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रमाला चीनी मिल की सीबीआई जांच-BAGHPAT

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शुगर फेडरेशन के पूर्व एमडी बीके यादव के घोटालों की होगी सीबीआई जांच
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लखनऊ/ बागपत । उत्तर सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड (यूपी शुगर फेडरेशन) में करीब साढ़े तीन साल तक प्रतिनियुक्ति पर प्रबंध निदेशक के रूप में तैनात रहे डॉ. बीके यादव के कार्यकाल की सीबीआई जांच कराई जाएगी। शुरुआती जांच में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर प्रमुख सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग संजय आर भूसरेड्डी ने यादव के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की है। जिन शिकायतों पर जांच के आदेश दिए हैं, इनमें सहकारी क्षेत्र की रमाला चीनी मिल में गबन का बिंदु भी शामिल हैं। मेडिकल भत्तों के दुरुपयोग, धुरिया मिल से खरीद और रिकवरी समेत कई बिंदुओं पर जिला स्तर पर हुई जांच में हेराफेरी पकड़ी गई थी।
डॉ. बीकेयादव ने सपा सरकार में उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ लखनऊ में प्रतिनियुक्ति पर ज्वाइन किया था। 18 दिसंबर 2013 को उन्हें चीनी मिल्स संघ का निदेशक बनाया गया था। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद 23 मई 2017 को वे केंद्र सरकार में वापस चले गए। इस समय वे भारत सरकार में सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग में निदेशक के पद पर तैनात हैं। शुगर फेडरेशन में एमडी रहते उनके विरुद्ध गंभीर अनियमितताओं और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें मिली थीं। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेश राणा के अनुरोध पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीकेयादव के खिलाफ आरोपों की जांच मंडलायुक्त लखनऊ अनिल गर्ग को सौंपी थी। संजय आर भूसरेड्डी ने बताया कि मंडलायुक्त ने डॉ. बीके यादव के खिलाफ किसी निष्पक्ष एजेंसी से विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बीके यादव के खिलाफ सीबीआई जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
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शुरुआती जांच में नियुक्तियों में
घोटाले, धन उगाही की पुष्टि
भूसरेड्डी ने बताया कि लखनऊ के मंडलायुक्त अनिल गर्ग की जांच में पुष्टि हुई है कि बीके यादव ने सहकारी चीनी मिलों और फेडरेशन मुख्यालय में अधिकारियों, कर्मचारियों की नियम विरुद्ध नियुक्तियां करके घोटाला किया। पदोन्नतियों एवं स्थानांतरण में धन उगाही की। कार्मिकों का उत्पीड़न किया, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयों, लीव एनकैशमेंट व ग्रेच्युटी भुगतान में धन की वसूली की। जूनियर अधिकारियों को प्रभारी के रूप में नियुक्त कर उच्च पदों का कार्यभार देकर काम कराया। उन पर सहकारी चीनी मिलों के विस्तारीकरण, आधुनिकीकरण और सामान खरीदने में भ्रष्टाचार करने एवं रमाला चीनी मिल बागपत में गबन करने के आरोप हैं।

शीरा, चीनी बेचने वाले को दे दी पदोन्नति
मंडलायुक्त की जांच में सामने आया है कि अन्य चीनी मिलों को अवैध रूप से शीरा एवं चीनी बेचने के आरोप में उप मुख्य रसायनविद् चेतन शर्मा के प्रकरण का डॉ. बीके यादव ने बिना किसी दंड के निस्तारण ही नहीं किया, बल्कि उन्हें पदोन्नति भी दी। मंडलायुक्त ने तमाम आरोपों में यादव को प्रथमदृष्टया दोषी पाते हुए किसी अन्य निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की संस्तुति की है।

सीबीआई जांच से खुलेंगी रमाला चीनी में गड़बड़ी की परतें
बागपत। यूपी सरकार ने सहकारी चीनी मिल संघ के पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ. बीके यादव के खिलाफ जिन शिकायतों पर जांच के आदेश दिए हैं, इनमें सहकारी क्षेत्र की रमाला चीनी मिल में गबन का बिंदु भी शामिल हैं। मेडिकल भत्तों के दुरुपयोग, धुरिया मिल से खरीद और रिकवरी समेत कई बिंदुओं पर शिकायत की । जिला स्तर पर हुई जांच में कई बिंदुओं पर पहले ही हेराफेरी पकड़ी गई ।
संघ के प्रबंधक निदेशक रहे डॉ. बीके यादव के खिलाफ भगवानपुर नांगल के पूर्व डायरेक्टर राम पाल सिंह, भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तोमर समेत अन्य कई लोगों ने गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा से शिकायतें की थी, जिनकी जांच जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार,ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक रमाला और सहकारी गन्ना विकास समिति मलकपुर के सचिव ने की और इसी साल पांच जुलाई को जांच रिपोर्ट दी। इसमें सेवानिवृत्ति लेखाधिकारी रूपचंद को दोबारा नौकरी पर रखने के प्रकरण में नियमों का पालन नहीं किया। डीसीओ सुशील कुमार ने कहा भाकियू की शिकायत पर तीन सदस्यीय टीम ने जांच की। मेडिकल बिल समेत अन्य बिंदुओं में हेराफेरी प्रतीत हुई।

ये हैं मामले, जिनकी हुई जांच
-मिल के उप मुख्य रसायनविद जीएस छोकर, रसायनविद एमपी चौधरी आरके त्रिपाठी, कांटा फीटर अब्दुल सलीम, वायरमैन शीशपाल, किरण पाल और गन्ना पर्यवेक्षक अजीत सिंह के मेडिकल बिलों की जांच अभी चल रही है।
- वायरमैन के बेटे को गोली मारकर घायल करने के मामले में 22 जनवरी 2015 और 31 मार्च 2015 को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की। दो लाख से ऊपर के भुगतान में मंडलीय संयुक्त निदेशक चिकित्सा की हस्ताक्षरित प्रति जरूरी है, लेकिन यहां पर सीएमएस बागपत से प्रतिहस्ताक्षरित कराकर ही भुगतान कर दिया ।
-रमाला चीनी मिल के लिए गोरखपुर की धुरियापार चीनी मिल बंद हो गई थी, इससे भी कुछ सामान रमाला चीनी मिल के लिए खरीदा गया। ट्रांसपोर्ट, लेबर और परचेज बिलों में गड़बड़ की शिकायत की गई थी।
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रिकवरी प्रकरण की भी होगी जांच
बागपत। भगवानपुर नांगल निवासी पूर्व डायरेक्टर राम पाल सिंह का कहना है कि रमाला मिल में लंबे समय से गड़बड़ी चल रही है, इसके खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई। वर्ष 2015-16 की बैलेंस सीट के करीब एक करोड़ रुपये के बाउचर रिकॉर्ड में नहीं मिले। इसके अलावा 12 साल तक मिल नहीं पहुंचने वाले कर्मचारी चतर सैन गुप्ता को नियम विरुद्ध दोबारा रखकर उसको पूरा भुगतान किया गया।
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