मुकदमे के वादी का कहना है कि अभियुक्त अपनी भतीजी सोनी पर बुरी नीयत रखता था। वारदात के दिन सोनी के अब्बू और अम्मी घर के बाहर गए हुए थे। वह घर पर अकेली थी। चाचा घर पर पहुंचा और बुरी नीयत डाली। सोनी ने विरोध किया तो अभियुक्त ने छुरा दिखाया। लेकिन विरोध करने पर किशोरी की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। भीड़ की रूह कांप गई थी।
पसीजा पड़ोसी का दिल, बेटी मानकर की पैरवी
सोनी की सनसनीखेज हत्या में अपनों के धोखे के साथ पड़ोसी की इंसानियत भी दिखती है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र सिंह धामा ने बताया कि जब सोनी की उम्र दो साल थी, तब उसकी मां का इंतकाल हो गया था। पिता मानसिक तौर पर परेशान रहने लगा। आरोपी चाचा और परिवार के अन्य लोगों ने सोनी का पालन पोषण किया। लेकिन जब सोनी 17 साल की हुई तो चाचा की नीयत बिगड़ गई। विरोध करने पर उसकी हत्या हुई। निर्मम हत्या की पैरवी करने के लिए परिवार से कोई सामने नहीं आया। ऐसे में पड़ोसी फारुख ने इंसानियत दिखाई। अदालत की चौखट तक इंसाफ की लड़ाई लड़ी।
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