नौचंदी क्षेत्र के एक अस्पताल में दरोगा की शुक्रवार को मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। एक घंटे तक पुलिस को शव भी नहीं उठाने दिया। गुस्साए लोग आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। इंस्पेक्टर द्वारा रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने के आश्वासन पर ही शव मोर्चरी भेजा गया। थाना नौचंदी पर महिला डॉक्टर के खिलाफ इलाज में लापरवाही संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
मूलरूप से उत्तराखंड के उधमसिंह नगर निवासी संजीव चौहान (48) पुत्र जगदीश सिंह का परिवार नौचंदी थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर सेक्टर तीन में रह रहा है। वह मेरठ में ही एंटी करप्शन मेरठ सेक्टर कार्यालय में दरोगा थे। बृहस्पतिवार को उन्हें कमजोरी महसूस होने पर उनके भाईयों ने नौचंदी क्षेत्र के एक अस्पताल में भर्ती करा दिया। परिजनों का आरोप है कि शुक्रवार सुबह डॉक्टरों ने उन्हें जबरन अस्पताल से छुट्टी देते हुए घर भेज दिया, जबकि उनकी हालत ठीक नहीं थी।
परिजन छुट्टी का विरोध कर रहे थे, लेकिन डॉक्टर सही होने की बात कहकर अस्पताल में भर्ती रखने से इंकार करने की बात पर अड़े थे। परिजन दरोगा को घर लेकर पहुंचे तो वहां उनकी फिर से हालत बिगड़ने लगी। करीब 15 मिनट बाद परिजन दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे और उन्हें भर्ती करा दिया। जिसमें चार डॉक्टरों को दिखाने के लिए बुलाया गया।
परिजनों का आरोप है कि जैसे ही महिला डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाया तो संजीव की मौत हो गई। मौत की जानकारी मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरतते हुए इंजेक्शन में ओवरडोज दे दी। जिस कारण दरोगा की मौत हुई है। परिजनों के हंगामे पर आरोपी डॉक्टर मौके से गायब हो गए और पुलिस को बुला लिया। इंस्पेक्टर नौचंदी हरशरण शर्मा अस्पताल पहुंचे तो परिजनों ने आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी न होने तक शव उठने से इंकार कर दिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि महिला डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
यह मौत नहीं हत्या है
दरोगा के छोटे भाई कुलदीप चौहान ने इंस्पेक्टर नौचंदी से कहा कि यह मौत नहीं, बल्कि डॉक्टरों ने हत्या की है। डॉक्टरों की लापरवाही से जान गई है। वह इलाज कराने के लिए दस लाख रुपये भी खर्च कर देते, लेकिन संजीव की मौत से तो परिवार ही टूट गया है।