गांव में धार्मिक स्थल बनाकर कुर्बानी देने के ऐलान को लेकर चल रहे सांप्रदायिक तनाव के बीच घिसौली में शुक्रवार को ईद नहीं मनी। न तो ईद की नमाज पढ़ी गई और न कुर्बानी हुई। दूसरे समुदाय के लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। पुलिस-प्रशासन और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि किसी पर त्योहार न मनाने का कोई दबाव नहीं था।
घिसौली गांव में ईद पर बिना अनुमति धार्मिक स्थल का निर्माण और कुर्बानी की परंपरा शुरू कराने के ऐलान को लेकर तनातनी चली आ रही थी। गांव के दूसरे पक्ष के ग्रामीणों ने भी साफ कह दिया था कि यदि ऐसा हुआ तो निर्माण तोड़ दिया जाएगा। कुर्बानी की नई परंपरा को शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
बृहस्पतिवार को पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में थाना कंकरखेड़ा पर गांव के दोनों समुदायों की चार घंटे चली बैठक भी बेनतीजा रही थी। अफसरों ने भी चेतावनी दे दी थी कि यदि किसी भी समुदाय ने माहौल खराब करने की कोशिश की तो 5-5 लाख जुर्माने के साथ ही रासुका की कार्यवाही होगी। शुक्रवार तड़के से ही एसपी ट्रैफिक पीके तिवारी, सीओ दौराला और इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा भारी फोर्स के साथ डटे रहे।
हम पर न कोई दबाव, न मनाही
शुक्रवार सुबह जब ग्रामीण ईद की नमाज के लिए घरों से नहीं निकले तो एसपी ट्रैफिक द्वारा कारण पूछने पर उन्होंने कह दिया कि वे स्वेच्छा से ईद नहीं मना रहे हैं। हम पर कोई दबाव नहीं है। न ही हमें किसी ने मना किया है। गांव में 50 वर्षों से दोनों समुदाय भाईचारे के साथ त्योहार मनाते आए हैं। लेकिन इस बार ऐसे हालात पैदा हो गए कि टकराव की स्थिति बन गई। अगर उनके कुर्बानी करने से दूसरे समुदाय के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो वे त्योहार ही नहीं मनाएंगे। पुलिस के समझाने का भी लोग नहीं माने। काली पट्टी बांधकर धार्मिक स्थल न बनाने व कुर्बानी से रोकने पर रोष जताया।
पंचायत चुनाव ही फसाद की जड़
इस पूरे फसाद की जड़ पंचायत चुनाव है। दोनों समुदायों के कुछ लोग ग्रामीणों को भड़का रहे हैं। दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने प्रधान पद के प्रत्याशियों से वादा किया है कि यदि गांव में धार्मिक स्थल का निर्माण और कुर्बानी शुरू हो गई तो तो सारे वोट मिलेंगे। जबकि दूसरे पक्ष के भी कुछ लोगों ने वादा कर दिया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो सारे वोट तुम्हारे होंगे। प्रधान की सीट हासिल करने के लिए लोग दोनों समुदायों के लोगों को भड़काकर अपना- अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं।