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दुर्दांत का अंत

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दहशत का अंत
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सहारनपुर। । रात के अंधेरे में अचानक ग्राम इब्राहिमपुरा के जंगल में पुलिस ही पुलिस नजर आने लगी और देखते ही देखते क्षेत्र गोलियों की आवाज से गूंज उठा। पुलिस और बदमाशों के बीच लगभग 25 राउंड फायरिंग हुईं। इनमें से 16 राउंड फायरिंग पुलिस ने की जबकि शेष फायरिंग बदमाशों ने की। ओमपाल और विक्की के मुठभेड़ में मारने जाने से जुर्म के अध्याय का अंत हो गया। सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर जिलों में इनके गैंग का जबरदस्त आतंक था। छोटी फिरौतियों के लिए अपहरण करते थे और रकम न मिलती देख अपह्त को मार देते थे। डेढ़ माह में ही सहारनपुर में लूट, अपहरण, फिरौती की कई घटनाओं को अंजाम दिया था। बड़गांव क्षेत्र में स्कूल संचालक सुभाष राणा एवं हाफिज उस्मान की अपहरण के बाद हत्या कर पुलिस को भी हिला दिया था। इसके बाद इन पर इनाम की राशि बढ़ते हुए पचास हजार तक पहुंच गई थी।
ग्राम इब्राहिमपुरा के जंगल में पुलिस मुठभेड़ में मारे गये पचास हजार के इनामी ओमपाल सैनी और सुमित उर्फ विक्की सहारनपुर व शामली पुलिस के लिए चुनौती बने थे।
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शामली के टॉप टेन अपराधियों की सूची में शामिल और थाना भवन के हिस्ट्रीशीटर ओमपाल के गैंग ने दो अगस्त की रात बड़गांव के स्कूल संचालक सुभाष राणा का अपहरण कर लिया था। उसके घर फोन करके दो लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। पुलिस के सक्रिय होने पर उनकी हत्या कर फरार हो गए थे।
करीब एक पखवाड़ा पूर्व ही सरसावा के ग्राम काजीपुरा से 28 अगस्त को एक युवक से बाइक, मोबाइल और नकदी लूट की घटना को अंजाम दिया था। उसके अगले ही दिन 29 सितंबर को तड़के ग्राम पिलखनी के पास रेडीमेड गारमेंट के एक व्यापारी का अपहरण कर मोबाइल, नगदी एवं लूट की और उसे बंधक बनाकर खेत में फेंक दिया था। इसी रात यमुनानगर से लौट रहे हाफिज उस्मान व अरशद का अपहरण कर पांच-पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। फिरौती की मांग पूरी न होते देख उसी रात हाफिज उस्मान की हत्या कर दी थी और अरशद को घायल कर फरार हो गये थे।
इस घटना से पूर्व ओमपालएवं विक्की ने 30 जुलाई को थाना सरसावा क्षेत्र से दो मोटर साइकिलें लूटीं थीं।
ओमपाल और विक्की को पुलिस जिले ही नहीं प्रदेश से बाहर भाग जाने की बात करती रही। लेकिन उन्होंने 13 सितंबर को ही शामली के ग्राम मिमला निवासी अमित का रेलवे अंडरपास से अपहरण कर लिया था और उससे लूटपाट की थी। अगले ही दिन 14 सितंबर को थानाभवन में जॉनी कुमार की मोटरसाइकिल लूट ली थी। पुलिस के अनुसार मृतक ओमपाल और विक्की के पास से रविवार को मुठभेड़ के बाद जो मोटरसाइकिल बरामद हुई है वह जॉनी कुमार से ही लूटी गई थी।
- 2002 में पहला मामला दर्ज हुआ था ओमपाल पर
पुलिस रिकार्ड के अनुसार ओमपाल सैनी के खिलाफ पहला अभियोग थाना मिर्जापुर सहारनपुर में 2002 में दर्ज हुआ था। ओमपाल को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया लेकिन जैसे ही जेल से बाहर आया फिर से अपराध की दुनिया में उतर गया। ओमपाल ने 15 साल की उम्र में ही अपने एक ही परिवार के एक व्यक्ति की हत्या भी की थी। लेकिन उसका मामला ही दर्ज नहीं हो सका था।
- हत्या, लूट, अपहरण समेत 33 मामले दर्ज हैं ओमपाल पर
ओमपाल पर शामली और सहारनपुर जिले में अपहरण, हत्या, लूट, हत्या का प्रयास, बलवा, फिरौती, चोरी, आर्म्स एक्ट, मारपीट की धाराओं में कुल 33 मामले अब तक दर्ज हैं। थाना मिर्जापुर, शामली, चिलकाना, नानौता, बेहट, सरसावा और थाना भवन में लूट के कुल सात मामले दर्ज किए गए। थाना कांधला, बेहट, सरसावा, बड़गांव में अपहरण के चार मुकदमे दर्ज हुए। इसमें सरसावा और बड़गांव में अपहरण के दौरान इसने हत्याएं भी की। पुलिस मुठभेड़ और जानलेवा हमले के थाना मिर्जापुर में दो व थानाभवन में तीन मुकदमे दर्ज हैं। डकैती के दौरान जानलेवा हमले के नानौता चिलकाना नकुड़ थानाभवन में भी कई मुकदमे दर्ज हैं। नकुड़ में वाहन चोरी का भी मुकदमा दर्ज हुआ। थाना भवन में बलवे के दौरान हत्या की थी। थानाभवन, मिर्जापुर, चिलकाना, गढ़ी पुख्ता थाने में गैंगस्टर के मामले दर्ज हैं।
सुमित उर्फ विक्की पर 18 मामले दर्ज हैं
पुलिस रिकार्ड के अनुसार विक्की पर पहला मामला 2008 में थानाभवन थाने में हत्या के प्रयास का दर्ज हुआ था। विक्की पर थानाभवन में बलवा और जानलेवा हमले के दो मुकदमे दर्ज किए गए। कांधला, बेहट, सरसावा, बड़गांव में अपहरण और सरसावा एवं बड़गांव में अपहरण के दौरान हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। गढ़ी पुख्ता, बेहट, सरसावा, थानाभवन में डकैती और लूट के मामले दर्ज हैं। गढ़ी पुख्ता और थाना भवन में गैंगस्टर भी लगी। थाना भवन में आर्म एक्ट के दो मुकदमे दर्ज हुए। वहीं विद्युत अधिनियम का एक मामला, तीन गुंडा एक्ट और 110 जी की भी कार्रवाई की गई। मृतक ओमपाल और विक्की दोनों को थाना बेहट से दस साल की और थाना गढ़ीपुख्ता से दो साल की सजा हुई थी।

- पहले भी हो चुकी है मुठभेड़
पुलिस के अनुसार ओमपाल के साथ नकुड़ में पुलिस के साथ एक साल पूर्व ही 25 सितंबर 2017 को मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में ओमपाल के अलावा दरोगा अजय प्रसाद गौड़ गोली लगने से घायल हो गए थे।
- रंगदारी मांगने का भी मामला आया सामने
पचास हजार के इनामी ओमपाल और विक्की ने रंगदारी भी मांगनी शुरू कर दी थी। एक सप्ताह पूर्व ही देवबंद के एक स्कूल संचालक समेत कई लोगों को रंगदारी के लिए पत्र भेजे गए थे। उसने रंगदारी न देने पर परिवार समेत हत्या किए जाने की धमकी भी दी थी।
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ऐसे ढेर हुए दोनों बदमाश
पुलिस के अनुसार ओमपाल और विक्की ने अपने साथियों के साथ ग्राम सोराना निवासी खनन ठेकेदार उमेश और ट्रक चालक तुलसी का अपहरण कर लिया था। उमेश के घर फोन करके पांच लाख की रंगदारी मांगी गई थी। पुलिस के अनुसार रात दो बजे परिजनों ने सूचना दी और पुलिस ने कुछ ही देर में मोबाइल से बदमाशों को ट्रैस कर खेतों की घेराबंदी कर ली। पुलिस मुठभेड़ हुई तो सिर्फ ओमपाल और विक्की ही मारे गए। लेकिन अन्य साथियों का कोई पता नहीं चला। पुलिस के अनुसार सभी खेतों को छान मारा। लेकिन कोई अन्य हाथ नहीं आया। आसपास के लोगों का कहना है कि क्या सिर्फ विक्की और ओमपाल ने ही दोनों का अपहरण कर लिया था। यदि साथी बदमाश उनके साथ थे तो क्या वे ओमपाल और विक्की को छोड़कर भाग जाते।
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