मेरठ : जोन में बदमाशों का सफाया
योगी सरकार बनने के बाद मार्च 2017 में एनकाउंटर के साथ पुलिस के हाथ खुले। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़ और बुलंदशहर में 45 बदमाश मुठभेड़ में ढेर हुए। 591 बदमाशों के पैरों में गोली लगी। 1207 से अधिक बदमाशों से सीधे सामना हुआ। पश्चिम यूपी में अधिकांश बदमाश जेल में है। कुख्यात योगेश भदौड़ा, ऊधमसिंह, अजय जडे़जा समेत 125 शातिर अपराधियों ने मुठभेड़ के डर से जमानत तक नहीं कराई। कैराना में कुख्यात मुकीम काला समेत कई बदमाशों के डर से इसी सरकार में पलायन का दौर चला तो कई परिवार लौट भी आए। जिसके बाद शामली और मुजफ्फरनगर में एनकाउंटर का सिलसिला चला। हालांकि फिलहाल कैराना के लोगों में बदमाशों का खौफ नहीं है।
एंटी रोमियो स्क्वायड
मेरठ जोन के रिकॉर्ड के मुताबिक नौ जिलों में 15 हजार युवकों को चेतावनी देकर छोड़ा गया। 20 मार्च 2017 से 10 मार्च 2019 तक 18 सौ आरोपी छेड़छाड़ में जेल भेजे गए। तीन हजार युवकों पर केस दर्ज हुए।
बड़ी घटनाएं
- 24 फरवरी: शास्त्रीनगर में डकैती के दौरान व्यापारी मोहित मदान हत्याकांड अभी अनसुलझा है।
- 11 फरवरी: परतापुर के गेझा गांव में अमित चौधरी हत्याकांड का अभी खुलासा नहीं हुआ।
- 06 मार्च : भूसा मंडी में 200 झुग्गियों को जलाने वाला मास्टर माइंड कौन है, इसका खुलासा नहीं।
- 13 मार्च: जेल चुंगी के पास ट्यूबवेल कॉलोनी के क्वार्टर में जेई सुशील कुमार की हत्या अनसुलझी है।
कोई संतुष्ट तो कोई असंतुष्ट
अपराध, कानून व्यवस्था के नाम पर सरकार खरी नहीं उतरीं। एनकाउंटर सिर्फ दिखावा है। रोजाना हत्या और लूट की वारदात होती हैं।
- मनोज कुमार, जिटौली
बदमाशों में खौफ नहीं है। आम लोगों को बदमाश धमकी देकर जाते है। एनकाउंटर में पैरों में गोली मारना महज दिखावा है।
- सचिन माल्या, पुरानी मोहनपुरी
पुलिस ने अपराधियों पर शिकंजा कसा है। मुठभेड़ में बदमाशों को ढेर करने या पैर में गोली लगने का असर अपराध पर पड़ा है। महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं।
- विरेंद्र जैन उर्फ बिल्लू, ब्रह्मपुरी
हत्या और लूट का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। चेन, पर्स स्नैचिंग में गिरावट पर पुलिस को बधाई
- मनोज शर्मा, सुभाषनगर
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