एसएसपी ऑफिस पर आत्मदाह का प्रयास, बखेड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। गोकशी के खिलाफ आवाज उठाने वाले दिलशाद भारती की तीन साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं दिलशाद के भाइयों को उसके बाद कई बार धमकी मिली। उस केस में आरोपी जेल से बाहर हैं। जिसमें समझौता भी हो चुका है। चार दिन पहले मृतक के भाई पर तीन युवकों ने जानलेवा हमला किया, तो उसने लिसाड़ीगेट थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर रविवार को पीड़ित का भाई केरोसिन लेकर एसएसपी ऑफिस पहुंचा और गेट के बाहर ही तेल छिड़कर आत्मदाह की कोशिश की।
लिसाड़ीगेट के सद्दीनगर निवासी दिलशाद भारती की 2014 में छह लोगों ने हत्या कर दी थी। मामले में आरोपी जेल गये, लेकिन बाद में कोर्ट से जमानत मिल गई। 13 जुलाई को मृतक दिलशाद भारती का भाई इमरान दिल्ली रोड स्थित एक शादी समारोह से घर जा रहा था। आरोप है कि उसी के पड़ोस के अबरार, इकबाल और नवाब ने फायरिंग कर दी थी। इमरान ने लिसाड़ीगेट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। रविवार दोपहर को इमरान का भाई आरिफ आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर एसएसपी ऑफिस पहुंचा। वहां ऑफिस के बाहर उसने अपने ऊपर करोसिन उड़ेल लिया और आत्मदाह की कोशिश की। इस बीच वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसी तरह उसे बचाया। सूचना पर पहुंचे इंस्पेक्टर सिविल लाइन धीरज शुक्ला आरिफ को सिविल लाइन थाने ले गये। उसके एक घंटे बाद एसओ लिसाड़ीगेट धर्मेंद्र कुमार अपने थाने का केस बताकर आरिफ को थाने ले गए। पुलिस ने आरिफ के अलावा उसके दोनों भाई इमरान और आसिफ को भी हिरासत में ले लिया। एसओ लिसाड़ीगेट धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि आरिफ के खिलाफ आत्महत्या का प्रयास और उसके दोनों भाइयों के खिलाफ शांतिभंग में कार्रवाई की है। अबरार को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
इंसाफ नहीं देते तो गोली मार दो
इमरान और उसके भाई आरिफ ने लिसाड़ीगेट थाने की हवालात में कहा कि इस पुलिस से कौन इंसाफ की उम्मीद कर सकता है। दिलशाद हिंदू संगठन के लोगों के साथ गोकशी के खिलाफ आवाज उठाता था। लेकिन गोतस्करों ने उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस की लापरवाही से हत्या होने का आरोप लगाया। बिखलते हुए इमरान ने कहा कि पुलिस आरोपी पक्ष से साठगांठ कर चुकी है। जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया है। पीड़ित ने एसओ लिसाड़ीगेट से कहा कि यदि मुझे इंसाफ नहीं दे सकतेे तो गोली मार दो।
एसओ ने बता दिया फर्जी मुकदमा
इमरान पर हुए हमले के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर आरिफ एसएसपी ऑफिस पहुंचा था। वहीं एसओ लिसाड़ीगेट ने कहा कि हमले का आरोप झूठा है और फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया था। अब सवाल उठता है कि जब हमला नहीं हुआ तो पुलिस ने केस दर्ज क्यों किया। उधर, रविवार को युवा सेवा समिति के अध्यक्ष बदर अली के साथ 30-35 लोग एसएसपी ऑफिस पहुंचे और हंगामा कर नारेबाजी की। बदर अली और सपा पार्षद आबाद मंसूरी का कहना है कि मृतक दिलशाद के तीनों भाई फर्जी तरह से जानलेवा हमले में फंसा रहे हैं। गिरफ्तारी के दबाव के लिए आरिफ ने तेल छिड़का था। एसओ लिसाड़ीगेट का कहना है सीसी टीवी फुटेज के अनुसार इमरान पर कोई हमला नहीं हुआ। बल्कि वह खुद अबरार को धमकाने पहुंचा था। पुलिस ने अबरार को शनिवार रात को ही हिरासत में लेने की बात कही है।
खास बातें
गोकशी के विरोध में तीन साल पहले मारे गये दिलशाद का भाई पहुंचा केरोसिन लेकर
चार दिन पहले दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी न होने पर किया हंगामा