपनी आढ़त पर सिपाही बलराज सिंह के साथ बैठे थे। प्रधान का बेटा सलमान और मुंशी शादाब कर्मचारियों से फलों की पेटियां लगवा रहे थे। तभी वहां दो बदमाश पैशन बाइक से पहुंचे। आढ़त से करीब दस कदम की दूरी पर एक बदमाश हेलमेट लगाए खड़ा रहा जबकि कैप लगाए दूसरा बदमाश रहीसुद्दीन के पास पहुंचा। जिसने बिना कोई मौका दिए रहीसुद्दीन की कनपटी से सटाकर दो गोलियां मारीं। गोली चलते ही बगल में कुर्सी पर बैठा सिपाही बलराज वहां से भाग गया। दोनों बदमाश आराम से फरार हो गए। रहीसुद्दीन को केएमसी अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
एसपी सिटी के अनुसार वारदात रंजिशन और शूटरों द्वारा करनी लग रही है। 2004 में फल मंडी में व्यापारियों के दो गुटों में गोलियां चली थीं, जिसमें जब्बार की मौत हो गई थी। इस मामले में रहीसुद्दीन व उसके भाई नौशाद आदि नामजद हुए थे। दोनों पक्षों में समझौता हो गया था, लेकिन अंदरूनी विवाद चल रहा था। मंडी में जमीन पर कब्जे को लेकर 20 दिन पहले सलीम व रियाजुद्दीन ने प्रधान को धमकी दी थी। हत्या में सलीम और रियाजुद्दीन के अलावा उनके बेटों साकिब, आहत, इलियास व मुस्तकीम को टीपी नगर थाने में नामजद किया गया है। हत्यारोपी जल्द गिरफ्तार होंगे।
जेल में बंद कुख्यात सारिक ने ली प्रधान की सुपारी
नवीन फल मंडी के प्रधान रहीसुद्दीन कुरैशी की हत्या के तार जेल से जुड़े हैं। हत्या की पटकथा करीब 15 दिन पहले जेल में रची गई थी। पुलिस के अनुसार जेल में बंद कुख्यात सारिक ने प्रधान की हत्या की सुपारी ली और फिर जेल से अपने शूटर नदीम से हत्या की वारदात करा दी। पुलिस नदीम की तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार प्रधान रहीसुद्दीन का सलीम व रियाजुद्दीन से विवाद चल रहा था। सलीम और रियाजुद्दीन भी मंडी में ही आढ़ती हैं। इन दोनों के अलावा भी रहीसुद्दीन की कई लोगों से दुश्मनी बताई गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुख्यात सारिक से 15 दिन पहले कुछ लोग जेल में मुलाकात करने गए थे। इस दौरान रहीसुद्दीन की हत्या की योजना बनी। नदीम सारिक और कासिफ उर्फ चीता का शार्प शूटर है, जो भाड़े पर ही हत्या की वारदात करता है। दो महीने पहले नदीम ने ही सारिक के कहने पर कोतवाली में पार्षद आरिफ व उसके भतीजे शादाब की हत्या की थी। इसकी जानकारी पुलिस को हुई थी। लेकिन शूटर अभी तक हत्थे नहीं चढ़ पाया।
रिपोर्ट में दर्ज नहीं होते शूटर
पुरानी अदावत या रंजिश में हत्या की घटनाएं सुपारी देकर कराई जा रही हैं। पुलिस नामजद आरोपियों की तलाश करती है। लेकिन शूटरों की नहीं। इस बार भी पुलिस ने यही गलती दोहराई कि शूटरों को नामजद नहीं कराया। पीड़ित परिजन बार-बार कहते हैं कि हत्या शूटरों द्वारा की गई, इसके बावजूद पुलिस मुकदमे में शूटर को दर्ज नहीं करती। यही वजह है कि शूटर आसानी से बच जाते हैं। कोतवाली में भी पुलिस ने नामजद आरोपी जेल भेज दिए, लेकिन शूटरों को नहीं पकड़ा।
पुलिस नहीं कसती शिकंजा
जेल में बैठे कुख्यात सुपारी पर हत्या करा रहे हैं। लेकिन पुलिस खामोश बैठी है। पुलिस आरोपियों को जेल भेजने में जल्दबाजी करती है, मगर हत्या के पीछे के कारणों को नहीं तलाशती। जिसके चलते फिर हत्या जैसी घटना हो जाती है। जेल में बंद कुख्यात पर पुलिस कोई शिकंजा नहीं कस पाती। जेल में पैसे लेकर हत्या की प्लानिंग होती है। सुपारी देने और लेने वालों के बीच मुलाकात होती है। शूटरों को फोन पर या मुलाकात पर टारगेट दिया जाता है। लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती।
बदले की भावना भी पहलू
पुलिस के अनुसार प्रधान की हत्या वर्ष 2004 में जब्बार की हत्या होने का बदला बताया जा रहा है। गैंगवार में दोनों पक्ष शूटरों के हाथों वारदात करा रहे हैं। पैसा पानी की तरह बहाकर एक-दूसरे पक्ष के लोगों की सुपारी दी जा रही है। सवाल कि पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं लगती। प्रधान की नवीन मंडी में सरेआम हत्या कर शूटर फरार हो गए और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। गैंगवार में लगातार हत्याएं रोकने में पुलिस पूरी तरह से फेल साबित हो रही है।