बृहस्पतिवार शाम को मस्जिद के बाहर युवक की हत्या से शहर में सनसनी मच गई। जब तक पुलिस अफसर कुछ समझ पाते उससे पहले गुस्साई भीड़ ने खोखा और दो बाइकों को आग के हवाले कर दिया। एक या दो मिनट यदि एसपी सिटी आलोक प्रियदर्शी फोर्स के साथ न पहुंचते तो भीड़ आरोपी के घर में भी आगजनी कर सकती थी।
हापुड़ रोड से 50 कदम की दूरी पर पूर्वा शेखला और सुभाष नगर की गली आमने सामने हैं। जहां रास्ते के दोनों अलग अलग समुदाय के लोग रहते हैं। मुजफ्फरनगर में दंगे के दौरान दूसरे समुदाय के लोगों ने सुभाष नगर से अपहरण के बाद करन कौशिश की हत्या कर दी थी। जिसके बाद एक माह तक आसपास के क्षेत्र में पीएसी तैनात रही थी। कई बार आमने सामने विवाद हुआ तो पुलिस की पिकेट लगती थी। शाम के 6.30 जैसे ही यूनुस की हत्या हुई तो शहर में सांप्रदायिक तनाव की अफवाह फैल गई। एसपी सिटी आलोक प्रियदर्शी, एएसपी कैंट सिद्घार्थ, सीओ कोतवाली रणविजय और पांच थानों के इंस्पेक्टर पीएसी के साथ पहुंच गये। किसी तरह फायर ब्रिगेड की छोटी गाड़ी पहुंचने पर आग बुझाई गई। भीड़ ने नारेबाजी की तो पुलिस के पसीने छूट गए। जिसके बाद पुलिस ने सुभाषनगर की तरफ आने वाले रास्तों पर वाहनों को रोक दिया। सुरक्षा के लिए चारों तरफ पीएसी तैनात कर दी गई थी।
ट्रांसफार्मर फटता तो मच सकता था हाहाकार
जिस स्थान पर खोखा और बाइक ों में आग लगाई है वहीं चौराहे पर ट्रांसफार्म रखा हुआ है। ट्रांसफार्म के पास आग लगती देखकर पुलिस के भी पसीने छूट गये। यदि आग समय से न बुझाई जाती तो ट्रांसफार्मर आग पकड़ सकता था जिसके बाद बड़ा हादसा हो सकता था। बाद में पुलिस ने जली हुई बाइकों को थाने भेज दिया।
युवा सेवा समिति का पदाधिकारी है आरोपी
पुलिस ने बताया कि यूनुस का हत्यारोपी शमशाद युवा सेवा समिति में पदाधिकारी बताया गया है। जो शहर में अलग अलग स्थानों पर धरना प्रदर्शन में भी शािमल रहता था। हालांकि युवा सेवा समिति के अध्यक्ष बदर अली ने कहा वह किसी भी शमशाद को नहीं जानते।