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गंगनहर में गिरी श्रद्धालुओं की कार, पांच की मौत

Sun, 26 May 2019 04:09 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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डूबे लोगों को बाहर निकालते गोताखोर - फोटो : अमर उजाला
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सरूरपुर/मेरठ। मेरठ के रोहटा इलाके में शनिवार तड़के करीब 4:45 बजे बड़ा हादसा हो गया। चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग (गंग नहर पटरी) पर तेज रफ्तार कार अगला टायर फटने के बाद नहर में जा गिरी। अर्टिगा कार में देवरिया के दो परिवारों के 11 सदस्य सवार थे। इनमें पांच लोगों की मौत हो गई। जिनमें गुरुग्राम निवासी कार का चालक भी था। पांच लोगों को पुलिस और राहगीरों ने बचा लिया। एक महिला नहर में बह गई। एनडीआरएफ और पीएसी की टीम ने देर शाम तक सर्च अभियान चलाया। लेकिन महिला का पता नहीं चल पाया।
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मरने वालों में संदीप (30) पुत्र कपूर चंद गुप्ता निवासी गांव पिंडी थाना लार जिला देवरिया, संदीप का पुत्र आशुतोष (5), अंश (8) पुत्र देवी प्रसाद निवासी भटवलिया थाना कोतवाली जिला देवरिया, अंशिका (3) देवी प्रसाद, अर्टिगा कार के चालक विक्की यादव (30) पुत्र विद्यानंद हंस एंक्लेव, राजीव चौक गुरु गाम की मौत हो गई। वहीं, देवी प्रसाद की पत्नी रिंकी (28) लापता है। जबकि सालिनी (21) व छोटी बहन सोनी (19) पुत्री राजेश निवासी नन्हैड़ा जिला देवरिया, देवी प्रसाद पुत्र दरबारी लाल निवासी भटवलिया जिला देवरिया, आशा पत्नी संदीप निवासी पिंडी (28) और संदीप की पुत्री आराध्या (4) घायल हैं, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
 थानाध्यक्ष रोहटा धनवीर सिंह के अनुसार संदीप गुप्ता अपने साढ़ू राजेश गुप्ता के दो बच्चों सोनी व शालिनी को साथ लेकर दो दिन पूर्व गुरुग्राम में अपने बहनोई देवी प्रसाद गुप्ता के यहां गए थे। शनिवार सुबह संदीप, उनकी पत्नी आशा गुप्ता और बच्चों के अलावा साढ़ू और उनकी दोनों बेटियां व बहनोई देवी प्रसाद गुप्ता सहित 11 लोग सफेद रंग की अर्टिगा कार एचआर 55 एई 3253 के चालक विक्की यादव के साथ हरिद्वार स्नान करने के लिए निकले थे। शनिवार तड़के करीब 4:45 बजे रोहटा थाना क्षेत्र के जटपुरा गांव के सामने अचानक कार का अगला टायर फट गया। जिसके बाद चालक कार पर नियंत्रण नहीं रख पाया और कार अनियंत्रित होकर नहर पटरी के डोले को तोड़ते हुए गंग नहर में समा गई।
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नींद में थे सभी लोग
एसओ रोहटा के अनुसार कार चालक को छोड़कर अन्य सभी लोग सोए हुए थे। हादसे के बाद चीख पुकार मच गई। पीछे से आ रहे ट्रक चालक ने डूंगर गांव के पुल पर खड़ी यूपी 100 पुलिस को सूचना दी। करीब तीन मिनट में ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। कार का कुछ हिस्सा ही पानी में बहता हुआ दिखाई दे रहा था। पुलिस ने आसपास के लोगों की मदद से कार सवार पांच लोगों को बचा लिया। सूचना पर सीओ सरधना पंकज सिंह, एसपी देहात अविनाश पांडेय, एसडीएम सरधना कमलेश मौके पर पहुंचे। बाद में पीएसी के गोताखोर और एनडीआरएफ की टीम बुलाई गई। लापता रिंकी का कोई सुराग नहीं लगा। सभी पांचों शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए।

परिवार को जिंदगी भर का गम दे गया ये हादसा  
मेरठ/देवरिया।
गंगनहर में कार गिरने के बाद पांच लोगों की मौत ने देवरिया के गुप्ता परिवार को जिंदगी भर का गम दे दिया। पल भर में सब कुछ चल गया। हादसे ने इकलौते बेटे और पोते को छीना तो बेटी अभी तक नहर में लापता है। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
देवरिया के पिंडी गांव निवासी कपूर चंद गुप्ता रिटायर्ड मेजर हैं। उनके इकलौते बेटे संदीप निजी विद्यालय में कंप्यूटर शिक्षक थे। संदीप का स्कूल भी है जिसकी वह देखरेख करते थे। इस हादसे में संदीप की मौत तो हुई ही, गंगनहर में कार गिरने के बाद से संदीप की बहन रिंकी लापता हैं। जबकि संदीप के पुत्र आशुतोष के अलावा इस हादसे ने संदीप के भांजे अंश और भांजी अंशिका को भी छीन लिया।
बदहवास हुए, कुछ नहीं सूझ रहा
इकलौते बेटे की मौत के बाद से बदहवास कपूर चंद गुप्ता को कुछ भी नहीं सूझ रहा है। कपूर चंद्र की चार बेटियां अंजू, चित्रा, गुड़िया और रिंकी के अलावा एकमात्र बेटा संदीप था। संदीप ने आशा गुप्ता से प्रेम विवाह किया था। एक निजी स्कूल में कंप्यूटर शिक्षक थे। अंजू पत्नी राजेश निवासी नैनहा बनकटा की दो बेटियां सोनी (18) और शालिनी (21) मामा के घर रहकर पढ़ाई करती हैं। गर्मी की छुट्टी होने पर 23 मई को संदीप, आशा, बेटे आशुतोष, बेटी आराध्या और दोनों भांजियों को लेकर सबसे छोटे बहनोई देवी गुप्ता के पास गुरुग्राम गए थे। वहां से संदीप और देवी प्रसाद गुप्ता का पूरा परिवार हरिद्वार स्नान करने जा रहा था। शनिवार तड़के गंग नहर में कार गिरने से संदीप, आशुतोष, अंशू और अंशिका पुत्री देवीप्रसाद की मौत हो गई। कार चालक विक्की यादव भी हादसे का शिकार हुआ।
सदमे में पूरा परिवार
हादसे की सूचना मिलने पर कपूर चंद मेरठ के लिए रवाना हो गए। देवी गुप्ता के भटवलिया स्थित आवास पर पिता दरबारी गुप्ता और बड़े भाई रमेश चंद गुप्त मिले। अंशू और अंशिका की मौत से सभी सदमे में हैं। पेशकार पद से सेवानिवृत्त अंशिका के बाबा दरबारी लाल ने बताया कि 20-25 दिन पहले देवी यहां आया था। शाम को वह बिना बताए चला गया। गुरुग्राम से आने पर ससुराल में ही ज्यादा रहता था। पोती की मौत की सूचना मिली है। हमारे परिवार पर तो वज्रपात हो गया है। देवी गुप्ता संदीप के बहनोई हैं। जो गुरुग्राम के पास रहते हैं।
तब डूबे थे सात लोग
सरूरपुर।
गंगनहर पटरी पर न तो लाइट की व्यवस्था है और न कहीं स्पीड ब्रेकर हैं। कहीं भी बैरियर नहीं लगाए हैं। गति संकेतक भी नही हैं। ऐसे में लगातार हादसे हो रहे हैं और प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। 23 दिसंबर 2010 की शाम एक स्कॉर्पियो गाड़ी वाहन बचाने के दौरान अनियंत्रित होकर गंगनगर में जा गिरी थी। जिसमें सूजड़ू मुजफ्फरनगर के एक ही परिवार के चार बच्चों सहित सात लोगों की मौत हो गई थी जबकि दो लोगों को मशक्कत से नहर से निकाला जा सका था।
जानलेवा बनी गंगनहर पटरी, जिम्मेदार कौन  
मेरठ।
गंगनहर पटरी पर हादसे रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के बड़े-बड़े दावे हवाई साबित हो रहे हैं। गंगनहर पटरी को सुरक्षित करने का मसला कई बार उठा। लेकिन हर बार दावों में दब जाता है। शनिवार को फिर नहर में कार गिरने के बाद पांच लोगों की मौत हो गई। सरकारी विभाग हमेशा की तरह एक-दूसरे की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ने लगते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि इस लापरवाही और उदासीनता का जिम्मेदार कौन है।
हरिद्वार और गाजियाबाद के बीच मेरठ जिले की सीमा में गंगनहर पटरी मार्ग की लंबाई 42 किमी है। काफी जर्जर हो चुकी सड़क का जबसे निर्माण हुआ है, यहां वाहनों की स्पीड काफी बढ़ गई। लेकिन अधिकांश स्थानों पर गंग नहर वाली साइड में पटरी की रेलिंग टूटी हुई है। दूर दूर तक भी रेलिंग नहीं है। जहां है, वहां सड़क की मरम्मत कार्य होने पर रेलिंग सड़क के समतल आ गई। वहीं, पथ प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं है। जबकि गंगनहर की गहराई जहां बहुत अधिक है तो पानी का बहाव भी तेज रहता है। कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में कांवड़िए जल लेकर अपने गंतव्य पर पहुंचते हैं। कई बार शासन स्तर से नहर पटरी की दशा सुधारने के निर्देश दिए जा चुके हैं। लेकिन उसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ।
बचाव के इंतजाम नहीं
गंगनहर पटरी मार्ग पर पल भर में तेज रफ्तार वाहन नहर में समा जाते हैं। कई कई दिन तक वाहन नहीं मिलते। जिले में न तो गोताखोरों की टीम है और बचाव के कोई पुख्ता इंतजाम। एनडीआरएफ की टीम को भी गाजियाबाद से बुलाया जाता है। तब तक वाहन काफी दूर बह जाते हैं। मेरठ की सीमा में जानी, रोहटा, सरूरपुर, सरधना थाना क्षेत्र में वर्ष 2108 में 60 लोगों की जान यह नहर ले चुकी है। इस साल भी 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
न रेलिंग लगी न बने स्पीड ब्रेकर
दिसंबर 2018 में सभी सरकारी विभागों की बैठक हुई थी। जिसमें उच्च अधिकारियों ने निर्देश दिए थे कि गंगनहर पटरी मार्ग पर रेलिंग, स्पीड ब्रेकर, हाइट गेज लगाए जाएंगे। लेकिन सभी विभाग सो गए और कुछ नहीं हुआ। उसके तीन माह बाद सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में फिर से यही आदेश उच्च अधिकारियों ने दिए। लेकिन व्यवस्था नहीं सुधरी।
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बडे़ हादसे
14 सिंतबर 2013: कार जानी क्षेत्र में गंगनहर में गिरी, गौतमबुद्घ नगर निवासी एक परिवार के सात लोग डूबे।
08 दिसंबर 2018: गंगनहर में ट्रक गिरा, एनडीआरएफ टीम को पांच दिन में ट्रक का सुराग लगा। चालक का शव नहीं मिला।
19 दिसंबर 2018: एचसीएल कंपनी के तीन इंजीनियरों की कार नहर में गिरी। दो की जान बची। एक इंजीनियर का शव एक सप्ताह बाद मिला।
20 जनवरी 2019: रोहटा क्षेत्र में कार गिरने से परिवार के तीन लोगों की मौत।
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