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एटीएम से 18.66 लाख रुपये चोरी

Sun, 24 Jan 2016 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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एटीएम का 74 लाख रुपये गबन होने का मामला अभी ठंडा हुआ नहीं था कि शनिवार को एक और एटीएम से 18.66 लाख रुपये चोरी होना सामने आया है। चार दिन तक पुलिस और बैंक कर्मचारी मामले को दबाने में लगे थे। मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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आबूलेन स्थित स्टेट बैंक के एटीएम से पैसा चोरी होने की सूचना 19 जनवरी को मिली थी। पुलिस और बैंक कर्मी ने मौके पर जाकर जांच की, लेकिन मामले का दबाया गया। इतना ही नहीं सदर पुलिस ने पैसा चोरी के मामले को अफवाह बताकर अधिकारियों को भी गुमराह किया।

शनिवार सुबह मामले की रिपोर्ट लिखी गई, तब जाकर इसका खुलासा हुआ। बैंक से एटीएम में कैश डालने वाली कंपनी सीएमएस इन्फो के मैनेजर मनोज कुमार ने अपने तीन कर्मचारी ऋषिराज निवासी मलियाना, सुशील निवासी अख्खेपुर और सुरेश निवासी लखनऊ के खिलाफ केस दर्ज कराया।
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सदर पुलिस ने आरोपी तीनों कर्मचारियों की तलाश शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर सदर बाजार गजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि चोरी कंपनी के कर्मचारियों ने की है। पुलिस जांच करने में लगी है।

मोबाइल की टॉर्च दिखाकर सुरेश ने लिया पासवर्ड
मेरठ। पुलिस के मुताबिक 14 और 15 जनवरी को एटीएम में पैसा डाला गया था। एटीएम के सीसीटीवी कमरे और लाइटें 31 दिसंबर से खराब थे। 16 और 17 जनवरी को एटीएम से पैसा न निकलने की शिकायत बच्चा पार्क स्थित सीएसएस इन्फो कंपनी को मिली।

18 जनवरी बगैर परमीशन के कैश कस्टोडियन ऋषिपाल और सुशील वहां पर पहुंचे। तभी वहां सुरेश भी पहुंचा। अंधेरा होने के चलते सुरेश ने अपने मोबाइल की टॉर्च दिखाकर वहां की तमाम बातें और पासवर्ड की वीडियो बना ली। 19 जनवरी को एटीएम मशीन से पैसा चोरी होने की बात सामने आई।

लेकिन पुलिस ने केस दर्ज करने की बजाए मामले को कंपनी पर थोपा दिया था। चार दिन तक मामला कागजों की भरपाई में लगा। मामला एसएसपी तक पहुंचा, तब जाकर शनिवार को तीनों कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ।

तीनों कर्मचारियों की भूमिका?
पुलिस ने बताया कि 18.66 लाख रुपये चोरी के मामले में कस्टोडियन ऋषिराज, सुशील, सुरेश की भूमिका है। सवाल उठता है कि सुरेश को कंपनी ने एक सप्ताह पहले निकाल दिया था तो दोनों कर्मचारियों के साथ वह एटीएम मशीन में क्या करने गया था।

क्योंकि अंधेरे में कर्मचारी एटीएम मशीन को बगैर परमीशन के देखने के लिए क्यों गए। पुलिस ने कंपनी के अन्य कर्मचारी और बैंक कर्मियों पर सवाल उठाए है।

पुलिस नहीं चाहती थी रिपोर्ट दर्ज करना
एटीएम में चोरी की जानकारी 19 जनवरी को हो चुकी थी, लेकिन मामला उजागर न हो, शायद यही वजह थी कि पुलिस ने चार दिन तक रिपोर्ट दर्ज नहीं की।

पुलिस ने कंपनी का मामला बताकर केस करने से साफ इनकार किया था। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है। कंपनी मैनेजर ने बताया कि पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं करना नहीं चाहती थी।
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