मणप्पुरम कंपनी में सरेशाम लूट होने से तीसरे दिन भी बाजार में बदमाशों की दहशत बरकरार रही। कंपनी की कर्मचारी सोनिया, साक्षी और मैनेजर सचिन तोमर एडीजी कार्यालय में बदमाशों की पहचान करने के लिए पहुंचे। तीनों चश्मदीद कर्मचारियों ने सरदार की वेशभूषा में आए आरोपी सुशील की पहचान की।
खतौली में बेचा सोना
आरोपी सुशील ने अपने गांव के दीपक के जरिये खतौली में एक सराफ के यहां पर सोना बेचा था। साढे़ आठ लाख रुपये बदमाश सराफ से लेकर आए थे। जोकि पुलिस ने बरामद किये। पुलिस ने बताया है कि सराफ के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
फरार आरोपी ढूंढना चुनौती
एडीजी ने प्रेसवार्ता में बताया कि आरोपियों ने वारदात में छह लोगों का होना बताया है। तीन आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस और एसटीएफ लगी हैं। तीनों आरोपी मेरठ से बाहर भागे हैं। उनको ढूंढना चुनौती बना है। उनके पास छह किलो सोना बताया गया है।
तिहाड़ जेल में बनी थी सोना लूटने की योजना
दिल्ली के डॉ. श्रीकांत का अपहरणकर्ता सुशील दादरी साल 2018 में दिल्ली की तिहाड़ जेल में था, जहां उसकी मुलाकात गांव के विपुल से हुई। दोनोें ने जेल से छूटकर मेरठ शहर में बड़ी लूट करने की योजना बनाई। विपुल ने सुशील को बताया कि कंकरखेड़ा की वंडर सिटी कॉलोनी में उसका दोस्त भगत सिंह तालियान है, जोकि अपने साथियों के साथ मिलकर कंकरखेड़ा, दौराला व पल्लवपुरम क्षेत्र में लूटपाट करता है।
विपुल जेल से बाहर आया। उसने भगत से बड़ी लूट करने की बात कही। दोनों ने सुशील का जेल से छूटने का इंतजार किया। जेल से छूटते ही सुशील को विपुल ने भगत से उसके घर वंडर सिटी में मिलवाया। सवाल उनके सामने था कि आखिर मोटा पैसा कहां मिलेगा, जहां आसानी से लूट हो सकती हो। इसका पता लगाने के लिए तीनों बदमाश अपने-अपने साथियों के साथ लग गए। उनका गिरोह तैयार था, जिसका सरगना सुशील था। कंकरखेड़ा, पल्लवपुरम, दौराला व शास्त्रीनगर में कई बड़े घरों में लूट करने का प्लान बना लिया। लेकिन उन्हें खतरा था कि पोल खुल गई तो पुलिस एनकाउंटर कर देगी।
मुथूट कंपनी के बाद मणप्पुरम कंपनी में गया सुशील
बदमाशों ने बेगमपुल स्थित मुथूट गोल्ड लोन की भी रेकी की। उनके ऑफिस में सुशील गया, जहां पर ज्यादा कर्मचारी देखकर वह डर गया। तभी उसकी नजर मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी पर पड़ी। सुशील वहां गया और लोन लेने की बात करके लौट गया। मणप्पुरम में दो महिला कर्मचारी और एक मैनेजर ऑफिस में रहते हैं। वहां सुरक्षाकर्मी भी नहीं था।
15 दिन पहले कराया रजिस्ट्रेशन
सुशील ने भगत और विपुल को बताया कि मणप्पुरम गोल्ड कंपनी में वारदात करनी है। बेगमपुल पर पुलिस रहती है। लेकिन वहां आसानी से घटना की जा सकती है। उसके बाद सुशील ने कंपनी में रजिस्ट्रेशन कराया। जेवरात गिरवी रखकर 34 हजार रुपये लोन लिया। इस कंपनी में सुशील चार-पांच बार गया। लेकिन कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
सुशील और वरुण कैमरे में कैद
कंपनी में अंदर सुशील के साथ वारदात करने कौन जाएगा, इसको लेकर बदमाशों में बहस भी हुई। सुशील ने विपुल को साथ चलने की बात कही। विपुल बोला कि मेरी लंबाई ज्यादा है, आसानी से पुलिस उसको पहचान लेगी। विपुल ने मोदीनगर के युवक वरुण को बुलाया। भगत के घर पर बैठकर प्लानिंग बनाई। वरुण आया औैर उसको सुशील के साथ जाने को तैयार किया गया।
वेशभूषा बदली, फिर की वारदात
सुशील ने नकली मूंछ और दाढ़ी लगाई और पगड़ी बांधकर सरदार की वेशभूषा बनाई। वरुण के सिर पर काले रंग का कपड़ा बांधा। दोनों कंपनी में अंदर गए। दस मिनट में वारदात करने के बाद वहां से भागे। बाइक से बदमाश सीधे बच्चा पार्क, घंटाघर, रेलवे रोड थाने के सामने होते रोहटा रोड पर पहुंचे। वहां से भगत के घर वंडर सिटी कॉलोनी में पहुंचे, जहां पर जेवरात का बंटवारा होने लगा।
बैग में निकला ट्रैकर
जेवरात के साथ बैग में ट्रैकर को भी बदमाश ले गए। वंडर सिटी में बदमाश जेवरातों का बंटवारा कर रहे थे। तभी बैग से ट्रैकर नीचे गिरा। ट्रैकर को देखते सुशील समझ गया कि वह फंस गए। सुशील ने अपने साथियों को बताया कि पुलिस को यहां की लोकेशन मिल गई। चार किलो सोना सुशील और भगत ने लिया, जबकि अन्य सोना चार बदमाशों को दे दिया। सभी बदमाश अलग-अलग दिशाओं में भागे थे।