मेडिकल कॉलेज स्थित मैदान में शुक्रवार सुबह हुए दंगा नियंत्रण रिहर्सल के दौरान छोड़े गए आंसू गैस के गोलों से 47 छात्राओं की हालत बिगड़ गई। छद्म बलवाइयों पर छोड़े गए गोले छिटककर बीएससी नर्सिंग कॉलेज छात्रावास में जाकर गिरे। उस समय 37 से ज्यादा छात्राएं मेस में नाश्ता कर रही थीं। जबकि कुछ हॉस्टल में मौजूद थीं।
गैस की चपेट में आने से एक दर्जन से ज्यादा छात्राएं बेहोश हो गईं। एक-एक कर हालत बिगड़ने पर सभी छात्राओं को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। इस दौरान पहुंचीं सीओ सिविल लाइन से नर्सिंग की अन्य छात्राओं और स्टाफ भिड़ गया। जिसके बाद कोई अधिकारी पीड़ित छात्राओं का हाल जानने नहीं पहुंचा।
मेरठ मेडिकल कॉलेज परिसर में ही थाना मेडिकल है। पंचायत चुनाव के मद्देनजर मेडिकल थाने की पुलिस शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे मेडिकल कॉलेज परिसर में ही स्थित सौ मीटर से भी छोटे मैदान में दंगा नियंत्रण रिहर्सल करने पहुंची थी। खास बात यह है कि पुलिस द्वारा इसकी मेडिकल कॉलेज प्रशासन से अनुमति भी नहीं ली गई थी। अभ्यास के दौरान बलवाईयों की भूमिका निभा रहे कुछ पुलिसकर्मी भागकर मैदान के दूसरे छोर पर पहुंच गए। इसी बीच पुलिस की तरफ से इन बलवाईयों पर आंसू गैस के गोले दागे गए। जो मैदान के ऊपर से होकर सड़क पार करते हुए बीएससी नर्सिंग कॉलेज के छात्रावास में जाकर गिरे।
कुछ गोले मेस के बाहर साइड में खाली पड़ी जमीन पर गिरे तो कुछ हॉस्टल के अंदर चौक पर। जिस वक्त ये गोले आकर गिरे, उस वक्त करीब 37 से अधिक छात्राएं मेस में नाश्ता कर रही थीं। जिनकी हालत आंसू गैस की चपेट में आने के कारण बिगड़ गई। आंखों में तेज दर्द, लगातार पानी बहने, सांस लेने में दिक्कत के चलते करीब एक दर्जन छात्राएं बेहोश होकर गिरीं तो मेस में अफरातफरी और चीखपुकार मच गई। यही हाल हॉस्टल में मौजूद छात्राओं का भी हुआ। देखते ही देखते करीब चार दर्जन छात्राओं की हालत बिगड़ गई।
सूचना पर मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता और नोडल ऑफिसर डॉ. दिनेश राणा समेत तमाम लोग मौके पर पहुंचे। पीड़ित छात्राओं को आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। देर शाम कॉलेज प्रशासन ने बताया कि फिलहाल इमरजेंसी में करीब दो दर्जन छात्राएं भर्ती हैं, जबकि बाकी का इलाज छात्रावास में ही चल रहा है।
उधर, घटना के बाद छात्राओं की जानकारी लेने के लिए पहुंचीं सीओ स्वर्णजीत कौर से नर्सिंग की छात्राएं व अन्य स्टाफ भिड़ गया। जिसके चलते उन्हें कुछ ही देर में वहां से लौटना पड़ा। इसके बाद कोई भी पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी घटना की जानकारी या पीड़ित छात्राओं का हालचाल जानने के लिए नहीं पहुंचा।
इन छात्राओं की हालत बिगड़ी
मेरठ। रजत राना (अंबेडकरनगर), साक्षी (देहरादून), मीना, प्रियंका सिंह (गाजीपुर), नेहा यादव (अंबेडकरनगर), फरजाना, हिमानी ठाकुर (बिजनौर), भावना, मोनिका, शाहीन, आकांक्षा (मुजफ्फरनगर), पूनम त्रिपाठी, मानसी (कानपुर), सोनम (शामली), अनविता (बरेली), दीपा, प्रियंका, शिवा, वर्षा, मनप्रीत, अभिलाषा, कल्पना, नेहा, बुलबुल, आसिफा, उर्वशी (मेरठ), प्रीति, मेघा, आरुषि, कृष्णा (गाजियाबाद), प्रज्ञा (नोएडा), अंजली (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड), रितु (लखनऊ), शिवानी (शामली), ममता (पुणे), प्रिया सिंह, नमिता, अन्नया, संगम (अलीगढ़), रीना, आकांक्षा (सहारनपुर), तनु (बुढ़ाना, मुजफ्फरनगर), इंदु (बागपत), प्रियंका गौतम (मऊ), राधिका रावत (लखनऊ), संजू (आजमगढ़), अभियंका सिंह (कन्नौज)।