वहीं जेल अधीक्षक सुरेश कुमार ने बताया कि बंदी रवि को पेट दर्द की शिकायत थी। जेल अस्पताल में उपचार कराया गया। लेकिन आराम न मिलने के कारण रात में ही उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। मेरठ अस्पताल में इलाज कराने के बाद उसे वापस जेल ले आए। अब वह जेल में है। कांच खाने के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
कांच खाने से बंदी की हो चुकी है मौत
जिला कारागार में 24 जनवरी को बंदी शाकिर पुत्र असगर निवासी जिवाना गुलियान ने भी कांच खा लिया था। 26 जनवरी की रात उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया था। बंदी पांच माह से चोरी के मामले में जेल में बंद था। मृतक के परिजन डीएम से बंदी की मौत की मजिस्ट्रेटी जांच कराने की मांग कर चुके हैं।
जेल में कांच क्यों खा रहे बंदी?
जेल में बंदियों को कांच कहां से मिल रहा है और किस मजबूरी में बंदी कांच खाने को मजबूर हैं। यह बड़ा सवाल बन गया है। जेल प्रशासन इसके प्रति गंभीर नहीं है। पांच दिन पहले हुई बंदी शाकिर की मौत का कारण भी पेट दर्द बताकर जेल प्रशासन ने पल्ला झाड़ लिया था।
हत्या व लूट के कई मुकदमे है दर्ज
बिजरौल गांव निवासी रवि पर हत्या, लूट के कई मुकदमे दर्ज हैं। एक लाख के इनामी रहे प्रमोद गांगनौली की हत्या के बाद गिरोह में सक्रिय भूमिका रही। जेल में नौ जुलाई 2018 को पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या से कुछ दिन पहले ही रवि को मेरठ जेल शिफ्ट कर दिया गया था। जेल में एक लाख के इनामी रहे अजीत उर्फ हप्पू गिरोह के सदस्यों से उसका कई बार झगड़ा भी हो चुका है। वह जनवरी माह में ही मेरठ जेल से जमानत पर छूटकर बाहर आया था।
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