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बड़े भूमाफिया योगी के रडार पर, प्रशासन के छूटे पसीने   

Sun, 23 Apr 2017 09:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में भूमाफियाओं पर भी शिकंजा कसना है। ऐसे में शासन ने भूमाफिया टास्क फोर्स गठित कर जमीनों को कब्जा मुक्त कराने और दोषियों पर कार्रवाई की प्रगति मांग ली है। प्रशासन ने भूमाफियाओं को चिह्नित करने की कवायद तो शुरू कर दी। लेकिन इसमें कई बड़े नाम शामिल होने के बाद कार्रवाई की प्रगति को लेकर प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। 
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ये है राजस्व परिषद का आदेश 
राजस्व परिषद के अध्यक्ष प्रवीर कुमार ने 20 अप्रैल को वीडियो कांफ्रेंसिंग कर सभी मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को पांच बिंदुओं पर दिशा निर्देश दिए थे। जिसमें भूमाफिया टास्क फोर्स गठित कर भूमाफियाओं के कब्जे से जमीनों को मुक्त कराने और दोषियों को सजा दिलाने के आदेश भी थे। सभी डीएम से कहा था कि यह मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल है। सरकारी जमीनों पर भूमाफिया किसी तरह से काबिज न रहने पाएं। 

अब देना होगा जवाब
जिले की तीनों तहसीलों, नगर निगम, एमडीए को भी उनकी जमीनों पर यदि कब्जा है, तो उसकी सूची देने के आदेश दिए गए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सभी एसडीएम से अपने क्षेत्र में सरकारी जमीनों का ब्योरा, उसकी वर्तमान स्थिति, कितनी जमीनों पर किसका कब्जा है, कितनी जमीन पिछले दिनों कब्जा मुक्त करायी गई, पूर्व में यदि किसी सरकारी जमीन पर कब्जे का यदि अब हस्तांतरण हो चुका है, तो किस नियम के तहत हुआ, ऐसे तमाम बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। 
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ये है वर्तमान स्थिति 
जिले में ग्राम समाज, जिला पंचायत, बेसिक शिक्षा विभाग, वन विभाग, सिंचाई विभाग, नगर पंचायत, नगर पालिकाओं और निगम सहित राजस्व विभाग की कई सौ हेक्टेयर जमीन का वास्तविक रिकॉर्ड कई साल से गंभीरतापूर्वक तैयार नहीं हुआ है। इनमें से आधी से ज्यादा जमीन इस समय मौके पर गायब हो चुकी है। 

कहीं पक्के निर्माण, खेत कब्जा लिए
शहरी क्षेत्र में सबसे ज्यादा जमीनों पर कब्जे हुए। इनमें बाहरी क्षेत्र की जमीन भूमाफियाओं के निशाने पर रही। लाखों वर्ग मीटर जमीन पर शहर के ही रसूखदार लोगों ने प्रशासन की नाक नीचे लगातार कब्जा किया। इनमें कई बड़े शिक्षण संस्थान ऐसे हैं, जिनका आधा और एक चौथाई हिस्सा सरकारी भूमि पर बना है। कई बड़ी कॉलोनियाें में सरकारी जमीन और नालियां कब्जा ली गई, तो कई पर अस्पताल खुल गए। देहात में तो भूमाफिया पूरी सरकारी जमीन पर कब्जा कर खेती कर रहे हैं, तो कुछ ने इस जमीन का बड़ा हिस्सा ही अपने बराबर के खेत में मिला लिया। 

यहां सबसे ज्यादा कब्जे 
सरधना तहसील क्षेत्र में एनएच-58 किनारे की सरकारी जमीनों के अलावा सदर तहसील में गढ़ रोड़, हापुड़ रोड, दिल्ली रोड आदि पर कब्जा है। मवाना तहसील अंतर्गत खादर क्षेत्र में वन विभाग, ग्राम समाज की भूमि को भूमाफियाओं ने कब्जाया हुआ है। 

अमर उजाला उठा चुका मामले 
ऐसे ही एक मामले में एटूजेड बिल्डर ग्रुप के साथ तहसील प्रशासन की साठगांठ का मामला पिछले दिनों ‘अमर उजाला’ ने उजागर किया था। जिस पर तत्कालीन डीएम बी. चंद्रकला ने एसडीएम सहित बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर कराई थी। लेकिन उसके बावजूद यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया। ऐसा ही एक मामला सरधना तहसील में है, जिसमें एक बिल्डर के खिलाफ जांच को तहसील प्रशासन दबाये बैठा है। जबकि इस बिल्डर ने बाईपास स्थित कॉलोनी में सरकारी जमीन के साथ सरकारी नाली पर भी कब्जा कर लिया है। 
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