खंडहर वाली सोतीगंज पुलिस चौकी पर पुलिस का नहीं मानों कबाड़ियों का कब्जा है। इस चौकी में न चौकी इंचार्ज जाता है और न कोई पुलिसकर्मी। बुलेट का चेसिस नंबर बदलने का भंडाफोड़ हो गया है। लेकिन इसे पीछे और भी कई बातें हैं। चौकी में गंदा धंधा चलता है। लेकिन कभी पुलिस अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली। वहीं, पुलिस ने चौकी के विवाद की जानकारी जुटाई है। सोतीगंज पुलिस चौकी आम जनता की नहीं है। क्योंकि यहां पर वर्षों से कोई पुलिसकर्मी नहीं गया है। कबाड़ी भी इसके बारे में अच्छी तरह जानते है। स्थानीय लोग कहते है कि इस चौकी पर सोतीगंज के वाहन माफियाओं का धंधा चलाता है।
बिक गई पुलिस चौकी की जमीन
पुलिस के मुताबिक सोतीगंज पुलिस चौकी की जमीन व्यापारी ने खरीद ली है। लेकिन जमीन पर कब्जा करना चुनौती बना हुआ है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। जिस जमीन पर पुलिस चौकी बनी है, वह सरकारी जमीन नहीं है। इस बात की जानकारी थाना पुलिस को नहीं है। सोमवार को पुलिस ने इसकी रिकॉर्ड खंगाला है। एसओ सदर बाजार विजय कुमार गुप्ता ने बताया है कि पुलिस ने चौकी की जमीन के बारे में जानकारी ली। वह जमीन बिक चुकी है। लेकिन कब्जा करने को लेकर पहले से विवाद चल रहा है।
मैं सोतीगंज नहीं, थापर नगर में बैठता हूं
सोतीगंज चौकी इंचार्ज विक्रम सिंह ने बताया है कि चौकी की हालत खस्ता है। कई बार निर्माण या जीर्णोद्धार कराने का प्रयास किया। लेकिन आपत्ति लग गई। वह सोतीगंज चौकी में कभी नहीं बैठे हैं। वह थापर नगर पुलिस चौकी पर बैठकर सोतीगंज की सारी कार्रवाई करते हैं। इसकी जानकारी पुलिस के अधिकारियों को तक नहीं है।
‘गुनहगार को ढूंढ लो’
सोतीगंज पुलिस चौकी में बुलेट का चेसिस नंबर बदलने की हिम्मत सिपाही प्रदीप और होमगार्ड पवन ने कैसे कबाड़ियों को दे दी। सिपाही जानते थे कि चौकी में कोई जांच करने नहीं आया। स्थानीय लोग कहते कि चौकी में पहले भी ऐसी घिनौनी हरकत कबाड़ी कर चुके है। सवाल उठता है कि आखिर असली गुनहगार कौन, जिसे पुलिस ढूंढ नहीं पा रही।