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यूपी: मुठभेड़ में पांच शातिर चोर गिरफ्तार, कबाड़ी ने बना रखा था ये खतरनाक गैंग

Thu, 09 May 2019 08:34 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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आरोपियों के बारे में जानकारी देते एएसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के शामली में हुई मुठभेड़ में पुलिस ने पांच शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। यह पांचों चोर किसानों के खेतों और नलकूपों से कृषि यंत्र और अन्य लोहे का सामान चोरी करते थे। कबाड़ (स्क्रैप) की दुकान करने वाला आरोपी युवक इस गैंग का लीडर है। पुलिस ने चोरों के कब्जे से दो तमंचे, तीन चाकू, कारतूस, कृषि यंत्र और मिनी ट्रक बरामद किया है।

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गुरुवार को पुलिस लाइन सभागार में अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार श्रीवास्तव ने प्रेसवार्ता में बताया कि बुधवार रात करीब साढ़े 12 बजे मुखबिर की सूचना पर मेरठ-करनाल हाईवे स्थित टिटौली चौकी पर आदर्श मंडी थाना प्रभारी यज्ञदत्त शर्मा, स्वाट टीम प्रभारी मुनेंद्र सिंह, एसआई सत्यपाल सिंह आदि वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी समय करनाल की तरफ से आए बिना नंबर के मिनी ट्रक को रोकने का प्रयास किया तो उसने सवार लोगों ने पुलिस टीम पर फायर करते हुए भागने की कोशिश की। पुलिस टीम ने पीछा कर मिनी ट्रक को रुकवा लिया और उसमें सवार पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। 

एएसपी ने बताया कि तलाशी के दौरान मिनी ट्रक से कृषि यंत्र (टीलर) बरामद हुआ, जबकि पकड़े गए लोगों के कब्जे से दो तमंचे, दो खोखा कारतूस, चार कारतूस, तीन चाकू बरामद हुए। पकड़े गए आरोपियों के नाम रहीश, आशु व शाहरुख निवासी मोहल्ला छड़ियान कैराना, सिकंदर निवासी गांव गंगेरू थाना कांधला हाल निवासी मोहल्ला छड़ियान कैराना, गुलजार निवासी मोहल्ला दरबार कलां कैराना है।

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एएसपी ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपी शातिर चोर हैं। ये सभी गैंग बनाकर चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। इनका गैंग लीडर रहीश है, जो कैराना में कबाड़ (स्क्रैप) की दुकान करता है। गैंग में शामिल चोर किसानों के नलकूप, खेतों से कृषि यंत्र और अन्य लोहे का सामान चोरी कर बेचते थे। इस गैंग में करीब 15 लोग शामिल है। पूछताछ में गैंग के अन्य सदस्यों के नाम पते मिले है, जिनकी तलाश की जा रही है। 

गैंग लीडर निरक्षर पर शातिर दिमाग
एएसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी रहीश पढ़ा लिखा नहीं है, लेकिन शातिर है। वह चोरी करने का धंधा कई साल से कर रहा था, लेकिन कभी पकड़ में नहीं आया। इसकी वजह यह है कि वह चोरी की वारदात में गैंग के अलग-अलग सदस्यों को यह कहकर भाड़े पर ले जाता था कि उसे जंगल से कृषि यंत्र या लोहे का सामान लाना है। गैंग के सदस्यों को वह मजदूरी के तौर पर 500 से 700 रुपये देता था। कबाड़ी की दुकान होने के कारण लोग उस पर शक नहीं करते थे। पहले वह किराए पर मिनी ट्रक या अन्य वाहन ले जाता था, जिसे खुद चलाता था। कुछ समय पहले उसने अपने नाम से मिनी ट्रक खरीद लिया और उसे चोरी का सामान लाने ले जाने में इस्तेमाल करने लगा था। मिनी ट्रक पर रजिस्ट्रेशन नंबर भी इसलिए नहीं लिखवाया था कि मौके पर अगर कोई देख ले तो वह आसानी से पकड़ में न आ सके।

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