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मेरठ जोन में दनादन 1207 मुठभेड़, 45 बदमाश ढेर, अब कानून व्यवस्था पर छिड़ेगा संग्राम

Fri, 15 Mar 2019 12:13 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला
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पांच साल पहले 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कानून व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा था। कैराना पलायन का मुद्दा तो दुनियाभर में गूंजा। इसके बाद 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कानून व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाया और सूबे में भाजपा की सरकार बनी। पुलिस ने एनकाउंटर की रणनीति अपनाई, कई बड़े बदमाश मारे गए। 

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वहीं मुठभेड़ में बदमाशों के पैरों में गोली मारने के नए चलन की शुरुआत हुई। इन पांच साल में काफी कुछ बदलाव आया है, लेकिन आपराधिक घटनाएं होती रही। हत्या और लूट की कई बड़ी घटनाएं हुईं, विपक्ष भी भाजपा सरकार को उसी के तरकश के तीर से घेरता रहा। इस चुनाव में भी क्या कानून व्यवस्था एक मुद्दा होगा, इस दौरान कैसी रही कानून व्यवस्था की स्थिति, इसी पर फोकस अमर उजाला की रिपोर्ट...! 

मेरठ में हथियारों की खेप पकड़ी
मेरठ पुलिस ने पिछले एक साल में हथियारों की कई खेप पकड़ीं। देहात के इलाकों में कई तमंचा फैक्टरियों का भंडाफोड़ हुआ तो लिसाड़ी गेट में दिल्ली पुलिस ने छापेमारी कर खुलासा किया कि यहां घरों के तहखानों में मुंगेर की तर्ज पर पिस्टल और तमंचे बनाए जा रहे थे। इसके लिए मुंगेर से कारीगर लाए गए थे। हथियारों का कनेक्शन कई बड़ी घटनाओं से जोड़ा गया। देश की जांच एजेंसियां भी जांच करने मेरठ पहुंची थीं। 
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मेरठ जोन में मुठभेड़
 सन    मुठभेड़      गिरफ्तारी    घायल             मारे गए 
                                           बदमाश           अपराधी

2017    381        844               119            21
2018    685       1265              393            23
2019    141        269                79             1

मेरठ : जोन में बदमाशों का सफाया
योगी सरकार बनने के बाद मार्च 2017 में एनकाउंटर के साथ पुलिस के हाथ खुले। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़ और बुलंदशहर में 45 बदमाश मुठभेड़ में ढेर हुए। 591 बदमाशों के पैरों में गोली लगी। 1207 से अधिक बदमाशों से सीधे सामना हुआ। पश्चिम यूपी में अधिकांश बदमाश जेल में है। कुख्यात योगेश भदौड़ा, ऊधमसिंह, अजय जडे़जा समेत 125 शातिर अपराधियों ने मुठभेड़ के डर से जमानत तक नहीं कराई। कैराना में कुख्यात मुकीम काला समेत कई बदमाशों के डर से इसी सरकार में पलायन का दौर चला तो कई परिवार लौट भी आए। जिसके बाद शामली और मुजफ्फरनगर में एनकाउंटर का सिलसिला चला। हालांकि फिलहाल कैराना के लोगों में बदमाशों का खौफ नहीं है।

एंटी रोमियो स्क्वायड
मेरठ जोन के रिकॉर्ड के मुताबिक नौ जिलों में 15 हजार युवकों को चेतावनी देकर छोड़ा गया। 20 मार्च 2017 से 10 मार्च 2019 तक 18 सौ आरोपी छेड़छाड़ में जेल भेजे गए। तीन हजार युवकों पर केस दर्ज हुए।

बड़ी घटनाएं 
- 24  फरवरी: शास्त्रीनगर में डकैती के दौरान व्यापारी मोहित मदान हत्याकांड अभी अनसुलझा है।
- 11 फरवरी: परतापुर के गेझा गांव में अमित चौधरी हत्याकांड का अभी खुलासा नहीं हुआ।
- 06 मार्च : भूसा मंडी में 200 झुग्गियों को जलाने वाला मास्टर माइंड कौन है, इसका खुलासा नहीं। 
- 13 मार्च: जेल चुंगी के पास ट्यूबवेल कॉलोनी के क्वार्टर में जेई सुशील कुमार की हत्या अनसुलझी है।
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कोई संतुष्ट तो कोई असंतुष्ट 
अपराध, कानून व्यवस्था के नाम पर सरकार खरी नहीं उतरीं। एनकाउंटर सिर्फ दिखावा है। रोजाना हत्या और लूट की वारदात होती हैं।  - मनोज कुमार, जिटौली 

बदमाशों में खौफ नहीं है। आम लोगों को बदमाश धमकी देकर जाते है। एनकाउंटर में पैरों में गोली मारना महज दिखावा है। - सचिन माल्या, पुरानी मोहनपुरी 

पुलिस ने अपराधियों पर शिकंजा कसा है। मुठभेड़ में बदमाशों को ढेर करने या पैर में गोली लगने का असर अपराध पर पड़ा है। महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। - विरेंद्र जैन उर्फ बिल्लू, ब्रह्मपुरी 

हत्या और लूट का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। चेन, पर्स स्नैचिंग में गिरावट पर पुलिस को बधाई - मनोज शर्मा, सुभाषनगर

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