इसे घबराहट कहें या संवेदनहीनता? कलक्ट्रेट पर तीन युवकों द्वारा आत्मदाह के प्रयास की सूचना पर दौडे आए एडीएम सिटी एसके दूबे युवकों को आग से घिरा देख एनआईसी की तरफ दौड़ गए। जब युवकों की आग बुझ गयी और पुलिस आयी तो वे वापस लौटे और मामले की जानकारी ली।
बृहस्पतिवार शाम करीब 4:30 बजे एडीएम सिटी अपने कार्यालय में बैठे थे। अचानक तीन युवकों द्वारा डीएम कार्यालय के सामने खुद को आग लगाने की सूचना और शोर सुनकर वे डीएम ऑफिस लगभग दौड़ते हुए पहुंचे। उस समय उन्होंने तीनों युवकों को आग से घिरा देखा तो वह उनके पास पहुंचने के बजाए एनआईसी भवन की तरफ भाग लिए।
इसके बाद उन्होंने डीएम और एसपी सिटी को घटनाक्रम की जानकारी दी। इस बीच डीएम कार्यालय की सुरक्षा में तैनात होमगार्ड और अन्य कर्मचारियों ने आग बुझा दी और पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया। जब माहौल कुछ सामान्य हुआ तो एडीएम सिटी सामने आए। इसे लेकर कलक्ट्रेट में चर्चा होती रही।
होमगार्डों ने दिखाई बहादुरी
कलक्ट्रेट में जिस समय तीनों युवकों ने आत्मदाह का प्रयास किया। उस समय अधिकांश कर्मचारी जा चुके थे। डीएम सहित अन्य अधिकारी भी कार्यालयों में नहीं थे। लेकिन डीएम कार्यालय के पास चौकी में एक दरोगा, दो कांस्टेबल और तीन होमगार्ड बैठे थे। युवकों ने जैसे ही आग लगायी तो दरोगा और कांस्टेबल मौके से भाग गये। लेकिन तीनों होमगार्ड त्रिभुवन, कुलदीप और रईस ने शोर मचाते हुए आग बुझाने का प्रयास किया। इस बीच कर्मचारी मुकेश कुमार, गुलफाम अर्जीनवीस पिंटू भी पहुंच गए और बाल्टियों में पानी भरकर उड़ेला।
जबकि होमगार्ड इससे पहले ही तीनों के जलते कपड़ों को फाड़कर अलग कर चुके थे। इस दौरान त्रिभुवन का हाथ भी झुलस गया। होमगार्डों ने ऐसे समय बहादुरी दिखाकर दरोगा और सिपाहियों को नसीहत दे दी। अगर होमगार्ड भी आगे नहीं आते तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता था।
किस काम के सीसीटीवी कैमरे
कलक्ट्रेट परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जिस जगह यह घटनाक्रम हुआ, वहां भी डीएम कार्यालय की दीवार पर सीसीटीवी कैमरा लगा है। लेकिन कार्यालय सूत्रों के अनुसार यह कैमरा काफी दिनों से बंद पड़ा है। ऐसे में तय है कि यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद नहीं हुई है। यदि यह कैमरा सही हालत में होता तो साक्ष्य के रूप में कारगर हो सकता था।