भरतू नाई के नाम से रंगदारी मांगने वाले गिरफ्तार
नया ट्रैक्टर खरीदने के लिए दोनों दोस्तों ने बनाया था प्लान,
आरोपी बोले- भरतू नाई नाम से खौफ खाते हैं रोहटा के व्यापारी
एक साल पहले हाथरस के युवक के खोए मोबाइल से मांगी थी रंगदारी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
पचास हजार के इनामी रहे कुख्यात भरतू नाई के नाम से दो व्यापारियों से पांच पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगने की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। भरतू नाई के गांव के ही दो युवकों ने एक साल पहले खोए हुए मोबाइल फोन से रंगदारी मांगी। रंगदारी न देने पर दोनों व्यापारियों को हत्या की धमकी भी दी थी। मोबाइल की सीडीआर के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस लाइन में एसएसपी नितिन तिवारी ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि 15 मार्च को रोहटा के खाद व्यापारी सुमित गोयल को फोन कर पांच लाख की रंगदारी मांगी गई थी। बाद में चिट्ठी भी भेजी गई। आरोपी ने फोन पर बताया कि वह जेल से भरतू नाई बोल रहा है। पीड़ित व्यापारी ने रोहटा थाने में इसका मुकदमा दर्ज कराया। दो दिन बाद खाद व्यापारी हर्ष गोयल निवासी ख्वाजपुर मजरा से भी फोन पर पांच लाख की रंगदारी मांगी गई। दोनों व्यापारियों की सुरक्षा में एक एक सिपाही दिया गया। खुलासे के लिए सर्विलांस टीम और एसओ रोहटा को लगाया गया। सीओ सरधना पंकज सिंह और एसओ रोहटा धनवीर यादव ने साइबर सेल टीम के साथ दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गये आरोपी मोनू पुत्र सुभाष और आकाश पुत्र सुंदरपाल निवासी रोहटा हैं। दोनों के पास से दो तमंचे, रंगदारी मांगने में प्रयुक्त सिम और पांच कारतूस बरामद किए हैं।
भरतू नाई का है बड़ा खौफ
गिरफ्तार मोनू दसवीं पास है, जबकि आकाश आठवीं पास है। दोनों ही भरतू नाई के पड़ोसी हैं। मोनू ने बताया कि कई माह पहले आकाश ने कहा कि उसे ट्रैक्टर लेना है। उसके बाद भरतू नाई के नाम से रंगदारी मांगने की प्लानिंग की। भरतू पूर्वांचल की जेल में बंद है। उस पर 50 हजार का इनाम भी रहा है। व्यापारियों में आज भी उसका खौफ है। रंगदारी मांगने के लिए दोनों जंगल में जाकर कॉल करते थे। दोनों ने बताया कि यदि पैसा मिल जाता तो ट्रैक्टर खरीदने के साथ अन्य खर्चा भी करते।
हाथरस के विशाल का खोया था मोबाइल
एसओ रोहटा ने बताया कि हाथरस निवासी विशाल पुत्र शिवचरण का एक साल पहले मेरठ में मोबाइल खो गया था। यह मोबाइल आकाश को मिला था। पीड़ित ने अपना सिम बंद नहीं कराया था। विशाल ने उसी सिम से कॉल की थी। कुछ दिन पहले सिम को दूसरे फोन में डाल लिया था। विशाल ने उससे मोनू के मोबाइल पर मिस्ड काल की थी। यहीं से दोनों फंसते चले गए। दोनों नंबरों की लोकेशन एक साथ आती थी। रंगदारी के बाद फोन बंद कर लेते थे। पुलिस ने आईडी के आधार पर विशाल का पता निकाला तो उसने बताया कि उसका फोन खो गया था, लेकिन सिम को बंद नहीं कराया था।