शहर के कुछ रईसजादे बिग बाइट होटल में कैसिनो खेलते पकडे़ गए और पुलिस उन्हें जमानत पर छोड़ दिया। अहम सवाल यह भी हैं कि पुलिस ने बिग बाइट के संचालकों पर इतनी नरमी क्यों बरती और होटल में गैंबलिंग टेबिल (कैसिनो बोर्ड) कहां से और कैसे आया। कसूरवार तो जुआ खेलने और खिलाने वाले दोनों ही हैं। पुलिस लगातार इन सवालों पर पल्ला झाड़ रही है।
शनिवार रात बिग बाइट होटल में छापे के दौरान पकड़ी गई टेबिल पर (विदेश मार्का) यूके की एक गेम कंपनी का डोमेन नेम लिखा हुआ है। माना जा रहा है कि टेबिल वहीं से इंपोर्ट की गई है। टेबिल कैसे आई और कौन लाया? इन तमाम बिंदुओं की जांच बेहद जरूरी है। संभावना यह भी है ऑनलाइन मंगाई गई हो। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह कंपनी गैंबलिंग से संबंधित तमाम उपकरण उपलब्ध कराती है। छापे के दौरान मौके से काफी सामान बरामद कर सील किया गया। लेकिन एक कैसिनो टेबल अभी भी थाने में खुले में पड़ी है।
यूके में बनी मानी जा रही इस टेबिल का मिलना काफी चौंकाने वाला है। जांच का विषय यह भी है कि कितने समय से इस टेबिल का इस्तेमाल किया जा रहा था। कहीं होटल में टेबिल होने की शर्त पर ही तो बुकिंग नहीं की गई थी। इतनी बड़ी पार्टी में चल रहे इंतजाम की खबर संचालकों को क्यों नहीं हुई या फिर उन्होंने ही पार्टी बुक करने वालों को पैकेज उपलब्ध कराया था।
कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि कई बड़े अधिकारी इस मामले की लीपापोती कराने में जुटे हैं। पुलिस की अभी तक की जांच से भी यही लगता है कि वह मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। सीधे तौर पर गैंबलिंग से जुड़ी इस हाईप्रोफाइल पार्टी के दौरान पकड़े गए युवकों को लेकर तो औपचारिकताएं की जा रही हैं। लेकिन गैंबलिंग पार्टी बुक कराने वालों से लेकर होटल संचालकों पर कार्रवाई के नाम पर पुलिस मौन है। पुलिस ने दबाव में आकर बरामद सामान को बिना किसी ठोस जांच पड़ताल के ही सीज कर दिया।
दिल्ली में बड़ी कार्रवाई, मेरठ में लापरवाही
हाल ही में दिल्ली पुलिस ने दक्षिणी दिल्ली इलाके में एक फार्म हाउस पर रेड डालकर जुआ खेल रहे कुछ युवकों को पकड़ा था। मौके से कैसिनो बोर्ड, गैंबलिंग टेबिल, रोलेट मशीन आदि सामान बरामद किया था। पुलिस की जांच में पता चला कि यह सामान ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल से चीन से मंगाए गए थे। जांच के बाद ही पुलिस ने इन्हें सीज किया। वहीं मेरठ में परतापुर पुलिस ने इन तमाम चीजाें की जांच करना भी उचित नहीं समझा। खानापूर्ति करते हुए बिना जांच के ही सामान सीज कर दिया। पुलिस द्वारा 13 जी एक्ट में दर्ज एफआईआर में बरामद चीजों के बारे में अलग से कुछ जिक्र नहीं किया गया है। हो सकता है कि पुलिस द्वारा सीज किए गए अन्य सामान पर भी किसी विदेशी कंपनी का प्रिंट हो।
वेरीफिकेशन ने छुड़ाए पसीने
बिग बाइट में जुआ खेलते पकडे़ गए रईसजादों के वेरीफिकेशन में पुलिस को पसीने छूट रहे हैं। पुलिस ने इनकी आईडी जुटानी शुरू कर दी है। पुलिस के आला अफसरों तक शिकायत पहुंची थी कि जुआ खेलते पकडे़ गए कुछ लोगों ने सेटिंगबाजी कर अपने स्थान पर दूसरों के नाम-पते लिखवा दिए थे। एसएसपी ने परतापुर पुलिस को पकडे़ गए सभी 18 लोगों का वेरीफिकेशन कर इनकी आईडी जमा करने को कहा था। जिस पर मंगलवार को पुलिस दिन भर इसी में उलझी रही। आरोपियों द्वारा थाने में लिखवाए गए नंबरों पर कॉल की गई। कुछ ने खुद को बाहर बताया तो किसी का नंबर ही नहीं लगा। थाने पहुंचे कुछ लोगों का वेरीफिकेशन कर उनकी आईडी जमा कराई गई। इस दौरान कुछ लोगों ने यह कहकर भी हंगामा किया कि पुलिस ने असली आरोपियों का नाम सेटिंग कर निकाल दिया और उन्हें बचाने के लिए ऐसे नाम जोड़े जो मौके पर थे ही नहीं। केस के विवेचक अमर सिंह ने बताया कि अधिकारियों के निर्देश पर वेरीफिकेशन किया जा रहा है। कई लोगों की आईडी जमा करा ली गई है। कुछ लोगों ने व्यापारिक कार्य से बाहर होने की बात कही है। दिवाली की वजह से लोग व्यापारिक कार्य में व्यस्त है। मौके से बरामद कैश और केस के लिए आवश्यक सामान सीज किया गया है। सीज सामान पर कोई ऐसा निशान नहीं था, जिससे लगे कि वह इंपोर्ट की गई हों। बहुत से लोग लोकल आइटम पर भी बाहर के देश के बने होने की मुहर या प्रिंट लगा देते हैं। जांच जारी है।