रिंकू की हत्या के बावजूद पुलिस गंभीर नहीं हुई। दोनों परिवार एक ही गांव के हैं। दोनों परिवार के लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। इसके बावजूद मेडिकल पुलिस हालात नहीं समझ सकी। आरोपी युवती और उसके मामा को थाने में बैठाकर मतगणना की ड्यूटी में पुलिस चली गई। जिसका नतीजा हुआ कि एक पक्ष के लोगों ने थाने पर बवाल काटा। लोग युवती को थाने में मारना चाहते थे। पुलिस की यह लापरवाही बड़ी घटना करा सकती थी।
तीन सिपाहियों ने संभाली भीड़
मेडिकल थाने में सुबह मुंशी सुजीत सिंह, प्रकाशवीर और रनधीर त्यागी ड्यूटी पर थे। लोगों की भीड़ हवालात तक पहुंची। एसओ का ऑफिस लोगों ने तहसनहस कर डाला। लोग थाने के कार्यालय में घुसे तो तीनों सिपाही वहां से भाग गए। हालात देखते सिपाहियों ने अंदर से कुंडी लगाकर कार्यालय में सरकारी दस्तावेज बचा लिए। करीब एक घंटे तक तीनों सिपाहियों ने ही भीड़ को संभाला।
‘जिसे नाजों से पाला, उसी ने लगवा दी हथकड़ी’
मेरठ। रिंकू हत्याकांड में पुलिस ने उसकी प्रेमिका समेत तीन लोगों को जेल भेज दिया। वहीं युवती के रिश्ते का मामा जेल जाते वक्त कह रहा था कि जिसे नाजों से पाला उसकी ने आज हथकड़ी लगवा दी। दो दशक पहले आईआईटी रुड़की से पढ़ाई करने वाले मामा को एक ही पछतावा था, राशि को पालना।
रिंकू की हत्या में उसकी दोस्त राशि त्यागी ही अकेली चश्मदीद गवाह है। घटना के बाद घर पहुंची राशि त्यागी ने अपने सगे मामा को फोन किया तो उन्होंने मेरठ से बाहर होने की जानकारी दी। जिसके बाद अपने रिश्ते के मामा कुलदीप त्यागी को फोन किया। कुलदीप भी उसके साथ घटना स्थल तक पहुंचे। सड़क पर खून पड़ा था बाइक टूटी हुई थी जिससे देखकर कुलदीप ने फोन कर पुलिस को बुला लिया।
यहीं से कुलदीप पर पुलिस का शिकंजा कसना शुरू हो गया और राशि के साथ पुलिस उन्हें भी मेडिकल थाने ले आई। थाने में पहुंचते ही कुलदीप ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि ऐसा भी दिन देखने को मिलेगा। आंखों में आंसू छलके तो बस यही कहा कि, राशि तुझे तो नाजों से पाला था।
पढ़ाने के लिए मैं तेरे माता पिता से भी लड़ा, यह सोचकर कि मैं तेरे सगे मामा के यहां रहकर दो दशक पहले पढ़ा था। मुझे नहीं मालूम था कि राशि तू मेरी कुंडली में जेल जाना लिखवाकर आई है।
कुलदीप ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि वह आईआईटी रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग में एमटेक हैं। वह आईजी नवनीत सिकेरा के आईआईटी में बैचमेट रहे हैं। इस समय वह बोंबे की एक कंपनी में निदेशक हैं। कंपनी के काम से शनिवार को मुजफ्फरनगर में एक जीएम से मिलने आए थे।
बेटे की लाश देखते ही जमीन पर बैठ गया पिता
मेरठ। रात 12:15 बजे फोन की घंटी बजी, लेकिन रिसीव नहीं हुई। दूसरी घंटी पर फोन रिसीव हुआ तो आवाज आई कि रिंकू के पिता बोल रहे हो। हां बोले हूं, दूसरी आवाज आई कि मेडिकल आ जाओ, रिंकू की हालत खराब है। इतना सुनते ही जयपाल की नींद टूट गई। रिंकू का नाम सुनते ही हड़बड़ाते हुए मां अनीता की भी आंख खुल गई। अनीता बार-बार पूछती कि रिंकू को क्या हो गया।
जयपाल ने पहले रिंकू के मोबाइल पर कॉल की, जिस पर घंटी नहीं गई। उसके बाद उन्होंने दूसरी कॉल अपने भांजे तेजपाल को की। तेजपाल फोन रिसीव करते बोला कि मामा रिंकू की हत्या हो गई है। इतना सुनते ही जयपाल के होश उड़ और फोन पर ही रोने लगा।
पति की आंखों में आंसू देखते अनीता समझ गई कि रिंकू के साथ कुछ अनहोनी हो गई। दोनों को विश्वास नहीं हुआ कि रिंकू उनको छोड़कर दुनिया से चला जाएगा।
जयपाल ने अपने भतीजे को बुलाया और चार पांच लोगों के साथ मेडिकल थाने पहुंचे। जहां पर शेरगढ़ी से उनके रिश्तेदार पहले से मौजूद थे। जयपाल बोला कि रिंकू तूने तो हमें जिंदगी भर के लिए बैठा दिया।
दुनिया में तेरे अलावा हमारा कौन था। एक बार भी अपने माता-पिता के बारे में सोचा नहीं कि हम किसके सहारे जीवन काटेंगे। लोगों ने उनको संभाला और कुर्सी पर बैठा दिया। कुर्सी पर बैठे ही जयपाल गिर गए।
बेटे की लाश तो दिखा दो
इकलौता बेटा शहर में पढ़ाया और उसकी जॉब भी लग गई। इंटर और बीटेक रिंकू ने अपनी बुआ के घर पर रहकर की। जॉब लगने के बाद भी वह बुआ के घर पर ही रहा। रिंकू अपने पैरों पर खड़ा हो गया, यह सोचकर जयपाल और अनीता बहुत खुश थे। गांव में रहकर जयपाल और अनीता अपने इकलौते बेटे की शादी के सपने बुनते रहे थे।
शादी धूमधाम से करनी है, बहू को रिंकू के पास नहीं अपने पास रखेंगे। लेकिन कभी सोचा नहीं था कि ऐसा मनहूस दिन भी देखने को मिलेगा।
राशि के बारे में कभी नहीं बताया
राशि त्यागी से उसकी दोस्ती है या वह दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं। इसकी जानकारी जयपाल और अनीता को नहीं थी। जयपाल ने बताया शादी की बात अक्सर रिंकू के सामने करते थे, लेकिन कभी भी राशि का नाम रिंकू ने नहीं लिया। राशि का परिवार उनके मकान से कुछ दूरी पर है। उनके परिवार में उनका कोई आना जाना भी नहीं है।
चिराग बुझ गया, तमाशा मत बनाओ
मेडिकल थाने में लोगों ने राशि त्यागी पर जानलेवा हमला कर दिया। इसकी जानकारी लगते ही रिंकू का पिता जयपाल सिंह पोस्टमार्टम स्थल से थाने पहुंचा। तब तक लोगों की भीड़ ने मेडिकल कॉलेज के सामने जाम लगा दिया था। जयपाल सिंह ने कहा कि मेरा इकलौता चिराग बुझ गया है, अब तमाशा मत बनाओ। पुलिस कार्रवाई करने में लगी है। उसके बाद ही लोग शांत हुए।
बड़ी बहन की हो चुकी है मौत
रिंकू की एक बड़ी बहन पायल की सात साल पहले बीमारी के चलते मौत हो गई थी। बेटी की मौत के गम से परिवार अभी थोड़ा उभरा था कि रिंकू की मौत से दोबारा से उसको तोड़ डाला। जिसने भी परिवार की दास्तां सुनी, उसकी आंखें नम हो गई।
पोस्टमार्टम पर ग्रामीणों का तांता
रिंकू की हत्या की जानकारी लगते ही सरधना से सैकड़ों की संख्या में लोग पोस्टमार्टम स्थल पर पहुंचे। लोगों का हाल बेहाल था। लोगों की भीड़ थी, जिसको देखते पुलिस और आरएएफ लगा दी। मेडिकल से पोस्टमार्टम स्थल तक पुलिस और आरएएफ का पहरा था।
हत्या का असली गुनहगार कौन
मेरठ। रिंकू की हत्या में असली गुनहगार कौन है और उनका मकसद क्या है। इसका खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर रिंकू की दोस्त राशि, ब्रजमोहन त्यागी, कुलदीप त्यागी को जेल भेजा है। लेकिन उनके खिलाफ पुलिस अभी पुख्ता सुबूत नहीं जुटा सकी। अधिकारी हत्या के पीछे कोई गहरा राज होना बता रहे है।
जयपाल सिंह ने बताया कि उसके इकलौते बेटे रिंकू की हत्या प्लानिंग के साथ राशि त्यागी और उसके परिजनों ने की है। रिपोर्ट के मुताबिक रिंकू और राशि तेजगढ़ी चौराहे पर बात कर रहे थे। जहां पर राशि का भाई निशांत त्यागी समेत तीन अज्ञात युवक भी मौजूद थे। रिंकू की जाति को लेकर यह लोग चर्चा कर रहे थे।
यह सभी लोग रिंकू को लेकर मेडिकल कॉलेज की तरफ गए और उसकी हत्या कर दी। हत्या करने के पीछे आरोपियों का क्या मकसद था, इसका पता लगाने में पुलिस जुटी है।
वहीं, दूसरी ओर राशि ने बताया कि रिंकू को उसने बुलाया और फिर दोनों बाइक पर मेडिकल की तरफ गए। अंधेरा और सुनसान जगह पर दोनों बातचीत कर रहे थे, जहां पर कुछ युवक आए और उन्होंने छेड़छाड़ शुरू कर दी।
विरोध करने पर युवकों ने रिंकू की पीट पीटकर हत्या कर दी। बड़ा सवाल है कि दोनों सुनसान जंगल क्यों गए। हमला हुआ तो राशि ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी। लहूलुहान हालत में उसको छोड़कर अपने घर क्यों गई। इस बिंदू पर पुलिस की जांच टिकी है।