मेरठ। वेस्ट यूपी में रिमोट से बिजली चोरी कर विद्युत विभाग को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले गिरोह का सोमवार को पर्दाफाश हो गया। ये गिरोह मीटर में डिवाइस लगाकर बिजली चोरी करता था। पुलिस ने दो आरोपी गिरफ्तार कर इलेक्ट्रानिक डिवाइस और रिमोट बरामद किए हैं। 400 रुपये की यह डिवाइस दो हजार रुपये में घरों में लगाते थे, जिससे बिजली चोरी होती थी।
एडीजी जोन प्रशांत कुमार, एसएसपी राजेश कुमार और एएसपी सतपाल सिंह ने सोमवार को पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता की। जिसमें मीटर में डिवाइस लगाकर बिजली चोरी करने वाले गैंग के दोनों आरोपी साजिद पुत्र सगीर निवासी शाहपीर गेट कोतवाली व संजय रस्तौगी (डिवाइस बेचने वाला दुकानदार) पुत्र एमपी रस्तौगी निवासी 137/7 बी शास्त्रीनगर को मीडिया के सामने पेश किया। एडीजी ने बताया है कि प्रमुख सचिव ऊर्जा ने पुलिस महकमे को पत्र जारी किया था। जिसमें बताया गया कि रिमोट से बिजली चोरी करने वाला गिरोह मेरठ में एक्टिव है। जो मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, सहारनपुर समेत कई जिलों के घरों में डिवाइस लगा चुका है। जिससे बिजली विभाग को करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है।
जिस पर एएसपी सतपाल सिंह के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच प्रभारी जयवीर सिंह व इंस्पेक्टर सदर बाजार प्रशांत कपिल की टीम को लगाया गया। जिन्होंने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर मीटर में लगने वाली 43 डिवाइस और बिजली को कंट्रोल करने वाले रिमोट बरामद किए। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि यह डिवाइस 400 रुपये में प्रह्लाद नगर लिसाड़ीगेट में संजय इलेक्ट्रॉनिक्स नाम की दुकान पर मिलती है। आरोपी संजय ने बताया कि वह भगीरथ मार्केट दिल्ली से 250 रुपये में इस डिवाइस को खरीदता था। डिवाइस को घरों में 2-3 हजार रुपये में लगाते हैं। रिमोट से यह डिवाइस कंट्रोल होती है।
कई जिलों में फैला नेटवर्क
प्रेसवार्ता में एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि कई जिलों में इस गिरोह का नेटवर्क फैला हुआ है। घरों में डिवाइस लगाकर बिजली चोरी कराने का ठेका तक दिया जाता है। यह गिरोह बिजलीघर के आसपास रहता है। बिजली का बिल जमा करने आए उपभोक्ताओं को मीटर में डिवाइस लगाने की सलाह दे देते है। इसकी शिकायत लगातार पुलिस को मिल रही थी।
करोड़ों का लगा था फटका
प्रेसवार्ता में मौजूद एसपी विजिलेंस अरविंद पांडेय ने बताया कि बिजली ज्यादा खर्च होने के बावजूद बिल कम आने की शिकायतें काफी दिनों से कई कॉलोनियों से मिल रही थीं। बिल देने वाले या मीटर चेक करने वाले भी इस गिरोह तक नहीं पहुंच पा रहे थे। रिमोट से यह गिरोह बिजली चोरी कर करोड़ों का फटका विभाग को लगा चुका है।
ऐसे काम करती डिवाइस
इस डिवाइस को केडसू एम डिजिटल वायरलेस रिमोट कंट्रोलर कहां जाता है। मीटर के अंदर सील वाले तार को काटकर इस डिवाइस को फिट किया जाता है। यह डिवाइस मोबाइल की चिप जैसी होती है। इस डिवाइस को कंट्रोल रिमोट करता है। जिससे मीटर बंद हो जाता और बिजली का संचालन जारी रहता है। रिमोट फिर से दबाने पर डिवाइस की पिन हट जाती और मीटर चलने लगता है।
खास बातें:
- मीटर में डिवाइस लगाकर करोड़ों की बिजली कर चुके चोरी
- दो आरोपी गिरफ्तार, डिवाइस व रिमोट बरामद