मेरठ। फर्जी मार्कशीट के दलालों के हाथ कितने लंबे है, इसका अंदाजा यूपी और सीबीएसई बोर्ड के बरामद गजट से लगाया जा सकता है। बोर्ड से यूनिवर्सिटी तक दलालों का नेटवर्क फैला हुआ है। अंदेशा है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में दाखिलों में भी काफी संख्या में छात्र फर्जी मार्कशीट लगाते हैं। पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का सरगना रूप सिंह वर्मा अभी फरार है। लेकिन पुलिस ने इसकी जांच करनी शुरू कर दी। जिसमें फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गैंग का नेटवर्क बोर्ड से कॉलेज और यूनिवर्सिटी तक फैला बताया गया। पुलिस का कहना है कि यूपी, सीबीएसई बोर्ड और यूनिवर्सिटी में जांच की जाएगी। पुलिस की जांच में सामने आया कि सरकारी विभाग में तैनात कर्मचारियों से इस गिरोह की सेटिंग थी। जोकि उनको गजट उपलब्ध कराते थे। जिसके बाद वह फर्जी मार्कशीट बनाकर लोगों को देते थे। हाईस्कूल, इंटर व स्नातक की फर्जी मार्कशीट देते थे। अब तक कई लोगों को यह फर्जी मार्कशीट दे चुके हैं। सवाल उठता कि इस फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वालों पर पुलिस कैसे कार्रवाई करेगी।
फर्जी मार्कशीट न बनवाएं
एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि फर्जी मार्कशीट बनवाने वालों के साथ इनको खरीदने वालों पर भी पुलिस कार्रवाई करेगी। किसी भी वेरिफिकेशन में कोई फर्जी मार्कशीट पकड़ी गई तो उसके खिलाफ भी मुकदमा पंजीकृत होगा और उसको पुलिस जेल भेजेगी। पुलिस का कहना कि अभिभावकों की भी जिम्मेदारी बनती है वो भी अपने बच्चे पर ध्यान रखे। उसके भविष्य से खिलवाड़ न करें।
खुलेगी कई पोल, दबिश जारी
इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा दीपक शर्मा का कहना है कि जांच में कई सरकारी संस्थानों की पोल खुलेगी। गाजियाबाद में मुख्य आरोपी रूपसिंह वर्मा की तलाश में पुलिस ने शुक्रवार को भी दबिश दी, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों का यह नेटवर्क देहात इलाके में ज्यादा फैला है। पुलिस ने बृहस्पतिवार देर रात पकड़े दोनों युवकों से पूछताछ की है। दोनों आरोपी मवाना के निवासी है। अभी पूछताछ जारी है।
खास बातें:
- यूनिवर्सिटी के दाखिले में तो नहीं लगी फर्जी मार्कशीट
- फर्जी मार्कशीट की पहले भी हो चुकी है कई शिकायतें