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तीन मौतों की वजहों पर जाने के बजाय केस रफा-दफा करने की कोशिश में पुलिस

Tue, 07 Mar 2017 12:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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शास्त्रीनगर के व्यापारी योगेश और उसकी पत्नी व बेटी की मौत की जांच में पुलिस बड़ी जल्दबाजी में नजर आ रही है। पुलिस की आत्महत्या की थ्योरी भले ही सही हो, लेकिन इसकी वजहों को कैसे नजरंदाज किया जा सकता है। इसकी जांच के बजाय पुलिस केस ही रफा-दफा करने में जुटी है। यही नहीं, पुलिस को स्लाइड रिपोर्ट का भी इंतजार नहीं है, जिसमें मां-बेटी से कुछ गलत होने की आशंका जताई गई है। संभव है इस रिपोर्ट से ही खुलासा हो जाए कि तीनों मौतों की क्या वजह रही। दरअसल, प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ गलत होने की आशंका पर ही स्लाइड रिपोर्ट बनाई गई थी।
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शास्त्रीनगर सेक्टर-6 एमपीजीएस के पास स्थित बिल्डिंग के फ्लैट में बुधवार की रात रूपम एम्पोरियम के मालिक योगेश वर्मा, उसकी पत्नी बरखा और बेटी सनाया की मौत का मामला अब भी रहस्य के घेरे में है। पुलिस का दावा है कि योगेश ने पहले अपनी पत्नी और बेटी को जहरीला पदार्थ देकर मारा और फिर खुद फांसी लगा ली। लेकिन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मामला बुरी तरह से उलझ गया। पोस्टमार्टम हाउस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक रिपोर्ट में मां-बेटी के साथ कुछ गलत होने के अंदेशे पर ही डॉक्टरों ने स्लाइड रिपोर्ट बनाई। आमतौर पर आत्महत्या से जुड़े मामलों में स्लाइड रिपोर्ट कभी नहीं बनाई जाती। सूत्रों का दावा है कि आगरा लैब से आने वाली एफएसएल रिपोर्ट चौंकाने वाली हो सकती है।

आखिर वजहों से क्यों किनारा
पुलिस इस बात को अलग-अलग तरीके से भले ही समझा रही हो, लेकिन उसे पता है कि सच क्या है। इससे यही लग रहा है कि विवेचना की लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए पूरी घटना की वजहों तक जाने की कोशिश नहीं नजर आ रही है। इतनी बड़ी घटना के बाद एक भी पुलिस अफसर मौका मुआयना करने नहीं पहुंचा। इसे लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
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क्राइमसीन में भी कर दी खानापूर्ति
तीनों मौतों का मामला शहर में चौतरफा गूंजने लगा था। मामले को शांत करने के लिए रविवार को पुलिस ने दोबारा फ्लैट पर पहुंचकर क्राइमसीन का रिहर्सल कर खानापूर्ति कर दी। लोगों ने जो बताया, पुलिस वही कहानी रट कर वहां से लौट आई। इस घटना को दोबारा आत्महत्या तो बता दिया, लेकिन इसकी तह तक जाने के बजाय पूरे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश में ही जुटी नजर आई। फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट से भी अभी तक रिपोर्ट नहीं ली।  उधर, योगेश के पिता शांति स्वरूप का कहना है कि मामला आत्महत्या का है, लेकिन इसकी वजह जानने के लिए सही जांच होनी ही चाहिए।

नौचंदी पुलिस कर रही खेल
नौचंदी थाना पुलिस इस मामले को शुरुआत से ही दबाने में जुटी है। पुलिस ने योगेश और बरखा के मोबाइल की सीडीआर की भी जांच नहीं की। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मां-बेटी से कुछ गलत होने के अंदेशे को भी पुलिस अफसरों ने नजरंदाज किया। छोटे-छोटे मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों की राय लेने वाली पुलिस ने इस प्रकरण में उन्हें ही किनारे कर दिया है।

सबको पता था, कैसे खुलेगा दरवाजा
रविवार को दोबारा जांच करने पहुंची पुलिस को कुछ लोगों ने बताया था कि योगेश के फ्लैट का दरवाजा खिड़की का शीशा तोड़कर खोला गया। जबकि, एक मोबाइल फ्लैट के बाहर सीढ़ियों पर मिला था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सभी को यह पता था कि फ्लैट का दरवाजा कैसे खोला जा सकता है, तो पुलिस ने इसकी जांच में क्यों नहीं दिलचस्पी दिखाई। वहीं, फ्लैट के बाहर मिला मोबाइल किसका था, पुलिस ने इसकी जांच करना भी मुनासिब नहीं समझा।
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