खैरनगर निवासी कपड़ा व्यापारी प्रदीप जैन
कूल्हे में दर्द की शिकायत पर परिजनों ने बृहस्पतिवार को चौरसिया नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। उनका डॉ. एसएस ढिल्लन के निर्देशन में इलाज चल रहा था। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने उनकी कई जांचे कराई। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे वह उन्हें आपरेशन के लिए ओटी में ले गए। कुछ ही देर बाद डॉ. ढिल्लन ने ओटी से बाहर आकर बताया कि प्रदीप जैन की मौत हो गई है।
नर्सिंग होम में ही एक और मरीज
गुदड़ी बाजार निवासी ताहिर (55) की भी मौत हो गई। वह पांच दिनों से पेट में इंफेक्शन के कारण भर्ती थे। एक साथ दो मौतों होने से नर्सिंग होम में हंगामा खड़ा हो गया। मृतकों के परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
परिजनों ने डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ की लापरवाही से ही उनके मरीज की मौत हुई है।
अस्पताल में भीड़ जमा हो गई। गुस्साए लोगों ने अस्पताल की ओटी में जमकर तोड़फोड़ की। बवाल की सूचना पर लालकुर्ती और सिविल लाइन पुलिस के अलावा क्यूआरटी मौके पर पहुंची। एएसपी सिद्धार्थ ने मरीज के परिजनों को समझाकर शांत किया।
परिजनों ने यह लगाए आरोप
रिश्तेदार विकास जैन का आरोप था कि प्रदीप को जिस वक्त ओटी में ले जाया गया, वह बिल्कुल ठीक थे। ओटी में आपरेशन के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से उनकी हालत बिगड़ी तो उन्हें बेहोश करने को हैवी डोज दे दी गई। इसी वजह से उनकी मौत हुई है। यह पूरी तरह डॉक्टरों की लापरवाही है। वहीं, ताहिर के पुत्र गुड्डू ने आरोप लगाया कि पांच दिनों से डॉक्टर विजिट करते चले आ रहे थे। कई टेस्ट कराए लेकिन बीमारी की सही जानकारी नहीं दी गई। अस्पताल के वार्ड ब्वॉय ही आईसीयू के मरीजों का इलाज कर रहे थे। उनके पिता की ढंग से देखभाल नहीं हो रही थी। इलाज में लापरवाही की वजह से ही उनकी मौत हुई है।