मेरठ। घंटाघर क्षेत्र मेें बिना लाइसेंस चल रही दुकानों पर सील लगाने के बाद अब एफडीए के अफसर ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर करने की तैयारी में है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा है कि बिना लाइसेंस मीट की बिक्री अवैध है। उधर सील खुलवाने के लिए मीट व्यापारी और कुछ नेता थाने पहुंचे। लेकिन पुलिस ने उन्हें लौट दिया।
बुधवार को पुलिस-प्रशासनिक और एफडीए के अफसरों ने घंटाघर क्षेत्र में चल रही मीट की दुकानों पर छापामारी की थी। एफडीए ने बिना लाइसेंस चल रही चार दुकानों को सील कर दिया था। इसे लेकर खूब बखेड़ा हुआ था। दुकानदारों ने सील खुलवाने का खूब दबाव बनाया। लेकिन सील नहीं खोली गई।
बृहस्पतिवार को भी काफी संख्या में दुकानदार और उनके समर्थक व्यापारी नेता देहली गेट थाने पहुंचे। एसओ से कहा कि उन्होंने लाइसेंस के लिए आवेदन किया हुआ है। यदि लाइसेंस नहीं बना तो इसमें दुकानदारों की कोई गलती नहीं है। एसओ देहली गेट विजय गुप्ता ने कहा कि बिना लाइसेंस मीट की बिक्री गलत है। दुकानों पर सील एफडीए ने लगवाई है, उनके स्तर से ही इसमें कार्रवाई हो रही है। पुलिस ने उन्हें वापस भेज दिया।
उधर मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सर्वेश मिश्रा ने बताया कि तमाम जांच प्रक्रियाओं के बाद लाइसेंस दिया जाता है। जब तक लाइसेंस जारी नही हो जाता, जब तक बिक्री करना अवैध है। उन्होंने बताया कि बिना लाइसेंस मीट बेचने वालों पर अभिहित अधिकारी की अनुमति के बाद न्याय निर्णय अधिकारी की कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा।
सीएम के दौरे को लेकर सख्त हैं अफसर
सूत्रों के अनुसार खुले में मीट की बिक्री को लेकर खुद मुख्यमंत्री सख्त हैं। 18 नवंबर को ही वे मेरठ आ रहे हैं। इस दौरान यदि भाजपाइयों ने उनके समक्ष ये मामला उठा दिया तो अफसरों के लिए मुश्किल हो सकती है। इसलिए कोई भी अफसर जोखिम लेने के मूड में नहीं है। इसी वजह से तमाम दबावों के बावजूद सील नहीं खोली गई।
खास बात
- दुकानों की सील खुलवाने पहुंचे मीट दुकानदारों को थाने से लौटाया
- न्याय निर्णय अधिकारी के यहां वाद दायर करेंगे एफडीए अफसर