बिसाहड़ा कांड के आरोपी राजू की जेल में मौत के बाद वेस्ट यूपी की जेलों में सतर्कता बरतने के निर्देश जारी हुए है। मेरठ जेल की हालत बहुत खराब है। 2553 बंदियों का इलाज करने के लिए सिर्फ एक डॉक्टर है। वहीं, जेल में पुलिस फोर्स की भी कमी बताई जा रही है। डीआईजी जेल ने इन समस्याओं का जल्द निस्तारण करने की बात कही है।
चौधरी चरणसिंह जिला कारागार में सोमवार को डीआईजी जेल वीरेंद्र सिंह शेखर ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक संतलाल यादव और जेलर के साथ मीटिंग ली। जिसमें बिसाहड़ा कांड के आरोपी राजू की जेल में मौत और जेल के स्टिंग पर चर्चा हुई। डीआईजी ने दोनों अफसरों को सख्त निर्देश दिए कि जिला जेल में बंदियों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए। आपात स्थिति में उन्हें सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
क्या करें इन हालात में
वरिष्ठ अधीक्षक ने बताया कि मेरठ जेल में 2553 बंदी है। उनके इलाज के लिए तो सिर्फ एक डॉक्टर है। जबकि रोजाना 30 से 50 बंदी कचहरी में पेशी पर जाते है। जिनका मेडिकल होना अनिवार्य होता है। ऐसी स्थिति में बंदियों का रुटीन चेकअप और समय से इलाज मिलना कैसे संभव है। बंदियों की संख्या तो लगातार बढ़ती जा रही है और सुरक्षा में लगे बंदी रक्षक (69) बहुत कम हैं।
जो आएगा, बंदी से मिलकर जाएगा
वरिष्ठ अधीक्षक ने बताया कि वह आगरा सेंट्रल जेल और जिला जेल में वरिष्ठ अधीक्षक थे। उनकी प्राथमिकता है कि मुलाकाती की बंदी से हर हालत में मुलाकात हो जानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने अब 11 बजे से दो बजे तक पर्ची बनवाने का समय बढ़ा दिया है। कम संसाधनों में बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जाएगा।