पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भारतीय एयरबेस और ऑपरेशनल विंग की जानकारी जुटाने में लगा है। इससे भारत के प्रति पाक के नापाक मंसूबों का अंदाजा आसानी लगाया जा सकता है। एजेंट के जरिये पाक की खुफिया एजेंसी तक पहुंची हिंडन, बरेली और आगरा एयरबेस की जानकारी से साफ है कि भारतीय एयरबेस आईएसआई के निशाने पर हैं। एजेंट ने इसके अलावा एक दर्जन से अधिक छावनियों में बसी सैन्य ऑपरेशन विंग के मूवमेंट की भी सूचनाएं भेजी हैं। इस काम के लिए उसे विशेष ट्रेनिंग दी गई थी।
मूल रूप से पाकिस्तान में इस्लामाबाद के तरामड़ी चौक इरफानाबाद निवासी आईएसआई एजेंट मोहम्मद इजाज उर्फ मोहम्मद कलाम पुत्र मोहम्मद इशहाक का मेरठ में पकड़ा जाना कई मायने में अहम है। देश की तीन सबसे बड़ी छावनियों में शुमार मेरठ छावनी सैन्य क्षमता और ऑपरेशनल मूवमेंट के हिसाब से बेहद महत्वपूर्ण है। आईएसआई एजेंट के पास से मिले सुबूत इशारा कर रहे हैं कि वह भारतीय सुरक्षा तैयारियों और रणनीति में किस तरह सेंध लगा रहा था।
कई बार किया आगरा-दिल्ली का दौरा
जासूस इजाज के पास से मिले दिल्ली मेट्रो के कार्ड से पता चला कि वह कई बार दिल्ली पहुंचा। उसने खुलासा किया कि मेट्रो की विंडो पर बार-बार न जाना पड़े, इसलिए कार्ड बनवाया और वह जगह-जगह घूमकर सैन्य गतिविधियों और हिंडन एयरबेस की जानकारी जुटाई। इसके अलावा वह 20 से 25 बार आगरा गया और न सिर्फ आगरा छावनी, बल्कि आगरा एयरबेस की जानकारी जुटाता था।
बरेली एयरबेस की अहम जानकारी भेजी
एजेंट इजाज वर्तमान में 457 दीवानखाना शाहाबाद बरेली में रह रहा था। वहां रहकर वह उत्तर भारत एरिया मुख्यालय के अलावा बरेली एयरबेस की कई अहम जानकारियों को जुटा चुका था। एक साल में उसने कई महत्वपूर्ण जानकारी आईएसआई को स्काइप के जरिए भेजी थी।
पत्रकार बनकर बनाई वीडियो
इजाज ने यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुई बेहद गोपनीय इमरजेंसी लैंडिंग की भी वीडियो बनाई थी। इसके लिए वह पत्रकार बन गया था। उसने मौके पर पहुंचकर वीडियो बनाया, जिसे उसने आईएसआई को भेजा।
ऑपरेशनल विंग की जानकारी पाक तक पहुंची
मेरठ, मथुरा, बरेली, पिथौरागढ़ और उत्तराखंड में सेना की कई अहम ऑपरेशनल विंग हैं। मेरठ में जहां दो ऑपरेशनल विंग के मुख्यालय हैं और पश्चिम यूपी सब एरिया मुख्यालय भी यहीं है। वहीं, बरेली में उत्तर भारत एरिया मुख्यालय है। मथुरा में जहां एक कोर का मुख्यालय है। वहीं, उत्तराखंड में कई ऑपरेशनल विंग की यूनिट हैं। इजाज ने खुलासा किया कि एक साल में उसने वेस्ट यूपी और उत्तराखंड के एक दर्जन से अधिक छावनियों की रेकी की और ऑपरेशनल विंग के मूवमेंट की समय-समय पर जानकारी देता रहा।
सैन्य इन्स्टॉलेशन की विशेष ट्रेनिंग की थी
एसटीएफ अपर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इजाज को सैन्य इन्स्टॉलेशन की छह महीने की विशेष ट्रेनिंग पाक में दी गई थी। उसे सैन्य गाड़ियों पर लिखे जाने वाले नंबरों से लेकर यूनिट के नंबरों का पूरा फर्क जबानी याद था। इजाज को सैन्य उपकरणों को चलाने की कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। उसका काम सिर्फ सूचनाएं पाक तक पहुंचाना था।
खतरा है एयरबेस की जानकारी लीक होना
सुरक्षा जानकारों की मानें तो एयरबेस और ऑपरेशन विंग की भेजी जा चुकी जानकारियां सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक साबित हो सकती हैं। जानकारों ने सवाल उठाया कि अगर भारत पर युद्ध की स्थिति में पाक को एयरबेस की जानकारी हो और वह उसे ध्वस्त कर दे तो भारत की पूरी रणनीति फेल हो सकती है।