इस दौरान उन्होंने कहा, यह गली मुझे याद हो गई है। जो एक बार याद कर लेता हूं तो उसे भूलता नहीं हूं। एक- एक आदमी को जेल भेज दूंगा। सुन लिया न। इसके बाद वह फोर्स के साथ चले जाते हैं।
एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि एडीएम सिटी अजय तिवारी और मैं पुलिस फोर्स के साथ जब वहां पहुंचे तो कुछ उपद्रवी पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगा रहे थे। मैंने इतना कहा कि अगर पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगा रहे हो तो फिर वहीं चले जाओ। इसके अलावा कुछ नहीं कहा।
एडीजी प्रशांत कुमार कहना है कि अगर स्थिति सामान्य होती तो शायद शब्दों का चुनाव बेहतर हो सकता था, लेकिन उस दिन स्थिति बेहद अस्थिर थी। उन्होंने कहा हमारे अधिकारियों ने बहुत संयम दिखाया, पुलिस द्वारा कोई गोलीबारी नहीं हुई।
उल्लेखनीय है कि नागरिकता संसोधन कानून के विरोध में मेरठ में 20 दिसंबर को भारी बवाल हुआ था। मेरठ में गोली लगने से पांच युवकों की मौत हो गई थी। उपद्रवियों ने पुलिस की दो दर्जन से ज्यादा गाड़ियों को फूंक दिया था। जमकर पथराव और फायरिंग की गई। जवाबी कार्रवाई में पांच उपद्रवियों की गोली लगने से मौत हो गई थी, जबकि तीन-चार उपद्रवी गोली लगने से घायल हुए थे। इसके साथ ही तीन सिपाहियों को भी गोली लगी थी। पथराव में डीएम, एसएसपी, एसपी सिटी और एडीएम सिटी समेत कई पुलिसकर्मी चोटिल हो गए थे।
मेरठ में उपद्रव होने का इनपुट था। जुमे की नमाज को देखते हाई अलर्ट घोषित किया गया था। दोपहर करीब दो बजे कोतवाली स्थित जामा मस्जिद से नमाज के बाद लोगों की भीड़ सीएए के विरोध में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करते हुए बाहर निकली। पुलिस फोर्स ने उनको रोकने की कोशिश की तो भीड़ ने नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ दिया था। उसके बाद 15-20 उपद्रवी लिसाड़ीगेट चौराहे पर पहुंचकर हंगामा करने लगे। भीड़ बढ़ती गई। जिसके बाद उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव और फायरिंग करनी शुरू कर दी थी।
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