डूंगा फार्म हाउस से अगवा मेरठ के कारोबारी मनोज गुप्ता शनिवार शाम गढ़ मुक्तेश्वर से सकुशल बरामद हो गए। चर्चाएं हैं कि मोटी रकम अदा करने के बाद उनकी रिहाई हुई है। अपहरणकर्ताओं ने एक करोड़ की डिमांड की थी। वहीं, पुलिस का दावा है कि एक महिला जनप्रतिनिधि के पति ने गुप्ता को अगवा कराया था। दबाव के चलते अपहरणकर्ताओं ने उन्हें छोड़ा है। मेरठ और मुजफ्फरनगर में हुई छापेमारी में मोबाइल कंपनी के प्रतिनिधि समेत तीन लोग पकड़े गए हैं। अपहरण की साजिश में मनोज की महिला मित्र भी शामिल बताई जा रही है।
दून के प्रेमनगर के डूंगा स्थित फार्म हाउस से मोहल्ला स्वामीपाड़ा, कोतवाली मेरठ निवासी कारोबारी मनोज गुप्ता अपनी महिला मित्र के साथ 18 फरवरी की रात गायब हो गए थे। पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया कि अपहरण की साजिश मेरठ के एक शातिर अपराधी ने रची थी, जो काफी समय से सियासी लबादा ओढ़ने की तैयारी में है। अपहरणकर्ता मेरठ से गुप्ता का पीछा करते हुए देहरादून फार्म हाउस पहुंचे थे।
शुक्रवार से एसपी सिटी देहरादून अजय सिंह की अगुवाई में वेस्ट यूपी में ऑपरेशन चल रहा था। मोबाइल सिम उपलब्ध कराने के आरोप में मुजफ्फरनगर से एक युवक समेत तीन को हिरासत में लिया गया है। पुलिस टीम देर रात कारोबारी को लेकर देहरादून पहुंच गई। मेडिकल के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
मैं सही हूं, जल्द वापस आऊंगा
अगवा कारोबारी ने रात में ही फोन पर परिजनों से बात कर सब कुछ सही होने की बात कही है। अपहरणकर्ताओं द्वारा गुप्ता की बात कराने के पीछे पुलिस और परिजनों के बीच के समन्वय तोड़ने की नजर से देखा जा रहा है। दून पुलिस का कहना है कि गुप्ता ने परिजनों से कहा है कि मैं सही हूं, जल्द घर आ जाऊंगा। किसी तरह की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है।
अदलते-बदलते रहे सिम के मालिक
कारोबारी की रिहाई के लिए जिस फोन से एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी, उस सिम के मालिक लगातार बदलते रहे। यह सिम एक मोबाइल कंपनी के प्रतिनिधि ने जारी किया था। बाद में यह सिम दूसरे को दे दिया गया। इस सिम से फिरौती मांगी गई तो पुलिस आईडी के आधार पर उसके पहले मालिक तक पहुंच गई, जहां से पता चला कि वो सिम तो प्रतिनिधि को वापस कर दिया। रात में पुलिस ने मुजफ्फरनगर निवासी कंपनी के प्रतिनिधि को उठाया तो पूरी कहानी से पर्दा उठता चला गया।
महिला मित्र नहीं आई हाथ
कारोबारी के अपहरण में अहम रोल निभाने वाली महिला मित्र को पकड़ने में पुलिस नाकामयाब रही। पुलिस अभी तक उसका सही ठिकाना भी खोजने में नाकाम रही है।