‘रेप की घटनाओं के लिए महिलाएं खुद जिम्मेदार’। आरटीआई के जवाब में पुलिस की इस टिप्पणी पर डीजीपी जावीद अहमद ने कड़ी नाराजगी जतायी है। बलात्कार के मामलों में यूपी पुलिस की सोच पर ‘अमर उजाला’ में बृहस्पतिवार के अंक में यह समाचार प्रकाशित हुआ था, जिसका डीजीपी ने संज्ञान लिया है। उनके पीआरओ डीआईजी राहुल श्रीवास्तव ने आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना से यूपी के थानों से आयी सूचनाओं की प्रति मांगी है।
आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने 2014 में यूपी के तमाम थानों से बलात्कार के मामलों पर कई बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। जिसमें प्रदेश के करीब 40 थानाें ने बलात्कार की घटनाओं में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से महिलाओं को ही जिम्मेदार ठहराया था। इसमें महिलाओं के कपड़ों, मोबाइल फोन, इंटरनेट, टीवी और सिनेमा के साथ ही कुछ ने तो यहां तक लिखा था कि महिलाओं के अर्धनग्न कपड़ों से नजर आती अश्लीलता इसके लिए जिम्मेदार है।
डीजीपी बहुत नाराज हैं
‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से प्रकाशित इस खबर को लेकर बृहस्पतिवार सुबह ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने डीजीपी से बात की। इस पर उनके पीआरओ डीआईजी राहुल श्रीवास्तव ने लोकेश खुराना से फोन पर बात करते हुए आरटीआई में आये तमाम जवाबों की प्रति मांगी। राहुल श्रीवास्तव ने कहा कि डीजीपी पूरे प्रकरण पर बहुत नाराज हैं और जिन थानेदारों ने यह जवाब दिए हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बलात्कारी से होते हैं अवैध संबंध
पुलिस ने आरटीआई में कितने गैर जिम्मेदाराना बयान दिये हैं, यह जनपद फतेहपुर के थाना हथगांव पुलिस की सोच से पता चलता है। हथगांव थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष का कहना है कि अक्सर बलात्कार पीड़ित किशोरी या युवती के बलात्कार करने वाले से पहले से अवैध संबंध होते हैं। यदि इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति ने देख लिया तो वह बलात्कार की घटना करार करते हुए अभियोग पंजीकृत करा देती है।