हस्तिनापुर सेंक्चुरी में रविवार रात शिकारियों ने एक बारहसिंगा का शिकार करके उसका सिर धड़ से अलग करते हुए खाल उतार ली। इस दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे तो शिकारी मृत बारहसिंगा को छोड़कर भाग निकले।
हस्तिनापुर गंगा तट और यहां का वन क्षेत्र सरकार द्वारा संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया हुआ है। जहां पर जलीय जीवाें के साथ ही पशु पक्षियों का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके वन विभाग और पुलिस की लापरवाही के कारण यहां आये दिन शिकार होते रहते हैं। शिकारी यहां पर न केवल प्रवासी पक्षियों का शिकार करते हैं, बल्कि नील गाय, हिरन, बारहसिंगा, खरगोश आदि का भी शिकार करते हैं। सूत्रों की मानें तो इस शिकार के पीछे वन विभाग और पुलिस की साठगांठ के बीच कुछ प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। जो यह शिकार सिर्फ खाने के लिए ही नहीं बल्कि जंगली जानवरों की खाल और सींग आदि को बेचने के लिए भी करते हैं। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हिरन और बारहसिंगा के सींगों व खाल की मोटी कीमत मिलती है।
ऐसे हुआ शिकार का खुलासा
सोमवार सुबह कुछ युवक घूमने के लिए हस्तिनापुर वन क्षेत्र के कर्ण सेक्टर की तरफ गये थे। जब ये युवक वहां पहुंचे तो देखा कि दो लोग एक बारहसिंगा की खाल उतारने के बाद उसका मांस अलग कर रहे हैं। जबकि पास में ही बारहसिंगा का सिर पड़ा था। इन युवकों को देख शिकारी मौके पर सारा सामान छोड़कर भाग निकले।
कर्ण सेक्टर में है घना जंगल
कर्ण सेक्टर हस्तिनापुर से करीब 7-8 किमी दूर घने जंगल में है। जहां पर जंगली जानवरों के रहने के लिए बेहतर माहौल है। आसपास के ग्रामीणों की मानें तो यहां अक्सर शिकारियों की आवाजाही नजर आती है। रात में गोलियों की आवाज से जाग होने के डर से ये शिकारी खटके की मदद से शिकार करते हैं। जंगल में कई जगह खटके लगा देते हैं, जिसमें जंगली जानवर फंस जाता है। इसके बाद ये उसे मौके पर ही मारकर खाल, सींग और मांस अलग कर बोरो में भरकर ले जाते हैं।
स्थानीय अधिकारी अनजान
सोमवार को शिकार की घटना पर हस्तिनापुर के वन रेंजर अशोक कुमार ने पूरी तरह अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं है।