फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

50 हजारी कुख्यात इकराम गिरफ्तार, पुलिस कस्टडी से हुआ था फरार

Mon, 13 Feb 2017 11:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
विज्ञापन
सदर थाने में पुलिस की गिरफ्त में आराेपी इकराम। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
तीन माह पहले कचहरी से पुलिस कस्टडी से फरार हुए कुख्यात 50 हजार के इनामी इकराम को साथी के साथ रविवार देर रात मेरठ पुलिस ने दिल्ली के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। एएसपी कैंट और सदर बाजार पुलिस ने इकराम की गिरफ्तारी की है। कुख्यात की तलाश में एसटीएफ और क्राइम ब्रांच भी लगी थी। 
विज्ञापन


गांव खिर्वा, सरधना निवासी इकराम पुत्र अमीरुद्दीन अपने गांव के अलावा लिसाड़ीगेट के लक्खीपुरा में भी रहता था। उस पर सरधना और मेरठ में हत्या, रंगदारी, जानलेवा हमले के एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे बताए गए। चार दिसंबर 2010 को इकराम ने नदीम की लिसाड़ी गेट में गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद पुलिस ने इकराम को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। तीन नवंबर 2016 की दोपहर बंदी इकराम और अन्य मुल्जिमों को सिपाही अरविंद और कमर अली एडीजे कोर्ट में पेश कर सेशन हवालात ले जा रहे थे। इस दौरान हथियारों से लैस पांच बदमाशों ने पुलिस पर हमला करते हुए इकराम को कस्टडी से छुड़ा लिया था। हमलावरों ने एक सिपाही पर पिस्टल की बट तो दूसरे सिपाही पर उस्तरे से वार किया था। 

इकराम पर पहले 15 हजार का इनाम था। चार दिन पहले ही यूपी के पुलिस महानिदेशक ने इकराम की गिरफ्तारी पर 50 हजार का इनाम घोषित कर दिया था। रविवार को एएसपी कैंट सिद्धार्थ और इंस्पेक्टर सदर बाजार पंकज पंत ने मुखबिर की सूचना पर इकराम को दिल्ली के एक होटल से दबोच लिया। उसके साथ पकड़ा गया उसके गांव का एक साथी टेंपो चालक बताया गया। दोनों से हथियार भी बरामद किए गए। देर रात तक पुलिस अफसर इकराम से पूछताछ कर रहे थे। सोमवार को पुलिस इसका अधिकारिक खुलासा कर सकती है। इकराम की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस अफसर भी चुप्पी साधे हुए हैं। 
विज्ञापन


पुलिस सूत्रों के अनुसार खिर्वा निवासी इकराम ने कुख्यात ऊधम सिंह के संपर्क में आने के बाद जरायम की दुनिया में कदम रखा था। ऊधम गैंग के शूटर बने इकराम ने रंगदारी के साथ प्रॉपर्टी कब्जाना शुरू कर दिया था। 4 दिसंबर 2010 को इकराम ने अपने साथियों के साथ लक्खीपुरा निवासी नदीम की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। जिसमें इकराम समेत सात लोग जेल गये थे। पुलिस ने बताया कि 2011 में भी इकराम फरार हो गया था। 

हाई सिक्योरिटी बैरक में बनी थी योजना
इकराम ने बताया कि बीती तीन नवंबर को कचहरी में उसे पांच साथियों ने कस्टडी से छुड़ाया था। फरारी से एक माह पहले ही जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में इसकी योजना बन गई थी। इकराम को चार दिन पहले ही इस बैरक में शिफ्ट किया गया था। प्लान था कि उस समय जो भी बहादुरी दिखाने आगे आए, उसे खत्म कर देना। इकराम ने इस दौरान पेशी पर लाए सिपाही से एसएलआर लूटने की कोशिश की थी, लेकिन सिपाही एसएलआर पर लेट गया था। जिसके बाद दोनों सिपाहियों पर हमला किया गया था। लेकिन बाद में आपाधापी में वह एसएलआर छोड़ गए थे। भागने के बाद पहले देहरादून में रहा। उसके बाद दिल्ली में जाकर छिप गया था।

इशारा मोनू जाट का था
शूटर इकराम के खिलाफ सरधना और लिसाड़ीगेट थाने में 15 से ज्यादा संगीन मुकदमे हैं। पुलिस ने बताया कि कुख्यात मोनू जाट के इशारे पर इकराम को पुलिस कस्टडी से भगाया गया था। जांच में सामने आया कि जेल में बंद भरतू नाई और देवेश ने अपने शूटर भेजकर इकराम को पुलिस कस्टडी से छुड़ाया था।

जेल से कचहरी के बीच रैकी
इकराम और उसके साथियों ने जेल में प्लान बनाने के बाद जेल से कचहरी के बीच की पूरी रैकी पुलिस वैन में बैठकर की थी। बंदियों की पेशी पर कचहरी जाती गाड़ी में वह सबसे पीछे की तरफ बैठता था। वैन के पीछे उसके साथी बाइक पर हेलमेट लगाये चलते थे। फरारी वाले दिन कचहरी में पहुंचने पर जब सिपाही उसे लेकर चले थे तो उसके साथियों ने सिपाही पर पिस्टल और तमंचे तान दिए थे।

थाने पर परिजनों का जमावड़ा
इकराम और उसके साथी की गिरफ्तारी का पता चलते ही रात में परिजनों का सदर थाने में जमावड़ा लग गया। एक महिला रात में थाने के बाहर ही बेहोश हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस इकराम को मुठभेड़ में मारना चाहती है। पुलिस अफसरों के सीयूजी फोन पर भी परिजनों ने कॉल की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें