मेरठ। बुधवार रात शहर के अंदर दिल्ली रोड पर 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से दौड़े कंटेनर ने ट्रैफिक पुलिस के दावों की कलई खोलकर रख दी है। सड़क सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली ट्रैफिक पुलिस रफ्तार के कहर को रोकने के लिए कभी भी एहतियाती कदम नहीं उठाती। विभागीय आंकड़ों की ही बात करें तो उसे अगस्त माह में महानगर में एक भी वाहन ओवरस्पीड नहीं मिला। यानी शहर में वाहन कछुआ गति से चल रहे हैं।
रात को घर बैठ जाती है ट्रैफिक पुलिस
दरअसल शहर के अंदर और हाईवे पर हादसे रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस कभी जागी ही नहीं। यह बात भी आपको हैरान करेगी कि ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी अपवाद को छोड़ दें तो दिन में ही रहती है। शाम को बेगमपुल चौराहे पर भले ही ट्रैफिक पुलिस दिख जाए, उसके बाद रात को शहर में कहीं भी ट्रैफिक पुलिस नहीं मिलेगी। जबकि इस शहर में रात को ही भारी वाहन अंधाधुंध दौड़ते हैं। वैसे भी रात 10 बजे नो एंट्री भी खत्म हो जाती है।
रात को बन जाती है रेसिंग रोड
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार एक्सप्रेस वे पर अधिकतम स्पीड 100 किमी प्रतिघंटा, हाईवे पर अधिकतम स्पीड 80 किमी प्रतिघंटा, शहर में हल्के वाहनों की अधिकतम स्पीड 30 किमी प्रतिघंटा और शहर के अंदर भारी वाहनों की अधिकतम स्पीड 20 किमी प्रतिघंटा निर्धारित है। लेकिन ट्रक, कैंटर, कंटेनर के अलावा रोडवेज बसों के चालकों के लिए शहर के अंदर दिल्ली रोड रात को रेसिंग रोड बन जाती है। अगर आप खुद सजग हैं तो ठीक है। नहीं तो कब भारी वाहन आपको कुचल जाए कोई गारंटी नहीं। ट्रैफिक पुलिस कभी भी रात को सड़कों पर उतरकर वाहनों की स्पीड चेक नहीं करती। जबकि ट्रैफिक पुलिस में एक एसपी ट्रैफिक, तीन सीओ, एक टीआई, दो टीएसआई, 23 एचसीपी, 113 कांस्टेबल, 43 महिला कांस्टेबल, 100 होमगार्ड, 50 पीआरडी जवान तैनात हैं।
फर्ज चालान काटना, लक्ष्य जुर्माना वसूलना
शहर में रोजाना औसतन तीन से चार हादसे होते हैं, जबकि ट्रैफिक पुलिस 300 वाहनों के चालान काटती है। लेकिन ओवर स्पीड वाहनों पर कार्रवाई सिर्फ दिखावे की है। स्पीड रडार से लैस इंटरसेप्टर गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस ने शहर में ड्यूटी वाहन बना दिया है। बुधवार रात दिल्ली रोड पर खूनी कंटेनर को यदि पुलिस रोकती या चेकिंग करती तो पांच लोगों की जान न जाती।
डराते हैं ये आंकड़े
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा मौत ओवर स्पीड में जाती है। चाहे दोपहिया हो या फिर चार पहिया वाहन। नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे पर सबसे ज्यादा मौत होती हैं। ट्रैफिक के आंकड़ों की बात करें तो साल 2017 में 80 प्रतिशत सड़क दुघर्टनाएं नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे पर हुई है। जिनमें ओवर स्पीड हादसों का सबसे बड़ा कारण रहा। वहीं, एक अगस्त से 15 अगस्त तक जहां 44 दुघर्टनाएं हुईं तो 15 लोगों की मौत हुई और 36 लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। लेकिन 29 अगस्त तक मरने वालों की संख्या 29 तक पहुंच गई। बीते साल 2017 में जिले में 417 लोगों की मौत हुई थी। लगातार हादसों के बाद भी इसे रोकने की कवायद ट्रैफिक पुलिस द्वारा नहीं की गई। अगस्त माह में ओवर स्पीड में एक भी चालान नहीं काटा गया।
शराब पीकर चलाते हैं वाहन
शहर में आबू लेन, बाउंड्री रोड, दिल्ली रोड, हापुड़ रोड, गढ़ रोड, यूनिवर्सिटी रोड और रुड़की रोड पर अधिकांश मामले शराब पीकर गाड़ी चलाने के आते हैं। इनमें भी रात को गाड़ियां निर्धारित से कहीं अधिक गति से दौड़ायी जाती हैं। जो खुद के साथ दूसरों की जिंदगी के लिए खतरा बनती हैं। लेकिन शराब पीकर वाहन चलाने और ओवर स्पीड वाहन चलाने के मामलों में ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं।
खास बातें:
20 किमी प्रति घंटा निर्धारित है शहर में भारी वाहन की गति
30 किमी प्रति घंटा निर्धारित है शहर में हल्के वाहन की गति
100 किमी प्रति घंटा से ज्यादा रफ्तार से दौड़ा था बुधवार रात कंटेनर
- ट्रैफिक पुलिस को अगस्त माह में एक भी वाहन नहीं मिला ओवरस्पीड
- वाहनों की स्पीड पर अंकुश रखने के लिए नहीं चलाते गंभीरता से अभियान