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अब खाकी नहीं पहन सकेंगे नेताओं के गनर

Tue, 08 Sep 2015 02:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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महज रुतबा दिखाने के लिए गनर लेने वालों के लिए यह झटके वाली खबर है। पार्टी नेताओं और अन्य पात्र लोगों को रौब गालिब करने के लिए गनर तो मिलेगा, लेकिन वह खाकी में नहीं होगा। शासनादेश को देखते हुए एसएसपी पूरे मामले में सख्त हो गए हैं।
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सोमवार को उन्होंने सीओ एलआईयू और आरआई से जवाब तलब कर लिया। कहा कि सिर्फ सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक और एमएलसी को छोड़कर किसी का भी गनर वर्दी में मिला तो उसे सस्पेंड कर दिया जाएगा।

दरअसल, आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शासन क ो इस संबंध में नीति बनाने के निर्देश दिए थे। 9 मई 2014 को शासन ने निर्देश दिए कि पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, महापौर, कुलपति, प्रदेश स्तर पर मान्यता प्राप्त पार्टी के अध्यक्ष एवं अन्य किसी व्यक्ति (जिसकी जान को खतरा हो) को सादे कपड़ों में सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराया जाएगा। शासनादेश को देखते हुए एसएसपी डीसी दूबे ने सोमवार को सीओ एलआईयू और पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक (आरआई) से गनरों के  बारे में जानकारी मांगी।
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एसएसपी को पता चला कि अधिकांश सियासी लोग व अन्य व्यक्ति जिसे जीवन का भय बना हुआ है, वह वर्दी में गनर लेकर चलते हैं, जो नियम विरुद्ध है। एक अधिकारी के अनुसार करीब 40 गनर इस समय सुरक्षा में लगे हैं, जो सभी वर्दी में चलते हैं।

गनर तो सिर्फ सुरक्षा के लिए
एसएसपी का कहना है कि गनर किसी नेता का अपना नहीं होता। सिर्फ सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए गनर उपलब्ध कराया जाता है। इस संबंध में जब पुलिस लाइन से गनर को भेजा जाता है तो संबंधित अधिकारी गनर को समझाते हैं। जिसमें वर्दी न पहनने की हिदायत भी दी जाती है। लेकिन यह सिपाही या सुरक्षाकर्मी की खुद की जिम्मेदारी है। सरकारी सुरक्षाकर्मी को आदेश का पालन करना होगा।

वर्दी ही गायब तो रुतबा कैसा
किसी भी राजनैतिक पार्टी के नेता या अन्य व्यक्ति को सुरक्षा की दृष्टि से गनर दिया जाता है। लेकिन रुतबा दिखाने के लिए वे वर्दीधारी गनर को साथ ले जाना पसंद करते हैं। वैसे भी सादे कपड़ों में गनर हो तो किसको क्या पता चलेगा कि गनर सरकारी है या प्राइवेट। ऐसे में उनकी सत्ता की हनक या रुतबा भी कम हो जाता है। एसएसपी के निर्देशों से कई नेताओं की धमक ही खत्म हो जाएगी।
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