परीक्षितगढ़/मेरठ। जिला पंचायत वार्ड 34 के उप चुनाव में शनिवार को हुई अनित गुर्जर की हत्या पर सपा नेताओं ने पुलिस-प्रशासन को निशाने पर ले लिया है। सपा नेताओं का आरोप है कि सिस्टम की नाकामी के कारण प्रधान के बेटे की पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी जाए, इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है। सपा नेताओं ने पहले से ही आशंका जताई थी कि प्रत्याशी विजय धामा भाजपा के एक विधायक के इशारे पर खून खराबा कर सकता है। हुआ भी यही। पुलिस के सामने गोली मारकर अनित गुर्जर की हत्या कर दी गई।
सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने शुक्रवार को वार्ड-34 जिला पंचायत उपचुनाव को लेकर डीएम अनिल ढींगरा के कार्यालय में ज्ञापन सौंपा था। सपा जिलाध्यक्ष ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर मतदान प्रभावित करने का आरोप लगाया। जिसमें पांच बिंदुओं का मांगपत्र सौंपते हुए चुनाव के दौरान एक विधायक के गांवों में जाने पर रोक लगाने की मांग की। भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजय धामा के गांव रामनगर में अतिरिक्त संख्या में फोर्स व सठला गांव में भी फोर्स की मांग की थी। ज्ञापन देने वालों में सपा विधायक रफीक अंसारी, सैय्यद रिहानुद्दीन, जिला कोषाध्यक्ष संजीव गुप्ता आदि रहे थे।
जिसके बाद सपा नेताओं ने पुलिस अफसरों से भी मांग की थी कि बली गांव में जिस प्राथमिक विद्यालय में वोटिंग की जानी है, वहां पीएसी और पुलिस लगाई जाए। लेकिन थानेदार से लेकर पुलिस के उच्च अधिकारी माहौल को नहीं भांप पाए। सुरक्षा को लेकर एक दरोगा समेत एक दर्जन पुलिसकर्मी लगा दिए, जिनमें पीएसी भी थी।
आरोप है कि शनिवार को चल रहे उपचुनाव में शाम के समय वोटिंग पूरी भी नहीं हुई थी कि भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजय धामा हाथ में पिस्टल लहराते हुए वहां पहुंच गया। जिसके बाद आरोपी ने खुलेआम कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए बूथ कैप्चरिंग की कोशिश की। बली गांव के प्रधान व भाजपा समर्थित कालूराम के बेटे अनित गुर्जर ने विजय को समझाने की कोशिश की तो आरोप है कि विजय ने अनित की गोली मारकर हत्या कर दी। पूरा घटनाक्रम पुलिस के सामने हुआ और हत्यारोपी फायरिंग करते हुए फरार होे गया।
प्रशासन है जिम्मेदार: अतुल प्रधान
सपा नेता अतुल प्रधान का आरोप है कि पुलिस और पीएसी के सामने प्रधान के बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई। कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है। पुलिस के सामने भी यदि हत्या की जाए तो फिर कौन सुरक्षित होगा। भाजपा के एक विधायक के इशारे पर आरोपी ने खून खराबा किया है। इस पर पुलिस को आरोपी पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
गोली चलते ही कमरों में घुसा पुलिस बल
मेरठ। पुलिस अफसर कानून व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं। लेकिन जब मौका आता है तो ये दावे हवाई साबित होते हैं। बली गांव में पुलिस बल के सामने प्रधान के बेटे की हत्या कर दी गई और पुलिस बल हत्यारोपी की घेराबंदी के बजाय कमरों में जा घुसी। वैसे भी पुलिस के सामने हत्या का यह पहला मामला नहीं है। छह माह पहले कसेरू बक्सर में पुलिस के सामने बसपा के छात्रनेता की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी, जिसमें पुलिस ने एटीएम बूथ में घुसकर जान बचाई थी।
बली गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में जिपं वार्ड 34 के उप चुनाव में एक दरोगा समेत एक दर्जन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई थी। लेकिन जिस समय विजय धामा ने पिस्टल से गोली चलाई तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को स्कूल परिसर के कमरों में घुसकर जान बचानी पड़ी। खून से लथपथ अनित गुर्जर जमीन पर गिर पड़ा, लेकिन इसके बाद भी आरोपी खुलेआम फायरिंग करता हुआ समर्थकों के साथ दुर्वेशपुर मार्ग की तरफ से भाग निकला। जिसके बाद कुछ देर बाद आरोपी फिर पहुंचा और फायरिंग की।
प्रधान के पुत्र अनित गुर्जर की अस्पताल में मौत का पता चलते ही भीड़ बेकाबू हो गई। अनित गुर्जर जहां बली गांव का था। वहीं हत्या करने के आरोपी विजय धामा का गांव आधा किमी दूरी पर रामनगर है। ऐसे में दोनों गांवों के लोग आमने सामने आ गए और पथराव के बाद फायरिंग कर दी गई। भीड़ में इतना आक्रोश था कि भीड़ ने एसपी देहात अविनाश पांडेय और सीओ सदर देहात अखिलेश भदौरिया को भी घेर लिया। पुलिस के साथ हाथापाई कर दी। कई पुलिसकर्मियों के साथ धक्का मुक्की कर हाथापाई भी की गई। उसके बाद स्कूल परिसर के सामने खड़ी बस में तोड़फोड़ कर दी और आग लगाने की कोशिश की। पुलिस फोर्स भीड़ को खदेड़ने के बजाय खुद मौके से गायब हो गई। भीड़ के सामने जो भी वाहन आया उसी में तोड़फोड़ कर दी। जो भी सामने आया उसी पर पथराव किया गया। जिसके बाद बली और रामनगर गांव के लोग आमने-सामने आ गए और गांव के बाहर से ही हवाई फायरिंग करते रहे। बाद में एसएसपी अजय साहनी मौके पर पहुंचे और रामनगर और बली गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया।
मीडिया कर्मियों को भी बनाया निशाना
आक्रोशित भीड़ ने मीडिया कर्मियों को भी निशाना बनाया। घटना की कवरेज करने पर कई मीडिया कर्मियों के कैमरे तोड़ते हुए मोबाइल छीन लिए। इस दौरान मीडियाकर्मियों के वाहनों में तोड़फोड़ करते हुए हाथापाई भी की। बाद में पुलिस फोर्स ने किसी तरह भीड़ को संभाला।
एसएसपी के देरी से पहुंचने पर आक्रोश
आक्रोशित लोगों ने एसएसपी के देरी से पहुंचने पर भी आक्रोश जताते हुए नारेबाजी कर दी। पीड़ित पक्ष के लोगों ने एसएसपी से मांग करते हुए कहा जिन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगी थी उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। प्रत्याशी स्कूल परिसर में हथियार लेकर पहुंच गया। एसएसपी ने लोगों को समझाते हुए कहा कि जैसे ही घटना का पता चला तो वह फोर्स के साथ पहुंच गए। मैंने खुद फोर्स के साथ आरोपी विजय धामा के घर रामनगर में दबिश दी। यदि किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आई जो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने कहा कि तहरीर दें। पुलिस रिपोर्ट लिखकर कड़ी कार्रवाई कर रही है।
एसओ से हाथापाई कर छुड़ाया था मुल्जिम
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि कैंपस में छात्रसंघ का चुनाव लड़ चुके विजय धामा पर प्रधान पुत्र अनित गुर्जर की हत्या का आरोप है।
विजय धामा का सपा सरकार में विवादों से पुराना नाता रहा है। एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि विजय धामा समाजवादी छात्रसभा से छात्रसंघ का चुनाव लड़ा था। विजय धामा पर साल 2013 में पहली बार जानलेवा हमले की धारा में केस दर्ज हुआ। उसके बाद साल 2014 में विवि कैंपस में सरेआम मारपीट, तोड़फोड़ और फायरिंग की गई। जिसमें पुलिस ने उस पर बलवे की धारा में केस दर्ज किया था। विवि से चंद कदमों की दूरी पर तेजगढ़ी चौकी पर विजय धामा ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर मेडिकल एसओ वीके सिंह से हाथापाई कर मुल्जिम को छुड़ा लिया था। जिसके बाद एक सपा नेता के इशारे पर विजय धामा बच गया था। विजय धामा पर बलवा, मारपीट, धमकी देना, जानलेवा हमला समेत 10 मुकदमे दर्ज हैं। जिस पर हत्या का केस शनिवार रात को दर्ज किया गया।
मतदान ठीक हुआ है, सुनते ही बेकाबू हुई भीड़
मवाना/मेरठ। मतदान के दौरान प्रधान कालू राम के पुत्र अनीत की गोली लगने से हुई मौत के बाद मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने यदि सूझबूझ और धैर्य से काम लिया होता तो शायद गांव बली में इतना बवाल नहीं हुआ होता।
गांव बली में जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चल रहे मतदान के अंतिम चरण में बूथ पर कब्जा करने के प्रयास में फायरिंग के दौरान मतदान केंद्र परिसर में ही ग्राम प्रधान कालूराम के पुत्र अनित की गोली लगने के बाद मामला शांत था। बतौर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गांव वालों ने इस घटना के बाद अधिकारियों से उक्त पोलिंग बूथ के मतदान को निरस्त करने की मांग की थी। लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों ने मौके की नजाकत को नहीं समझा तथा भीड़ से साफ कह दिया कि मतदान सब कुछ ठीक हुआ है। अधिकारियों के इतना कहते ही गांव वालों के सब्र का बांध टूट गया। गांव वालों ने वहां मौजूद पुलिस और अधिकारियों पर पथराव करना शुरू दिया। अपने को घिरा देख पुलिस की ओर से हवाई फायरिंग की गई। बमुश्किल मतदान पार्टी को पुलिस सुरक्षा में खेतों के दोनों ओर से हो रहे पथराव के बीच से सुरक्षित निकाला गया।
एक मैगजीन खाली करके दूसरी की लोड
गांव वालों ने बताया कि प्रत्याशी विजय धामा ने खुली पिस्टल लगाई हुई थी। इसी स्थिति में उसने मतदान केंद्र के अंदर प्रवेश किया। जबकि वहां पर पुलिस फोर्स मौजूद था। ऐसे में किसी ने इस प्रकार खुला हथियार लेकर जाते हुए मतदान केंद्र के अंदर जाने से उसे क्यों नहीं रोका। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रत्याशी विजय धामा द्वारा फायरिंग में पिस्टल की एक मैगजीन खाली होने के बाद उसने दूसरी मैगजीन लोड कर फायरिंग की। इस प्रकार खुली छूट के संबंध में गांव वालों का कहना था कि एक सत्ताधारी नेता के दबाव के चलते पुलिस प्रशासन ने उक्त प्रत्याशी को खुली छूट दे रखी थी। गांव बली में फायरिंग से पहले गांव दुर्वेशपुर मतदान केंद्र पर भी उक्त प्रत्याशी जमकर हंगामा करके आया था।