बालगृह की शुरू हुई जांच पर उठे सवाल
मेरठ। राजकीय बाल सुधार गृह में बालक के साथ हुए कुकर्म की जांच शुरू हो गई है, लेकिन जांच पर सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं। एक तरफ जहां पूर्व के मामलों में हुई जांच में आज तक कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं इस जांच के दौरान लापरवाही के दोषी डीपीओ का लगातार जांच कमेटी के साथ मौजूद रहना जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।
राजकीय बाल सुधार गृह में अव्यवस्था, बवाल और यौन शोषण जैसे मामले पहले भी उठते रहे हैं। यह बात अलग है कि यौन शोषण का मामला पहली बार खुलकर सामने आया है। लेकिन अव्यवस्थाओं को लेकर कई बार जांच हो चुकी है और हर बार जांच ठंडे बस्ते में जाती रही। बाल सुधार गृह का पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचार की नींव पर धरा है। बाल सुधार गृह के भूतल पर बालक तो प्रथम तल पर किशोर रखे जाते थे। यहां पर किशोरों द्वारा लगातार बवाल होते रहे, जबकि बालकों के शोषण के मामले भी सामने आते रहे। इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण खाना न देना, बालकों की मूलभूत सुविधाओं, स्वच्छता आदि का ध्यान रखना और उनसे बाल सुधार गृह में काम कराना आदि की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं। इन सभी मामलों पर जांच कई बार स्थानीय स्तर तो शासन स्तर पर भी जांच हो चुकी हैं। लेकिन हर बार जांच रिपोर्ट दबा दी गई और कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शासन से आने वाले अनुदान की भी बंदरबांट
बाल सुधार गृह की व्यवस्था के लिए विभाग से धनराशि आवंटित होती है। लेकिन विभागीय अधिकारी और कर्मचारी इस धन की बंदरबांट करते हुए बालकों का हर तरह से शोषण करते हैं। उनके लिए खेलकूद का सामान उपलब्ध कराना तो दूर भोजन की भी उचित व्यवस्था यहां नहीं होती है। यही नहीं संविदा पर रखे जाने वाले कर्मचारियों से भी उगाही के चलते उनका लगातार नवीनीकरण किया जाता रहा है। कुकर्म का आरोपी जावेद भी यहां लगातार छह साल से कार्यरत था। जबकि उसकी कई बार बालक शिकायत कर चुके थे। लेकिन प्रभारी अधीक्षक से साठगांठ के चलते जावेद की संविदा का लगातार नवीनीकरण होता रहा।
डीपीओ को जांच में क्यों रखा जा रहा साथ
इस समय बाल सुधार गृह की जांच दो स्तर पर चल रही है। एक तरफ जहां डिप्टी चीफ प्रोबेशन अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह जांच कर रहे हैं, तो शासन स्तर से डिप्टी डायरेक्टर बिजेंद्र निरंजन आए हुए हैं। इन दोनों अधिकारियों के साथ इस पूरे मामले को दबाने वाले डीपीओ श्रवण कुमार गुप्ता का लगातार साथ बने रहना सभी को चौंका रहा है। जबकि जिलाधिकारी अनिल ढींगरा डीपीओ के खिलाफ घोर लापरवाही की बात कहते हुए विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर चुके हैं। ऐसे में इस जांच को लेकर सवाल उठ रहा है।
बालकों पर बनाया गया दबाव
विभागीय सूत्रों की मानें तो घटना के बाद बाल सुधार गृह की आंतरिक व्यवस्था सुधारने के साथ ही जांच को देखते हुए बालकों पर भी पक्ष में बयान देने के लिए दबाव बनाया गया है। जांच अधिकारी भी डीपीओ और पुराने कर्मचारियों को साथ लेकर ही बयान ले रहे हैं।