पुलिस व्यवस्था पर सवाल
इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, केवल इसीलिए ताकि कोई भी मेरे जैसा गलत कदम न उठाए। पुलिस व्यवस्था में सुधार आ जाए। पुलिस वाले घुट-घुटकर मर रहे हैं। जो पुलिसकर्मी पूर्व में मर चुके हैं, उनके परिवार से भी मेरी हमदर्दी है।
सुसाइड नोट भी लिखकर छोड़ा था
ऑडियो में कुलदीप कहता है कि लाल रजिस्टर में मैंने अपनी जीवनी लिखी है। उस रजिस्टर के आखिरी पन्ने पर सुसाइड नोट भी दो दिन पूर्व ही लिखा था। वह रजिस्टर एक सिपाही ने देख भी लिया था। कुलदीप ने बोला कि उसकी अलमारी में एक लाल रजिस्टर रखा है। जिसमें उसकी जीवनी लिखी है कि उसने कितना संघर्ष किया है।
जांच कर रहे हैं
उपनिरीक्षक कुलदीप सिंह की मौत के मामले में एसपी देहात जांच कर रहे हैं। अभी तक की जांच में ऑडियो रिकॉर्डिंग बयान के अनुसार मानसिक उत्पीड़न का आरोप सामने आया है। अन्य पुलिसकर्मी भी ड्यूटी कर रहे हैं। काम काफी होता है, लेकिन मानसिक उत्पीड़न के बारे में किसी पुलिसकर्मी ने शिकायत नहीं की। मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। - दिनेश कुमार, एसएसपी
...छिन गई जाने क्यों मेरी आजादी
दरोगा कुलदीप सिंह ने जो ऑडियो मैसेज परिजनों को भेजा। वह कुछ इस तरह है। आस लगाई जिनसे, उन्हीं ने रुसवा किया। प्यार के नाम पर महफिल में रुसवा किया। चांद सितारों की ख्वाहिश थी, लेकिन नसीब में कांटें ही थे। मेहनतकश बहुत थे, लेकिन यारों जिंदगी में फांकी ही थे। मैं जीतकर भी हारा और सारा जहां जीत गया। सुर्खियां बटोरती आज मेरी बर्बादी, छिन गई जाने क्यों मेरी आजादी। तरकस के तीर बुझ गए, शैय्या में मेरी कुंज गए। हौसले दरख्तों से झांकते गए, धूल जिंदगी की फांकते गए। झांक गए हम दीवारों से, हार गए इन सिपेहसलारों से। एसएचओ शब्दकोश का अंत यही है, रात में तारे नहीं हैं। बुझा-बुझा सा जीवन है, बर्बादी की झांकी अब तो यौवन है। अगर रुठे तो कैसे मनाऊं, बहुत है उनकी आबादी। सुर्खियां बटोरती मेरी बर्बादी, छिन गई जाने क्यों मेरी आजादी।
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