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फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज खुलासे का मुख्य सरगना पुलिस के लिए चुनौती, कुर्की की तैयारी

Wed, 04 Jan 2017 12:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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गंगानगर में दो साल पहले हुए फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज खुलासे का मुख्य सरगना अभी भी पुलिस के लिए चुनौती बना है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस आरोपी की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी में है।
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गंगानगर थाना क्षेत्र में इंटरनेशनल स्कूल के पास एक मकान में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने 16 जनवरी 2015 को छापा मारकर बीएसएनल के फर्जी एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने मौके से बीएसएनएल के 64 सिम, राउटर वाई-फाई और जेएस मॉडम व अन्य उपकरण बरामद किए थे। पुलिस ने इस मामले में आरोपी विकास, मामचंद, वसीम, सिकंदर, उस्मान और निशांत जेल भेजे थे। जिनमें विकास को छोड़कर सभी को जमानत मिल चुकी है। देवबंद निवासी छात्र वसीम की आईडी पर यह मकान किराए पर लिया था। जिसे गंगानगर में साइबर कैफे चलाने वाले विकास निवासी बहचौला थाना इंचौली ने दिलाया था। इसी के खाते में किराए के पैसे आते थे। इस गैंग से बीएसएनएल देवबंद के दो अस्थायी कर्मचारी भी जुड़े थे।

बीटेक पास बताया सरगना
गैंग का सरगना और मुख्य आरोपी हर्ष अग्रवाल उर्फ हैप्पी उर्फ जैक उर्फ हरीश कुमार पुत्र शंकरलाल निवासी मलक पैंठ हैदराबाद है। पुलिस के अनुसार मूल रूप से महेंद्रगढ़ हरियाणा निवासी हर्ष बीटेक पास बताया जाता है। उसका परिवार महेंद्रगढ़ से हैदराबाद शिफ्ट हो गया था। उसका चाचा महेंद्रगढ़, बुआ दिल्ली में और एक भाई अमेरिका में रहता है। हर्ष की कई बार लोकेशन हैदराबाद और बंगलूरू में मिली। वह ज्यादातर नेट कॉलिंग करता है। कई बार उसकी तलाश में हरियाणा, दिल्ली और हैदराबाद में दबिश दी गई। लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा। एसीजेएम कोर्ट ने मुख्य आरोपी की संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए हैं। जिस पर जल्द ही पुलिस टीम कुर्की करने के लिए हैदराबाद जाएगी।
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ऐसे लगाया था चूना
साइबर सेल के प्रभारी कर्मवीर सिंह के अनुसार इस गैंग का मकसद सरकार को चूना लगाकर पैसा कमाना था। जांच में सामने आया कि बीएसएनएल के इस फर्जी एक्सचेंज से देश-विदेश में करीब 84 हजार इनकमिंग और  आउटगोइंग कॉल्स की गई थीं। सरकार को इनकमिंग कॉल के हिसाब से टैक्स मिलता है। मुख्य आरोपी ने अवैध रूप से वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) सेटअप लगाया था। जिसमें देवबंद से फर्जी आईडी पर लिए बीएसएनएल के 64 सिमों का प्रयोग हुआ था। इस फर्जी एक्सचेंज से विदेशी कॉल के मिनट बेचकर सरकार को 3.50 करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया था।
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