देश की राजधानी से सटे वेस्ट यूपी को आतंकी गतिविधियों का प्लेटफार्म माना जाता है। देश भर में कहीं भी आतंकी वारदात होती है तो तार कहीं न कहीं वेस्ट से आकर जुड़ जाते हैं। अतिसंवेदनशील मेरठ समेत जोन के अन्य जिलों में सिस्टम इस लिहाज से फिट नहीं है। संसाधनों के साथ ही एक्सपर्ट का टोटा है।
अपने दम पर आतंकी गतिविधियों और वारदातों से निपटने के माकूल इंतजाम तक नहीं हैं। हालात प्रतिकूल हैं, इससे आईजी जोन भी इंकार नहीं करते हैं। उनका मानना है कि जरूरत के हिसाब से हम काफी पीछे हैं। हम स्पेशल कमांडो की तर्ज पर एक्सपर्ट स्क्वाएड तैयार करा रहे हैं।
यह हैं हालात
वेस्ट यूपी में जब भी गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अलावा कांवड़ यात्रा या इससे समकक्ष कोई बड़ा इवेंट होता है तो आतंकी हमले का इनपुट मिलने पर लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं। ऐसे समय क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) और स्पेशल वैपंस एंड टेक्टिस (स्वाट) का नाम ही सामने आता है। बीती कांवड़ यात्रा में इन दोनों ही स्क्वाएड की क्या स्थिति रही, इसकी हकीकत किसी से छुपी नहीं है। हालांकि गनीमत है कि ऐसे आयोजन सकुशल तो निपट रहे हैं लेकिन आतंकी गतिविधियां लगातार चल रही हैं।
आईएसआई या अन्य आतंकी संगठनों की यही गुपचुप गतिविधियां आगे जाकर किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देती हैं। जरूरत के हिसाब से न तो इनके पास आतंकी गतिविधियों या किसी संभावित हमले से निपटने के संसाधन हैं और न पर्याप्त मैनपावर। चोर, लुटेरों को पकड़ने में दबिश देने वाले क्राइम ब्रांच के सिपाहियों को स्वाट के साथ खड़ा कर दिया गया। हाई सेंसेटिव जोन होने के बावजूद एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाएड (एटीएस) जैसा कोई ऐसा डेडीकेटिड स्क्वाएड नहीं है जो विशुद्ध रूप से मेरठ जोन में ही काम करे।
चुनौतियां भी कम नहीं
देश की बड़ी छावनियों में शुमार मेरठ छावनी में सेंध लगाने के लिए आईएसआई कई दशक से अपना जाल फैलाती आ रही है। कई मामलों में काफी हद तक सफल भी रही। पिछला रिकॉर्ड देखा जाए तो जब भी कोई आईएसआई एजेंट या स्लीपिंग मॉड्यूल पकड़ा गया तो उसके पास सेना के गोपनीय दस्तावेज और नक्शे बरामद हुए। यहां तक कि सेना के कुछ जवानों के देशद्रोही होने की सच्चाई भी सामने आई। ताजा मामला पाक जासूस मोहम्मद इजाज का मेरठ में पकड़ा जाना है जो बरेली में रहकर मेरठ और उससे जुड़े जिलों के अलावा दिल्ली और उत्तराखंड तक आईएसआई के लिए घुसपैठ कर चुका था। उसके सहयोगी कोलकाता से दबोचे गए।
खुलासा हुआ कि इजाज और उसके सहयोगी एयरबेस समेत कई सैन्य संस्थानों की गोपनीय जानकारी जुटा चुके थे। इसलिए पठानकोट एयरबेस हमले के बाद इजाज और उसके सहयोगी पाक जासूसों को फिर से टटोला गया। दुर्भाग्य यह है कि इजाज जैसे जासूस जब तक पकड़े जाते हैं, उससे पहले सेना और देश की गोपनीय जानकारियां आईएसआई तक पहुंचा चुके होते हैं। इसलिए यहां ऐसे स्क्वाएड की खास जरूरत है जो इस पर खरा उतर सके।
अब फिर से कवायद
आईजी जोन आलोक शर्मा का कहना है कि आतंकी गतिविधियों या वारदातों से निपटने के लिए मेरठ पुलिस के पास फिलहाल ठोस इंतजाम नहीं है। लेकिन जल्द ही कमांडो की तर्ज पर 20 एक्सपर्ट जवानों का स्क्वाएड बनाया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि यदि कोई ऐसी स्थिति आती है तो केंद्रीय टीम से पहले लोकल एक्सपर्ट स्क्वाएड आतंकियों से मुकाबला कर सके।
आईएसआईएस की धमकी पर गंभीर
हिंदू संगठन नेता राहुल ठाकुर ने सीएम और केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी भेजी थी कि गणतंत्र दिवस पर आईएसआईएस ने मेरठ में आतंकी हमला करने की धमकी दी थी। चिट्ठी में भाजपा विधायक संगीत सोम, योगी आदित्य नाथ, शहर काजी और खुद उन्हें बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। निशाने पर अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के अलावा प्रधानमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। पठानकोट हमले के बाद मेरठ में हमला करने को कहा गया। इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को गृह मंत्रालय से अलर्ट रहने के निर्देश मेरठ पुलिस को मिले हैं।